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Balrampur News: करंट से झुलसे मासूम का ऑपरेशन से अलग होगा दाहिना हाथ

Tue, 24 Feb 2026 11:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Tue, 24 Feb 2026 11:11 PM IST
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The child who was electrocuted will have his right hand amputated through surgery
लखनऊ केजीएमयू में भर्ती घायल बच्चा।
जरवा। वनटांगिया ग्राम मूतेहरा सोनगढ़ा में 21 फरवरी को छत पर खेलते समय हाईटेंशन लाइन की चपेट में आए आठ वर्षीय सुमेंद्र की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे में करीब 12 फीट नीचे लकड़ी के ढेर पर गिरने से उसके दाहिने हाथ, पैर, पीठ और सिर में गंभीर चोटें आईं हैं। लखनऊ स्थित केजीएमयू के बर्न केयर यूनिट में भर्ती मासूम का ऑपरेशन तय हुआ है। मासूम को बचाने के लिए दाहिना हाथ काटना होगा।
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तीन दिन तक खून की व्यवस्था न हो पाने से ऑपरेशन टलता रहा। मंगलवार की दोपहर चचेरे भाई अंशु थारू ने आगे बढ़कर एक यूनिट रक्तदान किया, जिससे उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। अब भी एक और यूनिट रक्त की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए लखनऊ के खंड शिक्षा अधिकारी रामराज ने परिवार से संपर्क किया है। उन्होंने खून की व्यवस्था कराने का भरोसा दिया है।
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मासूम के पिता पिंगल थारू ने बताया कि ऑपरेशन का समय मंगलवार की रात तय हुआ है। इससे राहत मिली है। अब उन्होंने कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। बताया कि बिजली विभाग के किसी अधिकारी ने हाल तक नहीं पूछा है। थाने में बिजली विभाग की लापरवाही के आरोप में तहरीर दी है। प्रभारी निरीक्षक दुर्विजय ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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पहले अग्निकांड, अब करंट हादसा
पीड़ित के चाचा दुर्गेश थारू ने बताया कि परिवार पहले ही अग्निकांड से प्रभावित रहा है। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। आयुष्मान कार्ड न होने से सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। दवा, जांच और रक्त की व्यवस्था में लगातार खर्च बढ़ रहा है। परिवार ने लोगों और जनप्रतिनिधियों से मदद की अपील की है।

हादसे में लापरवाही साबित होने पर मिलेगा मुआवजा
हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आकर किसी बच्चे का हाथ कट जाना या गंभीर रूप से झुलस जाना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही का परिणाम है। विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण दुर्घटना हुई, तो पीड़ित परिवार को 10 लाख से लेकर एक करोड़ या उससे अधिक का मुआवजा मिल सकता है।

अदालत मुआवजा तय करते समय शारीरिक क्षति, स्थायी दिव्यांगता, बच्चे की आयु, भविष्य की संभावित आय, इलाज का खर्च, कृत्रिम अंग व पुनर्वास पर आने वाला व्यय और मानसिक पीड़ा जैसे पहलुओं को आधार बनाती है। पीड़ित परिवार को तत्काल प्राथमिकी दर्ज करानी चाहिए और संबंधित विद्युत विभाग को लिखित सूचना देनी चाहिए।

अस्पताल के सभी रिकॉर्ड, दिव्यांग प्रमाणपत्र, ऑपरेशन व इलाज के बिल, घटना स्थल का फोटो या वीडियो तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सुरक्षित रखना जरूरी होता है। परिवार जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन दे सकता है। राज्य विद्युत नियामक आयोग में शिकायत की जा सकती है या सिविल न्यायालय में क्षतिपूर्ति वाद दायर कर सकते हैं।
-एचएन शुक्ल, पूर्व सलाहकार ऊर्जा विभाग देवीपाटन मंडल

आयुष्मान कार्ड बनाएं, सीएम राहत कोष में भेजा जाए प्रस्ताव
गरीब परिवार का आयुष्मान कार्ड तत्काल बनाना चाहिए। जिलाधिकारी को इलाज में सुविधा के साथ ही सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए प्रस्ताव भेजना चाहिए। शासन में आपात स्थिति में प्रभावित परिवारों के लिए कई तरह की सुविधाएं हैं।

रामबहादुर, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी

जेई से ली है रिपोर्ट
मुतेहरा गांव की घटना के बारे में जेई से रिपोर्ट ली गई है। हाईटेंशन तार के करीब जाने से हादसा हुआ है। हर पहलू की जांच कर रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जा रही है।
राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता तुलसीपुर
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