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Balrampur News: गुरु के आदर्शों का अनुकरण करना अच्छे शिष्य की निशानी
Sat, 16 Dec 2023 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 16 Dec 2023 11:19 PM IST
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फोटो-15
-एमएलके महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बलरामपुर। एमएलके महाविद्यालय सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ शनिवार को हुआ। संगोष्ठी में विभिन्न प्रदेशों से आए शिक्षाविदों ने प्राचीन भारत की शिक्षा का वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में प्रोत्साहन विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कर गुरु व शिष्य के बीच संबंधों के बारे में बताया। वक्ताओं ने कहा कि गुरु के आदर्शों का अनुकरण करना ही एक अच्छा शिष्य होने की निशानी है।
इस अवसर पर पब्लिक प्रोसीडिंग पुस्तक का विमोचन भी किया गया। सेमिनार का शुभारंभ मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संस्कृति केंद्रीय विश्वविद्यालय नई दिल्ली के वरिष्ठ आचार्य एवं शिक्षापीठ के अध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद एवं इसी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक, आईसीएचआर के निदेशक डॉ. ओमजी उपाध्याय, महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव लेफ्टिनेंट कर्नल आरके मोहंता एवं प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय ने किया। कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि गुरु के आदर्शों एवं संपूर्ण जीवनशैली का अनुकरण करना ही अच्छे शिष्य की निशानी है। सुनने की इच्छा और सीखने की ललक रखने वाला ही अच्छा शिष्य बनता है। एक अच्छा गुरु वही होगा जो जीवनभर अच्छा शिष्य बना रहे। शिक्षकों को भी आत्म मूल्यांकन कर शिष्य को आगे बढ़ने की प्रेरणा देना चाहिए।
मुख्य अतिथि ने कहा कि प्राचीन भारत का इतिहास बड़ा ही गौरवशाली रहा है। भारत वह देश है जहां प्रकाश और ज्ञान का अथाह सागर हमेशा रहा है। व्यवहार व सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए उन्होंने अध्यापक को बहुत ही सरल होना चाहिए। डॉ. ओम जी उपाध्याय ने गुरु शिष्य के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए सेमिनार के शीर्षक पर विस्तृत चर्चा की। संगोष्ठी का संचालन एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. देवेंद्र कुमार चौहान ने किया।
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-एमएलके महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बलरामपुर। एमएलके महाविद्यालय सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ शनिवार को हुआ। संगोष्ठी में विभिन्न प्रदेशों से आए शिक्षाविदों ने प्राचीन भारत की शिक्षा का वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में प्रोत्साहन विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कर गुरु व शिष्य के बीच संबंधों के बारे में बताया। वक्ताओं ने कहा कि गुरु के आदर्शों का अनुकरण करना ही एक अच्छा शिष्य होने की निशानी है।
इस अवसर पर पब्लिक प्रोसीडिंग पुस्तक का विमोचन भी किया गया। सेमिनार का शुभारंभ मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संस्कृति केंद्रीय विश्वविद्यालय नई दिल्ली के वरिष्ठ आचार्य एवं शिक्षापीठ के अध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद एवं इसी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक, आईसीएचआर के निदेशक डॉ. ओमजी उपाध्याय, महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव लेफ्टिनेंट कर्नल आरके मोहंता एवं प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय ने किया। कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि गुरु के आदर्शों एवं संपूर्ण जीवनशैली का अनुकरण करना ही अच्छे शिष्य की निशानी है। सुनने की इच्छा और सीखने की ललक रखने वाला ही अच्छा शिष्य बनता है। एक अच्छा गुरु वही होगा जो जीवनभर अच्छा शिष्य बना रहे। शिक्षकों को भी आत्म मूल्यांकन कर शिष्य को आगे बढ़ने की प्रेरणा देना चाहिए।
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मुख्य अतिथि ने कहा कि प्राचीन भारत का इतिहास बड़ा ही गौरवशाली रहा है। भारत वह देश है जहां प्रकाश और ज्ञान का अथाह सागर हमेशा रहा है। व्यवहार व सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए उन्होंने अध्यापक को बहुत ही सरल होना चाहिए। डॉ. ओम जी उपाध्याय ने गुरु शिष्य के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए सेमिनार के शीर्षक पर विस्तृत चर्चा की। संगोष्ठी का संचालन एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. देवेंद्र कुमार चौहान ने किया।
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