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Balrampur News: नवोदय में उर्दू तो केंद्रीय व निजी विद्यालयों में संस्कृत की होगी पढ़ाई

Wed, 06 May 2026 11:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Wed, 06 May 2026 11:15 PM IST
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Urdu will be taught in Navodaya and Sanskrit in central and private schools
फोटो-17-बलरामपुर के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ाई करते विद्यार्थी ।-संवाद
बलरामपुर। नई शिक्षा नीति से कक्षा छह से सीबीएसई ने तीसरी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य कर दिया है। इससे स्कूलों में पढ़ाई का स्वरूप बदलने लगा है। शहर के अधिकांश निजी विद्यालयों में संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो चुकी है, जबकि जवाहर नवोदय विद्यालय ने उर्दू और केंद्रीय विद्यालय ने भी संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में चुना है।
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नई व्यवस्था को लेकर स्कूलों में उत्साह के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कई तरह की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। खासकर छात्रों को नई भाषा के उच्चारण, व्याकरण और शब्दावली को समझने में शुरुआती कठिनाई हो रही है। कक्षा छह की छात्रा आरोही सिंह, सान्वी पांडेय, हिमांशी पाठक आदि का कहना है कि अब तक उनकी पढ़ाई हिंदी और अंग्रेजी तक सीमित थी। तीसरी भाषा जुड़ने से शुरुआत में थोड़ा दबाव महसूस हो रहा है। संस्कृत पढ़ रहे छात्रों अगम सिंह, विनोद, अनुराग आदि ने बताया कि श्लोक, संधि-विच्छेद और धातु रूप जैसे विषय नए हैं, जिन्हें समझने में समय लग रहा है। वहीं उर्दू चुनने वाले छात्रों को लिपि और लिखावट सीखने में दिक्कत आ रही है। हालांकि अधिकांश छात्रों ने यह भी माना कि नियमित अभ्यास और शिक्षकों के सहयोग से धीरे-धीरे यह आसान हो जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि तीसरी भाषा लागू होने के साथ ही पाठ्यक्रम, समय-सारिणी और संसाधनों में बदलाव करना पड़ा है। नवोदय विद्यालय की प्राचार्य गीता मिश्र ने कहाकि कई विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की व्यवस्था करनी पड़ी है। शिक्षकों के अनुसार शुरुआती महीनों में छात्रों की बुनियादी समझ विकसित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। केंद्रीय विद्यालय के प्रधानाचार्य वीपी सिंह ने बताया कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला है। वेद, उपनिषद और अनेक शास्त्रीय ग्रंथ इसी भाषा में रचे गए हैं। उनका कहना है कि संस्कृत पढ़ने से छात्रों का तार्किक और भाषाई विकास बेहतर होता है। साथ ही यह उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से जोड़ती है। एक निजी विद्यालय के प्रधानाचार्य आसीम रूमी ने कहाकि पढ़ाई शुरू करा दी गई है।
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31 मई तक भाषा चयन अनिवार्य

सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि कक्षा छह में तीसरी भाषा का चयन 31 मई तक ओएसआईएस पोर्टल पर अपलोड या संशोधित कर दें। बोर्ड के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 से यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होगी और एक जुलाई से पढ़ाई शुरू करनी होगी। समय सीमा का पालन न करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई भी की जा सकती है। सीबीएसई बोर्ड से जुड़े निशांत श्रीवास्तव ने बताया कि तीनों में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होना अनिवार्य है। बोर्ड ने यह व्यवस्था एक साथ सभी कक्षाओं में लागू नहीं होगी। सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छह में शुरुआत होगी। इसके बाद हर वर्ष एक-एक कक्षा में इसे बढ़ाया जाएगा और वर्ष 2030-31 तक कक्षा छह से दसवीं तक सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य हो जाएगी।
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