{"_id":"61db209fa6e5085bb979d4fc","slug":"the-mercury-dropped-due-to-rain-the-cold-increased-balrampur-news-lko6127531136","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश के कारण लुढ़का पारा, बढ़ी कड़ाके की ठंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश के कारण लुढ़का पारा, बढ़ी कड़ाके की ठंड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलरामपुर। लगातार हो रही बारिश से पारा लुढ़क गया है। रविवार को भी कड़ाके की ठंड का प्रकोप भी बढ़ गया है। रविवार को अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है।
बारिश से तैयार सरसों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि गन्ना, अरहर, मटर तथा चने की फसल को बारिश से लाभ भी पहुंचा है। मौसम खराब होने से पहले दिन में हल्की धूप से लोगों को ठिठुरन सर्दी से राहत मिल रही थी, लेकिन बारिश ने खेल बिगाड़ दिया।
बारिश के कारण खेतों से कटकर खलिहान में आई सरसों की फसल भीगने से उसके नुकसान होने की संभावना काफी बढ़ गई है। किसान इशरार, रोहित, परवेज, मोहित व सुंदर आदि ने बताया कि यदि शीघ्र मौसम साफ नहीं हुआ तो सरसो की तैयार फसल सड़ सकती है।
विज्ञापन
दूसरी ओर किसानों ने बताया कि बारिश से गेहूं, गन्ना व मटर की फसल को फायदा पहुंचा है। फसल की पत्तियों पर जमी ओस तथा पाले की धुलाई हो गई है। बारिश से लोगों को सड़कों पर फैले कीचड़ से दो-चार होना पड़ा।
विज्ञापन
बारिश से तैयार सरसों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि गन्ना, अरहर, मटर तथा चने की फसल को बारिश से लाभ भी पहुंचा है। मौसम खराब होने से पहले दिन में हल्की धूप से लोगों को ठिठुरन सर्दी से राहत मिल रही थी, लेकिन बारिश ने खेल बिगाड़ दिया।
विज्ञापन
बारिश के कारण खेतों से कटकर खलिहान में आई सरसों की फसल भीगने से उसके नुकसान होने की संभावना काफी बढ़ गई है। किसान इशरार, रोहित, परवेज, मोहित व सुंदर आदि ने बताया कि यदि शीघ्र मौसम साफ नहीं हुआ तो सरसो की तैयार फसल सड़ सकती है।
विज्ञापन
दूसरी ओर किसानों ने बताया कि बारिश से गेहूं, गन्ना व मटर की फसल को फायदा पहुंचा है। फसल की पत्तियों पर जमी ओस तथा पाले की धुलाई हो गई है। बारिश से लोगों को सड़कों पर फैले कीचड़ से दो-चार होना पड़ा।