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बिना परीक्षा पास होंगे 1.82 लाख बुंदेली छात्र
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बांदा। कोरोना संक्रमण के चलते इस साल विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं न कराकर छात्र-छात्राओं को प्रोन्नत के आधार पर अगली कक्षा दिए जाने के प्रदेश सरकार के फैसले से बुंदेलखंड के 184 महाविद्यालयों के 1.82 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं लाभान्वित होंगे।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी से बुंदेलखंड के सातों जनपदों के कुल 184 महाविद्यालय संबद्ध हैं। इनमें राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन महाविद्यालय शामिल हैं। इस वर्ष इन महाविद्यालयों में बीए, बीएससी, बीकाम, एमए, एमएससी, एमकॉम आदि कक्षाओं में एक लाख 82 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। मार्च माह में वार्षिक परीक्षा शुरू हुई। लगभग आधे विषयों की परीक्षा हो पाई थी कि तभी लॉकडाउन घोषित हो गया। शेष विषयों की परीक्षा अटक गई। लगातार लॉकडाउन लागू रहने से अब तक शेष परीक्षाएं नहीं कराई जा सकीं।
अंतत: अब प्रदेश सरकार ने इसके लिए गठित समिति की सिफारिश पर शेष परीक्षाएं न कराने और विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने का निर्णय लिया है। सोमवार को हुए इस सरकारी फैसले से बुंदेलखंड के अधिकांश स्नातक और परास्नातक छात्र-छात्राओं में प्रसन्नता हैं।
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राजकीय बालिका महाविद्यालय की प्राचार्य डा.दीपाली गुप्ता का कहना है कि स्नातक कक्षाओं में परीक्षा न हो पाने से सरकार ने असमंजस की स्थिति खत्म कर दी है। यह बेहतर और स्वागत योग्य निर्णय है। पढ़ाई से ज्यादा स्वास्थ्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य है।
राजीव गांधी डीएवी महाविद्यालय प्राचार्य डा.रामभरत सिंह तोमर का कहना है कि प्रदेश सरकार का यह फैसला छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य हित में है। परीक्षार्थी अपनी अधूरी परीक्षा से काफी परेशान थे। निकट भविष्य में कोरोना संक्रमण से पूरी तरह मुक्ति के भी आसार नजर नहीं आ रहे थे। ऐसे में यही एक बेहतर रास्ता था।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी से बुंदेलखंड के सातों जनपदों के कुल 184 महाविद्यालय संबद्ध हैं। इनमें राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन महाविद्यालय शामिल हैं। इस वर्ष इन महाविद्यालयों में बीए, बीएससी, बीकाम, एमए, एमएससी, एमकॉम आदि कक्षाओं में एक लाख 82 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। मार्च माह में वार्षिक परीक्षा शुरू हुई। लगभग आधे विषयों की परीक्षा हो पाई थी कि तभी लॉकडाउन घोषित हो गया। शेष विषयों की परीक्षा अटक गई। लगातार लॉकडाउन लागू रहने से अब तक शेष परीक्षाएं नहीं कराई जा सकीं।
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अंतत: अब प्रदेश सरकार ने इसके लिए गठित समिति की सिफारिश पर शेष परीक्षाएं न कराने और विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने का निर्णय लिया है। सोमवार को हुए इस सरकारी फैसले से बुंदेलखंड के अधिकांश स्नातक और परास्नातक छात्र-छात्राओं में प्रसन्नता हैं।
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राजकीय बालिका महाविद्यालय की प्राचार्य डा.दीपाली गुप्ता का कहना है कि स्नातक कक्षाओं में परीक्षा न हो पाने से सरकार ने असमंजस की स्थिति खत्म कर दी है। यह बेहतर और स्वागत योग्य निर्णय है। पढ़ाई से ज्यादा स्वास्थ्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य है।
राजीव गांधी डीएवी महाविद्यालय प्राचार्य डा.रामभरत सिंह तोमर का कहना है कि प्रदेश सरकार का यह फैसला छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य हित में है। परीक्षार्थी अपनी अधूरी परीक्षा से काफी परेशान थे। निकट भविष्य में कोरोना संक्रमण से पूरी तरह मुक्ति के भी आसार नजर नहीं आ रहे थे। ऐसे में यही एक बेहतर रास्ता था।