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Balrampur News: पानी तो उतरा, कीचड़ और गंदगी ने बढ़ाई मुश्किल

Sat, 13 Sep 2025 10:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Sep 2025 10:27 PM IST
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The water receded, but mud and dirt increased the difficulty
बलरामपुर के रामगढ़ मैटहवा में बाढ़ का पानी कम होने के बाद फैली गंदगी। संवाद
महराजगंज तराई। खरझार नाले में शुक्रवार सुबह आई बाढ़ से तीन गांव जलमग्न हो गए थे। शनिवार को गांवों से पानी तो उतर गया लेकिन कीचड़ और गंदगी छोड़ गया। इस गंदगी और बदबू से जहां लोगों का जीना मुहाल है, वहीं बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
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गांव में चारों तरफ कीचड़ और सड़ांध है। मच्छर और कीड़े परेशान कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से न दवा छिड़काव किया गया और न ही सफाई कराई गई। इससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा मंडरा रहा है। गांव निवासी अनिल ने बताया कि बाढ़ में उनका छप्पर का घर गिर गया। नन्हे का घर कीचड़ से भरा है, परिवार वहीं रहने को मजबूर है। अवध बिहारी, दक्षिणी पाठक, रामसागर, फतेह बहादुर चौधरी, इंदर वर्मा और प्रधान वर्मा समेत कई ग्रामीणों के घर शुक्रवार को पानी में डूबे रहे। शनिवार को घर की स्थिति रहने लायक नहीं थी। गांव के कंपोजिट विद्यालय और राजकीय विद्यालय में बाढ़ का पानी भरने से शनिवार को ताला लटक गया। विद्यालय का कैंपस कीचड़ से पटा पड़ा है। बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है।
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डूब गए खेत, टूटीं उम्मीदें
बाढ़ ने किसानों को भी बड़ा झटका दिया है। नूर इस्लाम की दो बीघा, राजित की एक बीघा, सियाराम की दो बीघा, बंसीलाल की तीन बीघा, इंदर की तीन बीघा, दीनानाथ की तीन बीघा और गोली की तीन बीघा फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। खेतों में पानी के साथ आई रेत जम गई है, जिससे भविष्य में बोआई भी प्रभावित हो सकती है। किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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राजस्वकर्मी ने पड़ताल कर भेजी रिपोर्ट
क्षेत्रीय लेखपाल अभिनव ने बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी तुलसीपुर स्वामीनाथ ने कहा कि विद्यालयों में पानी उतरने और सफाई होने के बाद ही पढ़ाई दोबारा शुरू होगी। गांव के लोग अब भी राहत और मदद का इंतजार कर रहे हैं। बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन उसने जो जख्म दिए हैं, उन्हें भरने में लंबा वक्त लगेगा।
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