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नदियों व सरोवरों में लगाई आस्था की डुबकी
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बलरामपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर सोमवार को नदी व पवित्र सरोवरों में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। भोर पहर से ही श्रद्धालुओं ने नदियों व पवित्र सरोवरों में स्नान करके भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की।
श्रद्धालुओं ने कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान-दान करके सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। कोविड-19 के चलते इस बार राप्ती नदी के सिसई घाट पर नहान मेले का आयोजन नहीं हुआ।
धर्म ग्रंथों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शंकर, भगवान विष्णु एवं भगवान भास्कर की पूजा अर्चना एवं गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संघार किया था और इसी दिन भवगान विष्णु ने वेद व पुराण की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार लिया था।
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इसी मान्यता के चलते कार्तिक पूर्णिमा (नहान मेला) पर्व पूरे जिले में धूमधाम के साथ मनाया गया। भोर पहर ही राप्ती नदी के सिसई घाट, श्रृंगारजोत घाट, सिरिया नाला, बूढ़ी राप्ती तथा शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर स्थित सूर्यकुंड में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया।
श्रद्धालुओं ने नदियों व सूर्यकुंड में डुबकी लगाकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। भगवान भास्कर की पूजा अर्चना के बाद भक्तों ने अन्न व बछिया दान करके परिवार के लिए धनधान्य एवं सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। घरों में भी लोगों ने स्नान करके अन्नदान किया।
कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में बच्चों का मुंडन व कर्णछेदन आदि संस्कार कराने के लिए भी भारी भीड़ जुटी। इसी तरह गैसड़ी, पचपेड़वा, मथुरा बाजार, ललिया, हरैया, महरागंज तराई, शिवपुरा, चौधरीडीह, पिपरहवा बाजार, श्रीदत्तगंज, गौरा चौराहा, हरिहरगंज, गेड़ास बुजुर्ग, सादुल्लाहनगर, पेहर बाजार, रेहरा बाजार एवं उतरौला में भी कार्तिक पूर्णिमा पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
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श्रद्धालुओं ने कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान-दान करके सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। कोविड-19 के चलते इस बार राप्ती नदी के सिसई घाट पर नहान मेले का आयोजन नहीं हुआ।
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धर्म ग्रंथों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शंकर, भगवान विष्णु एवं भगवान भास्कर की पूजा अर्चना एवं गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संघार किया था और इसी दिन भवगान विष्णु ने वेद व पुराण की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार लिया था।
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इसी मान्यता के चलते कार्तिक पूर्णिमा (नहान मेला) पर्व पूरे जिले में धूमधाम के साथ मनाया गया। भोर पहर ही राप्ती नदी के सिसई घाट, श्रृंगारजोत घाट, सिरिया नाला, बूढ़ी राप्ती तथा शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर स्थित सूर्यकुंड में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया।
श्रद्धालुओं ने नदियों व सूर्यकुंड में डुबकी लगाकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। भगवान भास्कर की पूजा अर्चना के बाद भक्तों ने अन्न व बछिया दान करके परिवार के लिए धनधान्य एवं सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। घरों में भी लोगों ने स्नान करके अन्नदान किया।
कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में बच्चों का मुंडन व कर्णछेदन आदि संस्कार कराने के लिए भी भारी भीड़ जुटी। इसी तरह गैसड़ी, पचपेड़वा, मथुरा बाजार, ललिया, हरैया, महरागंज तराई, शिवपुरा, चौधरीडीह, पिपरहवा बाजार, श्रीदत्तगंज, गौरा चौराहा, हरिहरगंज, गेड़ास बुजुर्ग, सादुल्लाहनगर, पेहर बाजार, रेहरा बाजार एवं उतरौला में भी कार्तिक पूर्णिमा पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।