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तराई से विलुप्त हो रही काला नमक धान की खुशबू

Sun, 10 Jan 2021 09:35 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 10 Jan 2021 09:35 PM IST
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The fragrance of black salt paddy becoming extinct from Terai
बलरामपुर। तराई क्षेत्र के खादर इलाके में पैदा होने वाली धान की अद्वितीय प्रजाति काला नमक अब धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है। हाइब्रिड प्रजातियों के दौर में इसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। स्वाद और खुशबू के लिए धान की काला नमक प्रजाति दुनिया भर में मशहूर है। इस प्रजाति के धान का संरक्षण व संवर्द्धन नहीं किया जा रहा है। इससे क्षेत्रीय किसान मायूस है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन व प्रशासन को काला नमक धान की प्रजाति को बचाने के उपाय करने चाहिए।
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काला नमक प्रजाति का धान तराई इलाके के खादर क्षेत्र में काफी समय से उगाया जाता है। इस धान का रंग काला होता है तथा यह 160 से 175 दिन में पक कर तैयार हो जाता है। जिले के पचपेड़वा ब्लॉक से लेकर सिद्धार्थनगर जनपद के सोहरतगढ़, चिल्हिया तथा बर्डपुर में इसकी पैदावार ज्यादा होती है।
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काला नमक धान का चावल अपने स्वाद व खुशबू के लिए देश-दुनिया में काफी मशहूर है। लोग कहते है कि यदि किसी के घर में यह चावल पक रहा होता है तो उसकी खुशबू से पड़ोसी को भी इसका पता चल जाता है। वहीं धान की इस प्रजाति का संरक्षण व संवर्द्धन नहीं होने से स्थानीय किसानों में मायूसी है। लोगों का कहना है कि शासन व प्रशासन को धान की इस प्रजाति के संरक्षण के लिए उपाय करने चाहिए।
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अंग्रेजों व अटल बिहारी को था पसंद
बताते है कि काला नमक धान से बना चावल अंग्रेजों को भी काफी पसंद था। यहां से यह चावल दिल्ली व इंग्लैंड तक भेजा जाता था। वहीं जिले से पहली बार सांसद बने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी काला नमक चावल की खिचड़ी बहुत पसंद थी।
किसानों की मांग सरकार बचाए अस्तित्व
क्षेत्रीय किसान इरशाद आलम उर्फ डब्लू, श्रीराम चौधरी, पूर्व मंत्री वसीम खां तथा हारुन खां आदि का कहना है कि काला नमक धान क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान थी। हाइब्रिड प्रजातियों के दौर में काला नमक के संरक्षण व संवर्धन पर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। सरकार को इस प्रजाति के संरक्षण व संवर्धन के लिए विशेष प्रयास करना चाहिए। इससे धान की पैदावार बढ़ेगी और क्षेत्रीय किसानों को उपज का अच्छा मूल्य भी प्राप्त होगा।

हो रहा संरक्षण
काला नमक प्रजाति का जीनोम इंडियन कांउसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च संस्था ने सुरक्षित किया गया है। इसके संरक्षण व संवर्धन की दिशा में काम किया जा रहा है। - मनजीत कुमार, जिला कृषि अधिकारी बलरामपुर
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