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Balrampur News: पर्यटकों और शोधार्थियों को लुभा रहा थारू संग्रहालय
Mon, 11 May 2026 11:07 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 11 May 2026 11:07 PM IST
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फोटो-1,2,3-बलरामपुर के इमिलिया कोडर में बने संग्राहलय में रखी थारू संस्कृत से जुड़ी कलाकृतियां।
- फोटो : फीडर पर आग लगने से झुलसे एसएसओ का उपचार करते चिकित्सक। संवाद
बलरामपुर। सीमावर्ती जनपद बलरामपुर अब अपनी समृद्ध थारू संस्कृति के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रहा है। पचपेड़वा क्षेत्र के इमिलिया कोडर में स्थापित थारू जनजाति संग्रहालय देश-विदेश के पर्यटकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां थारू जनजाति की पारंपरिक संस्कृति, रहन-सहन, लोककला और सामाजिक जीवन को बेहद जीवंत तरीके से प्रदर्शित किया गया है, जिससे आने वाले लोग इस जनजातीय विरासत को करीब से समझ पा रहे हैं।
संस्कृति विभाग की तरफ से करीब 8.79 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस संग्रहालय ने बलरामपुर के पर्यटन विकास को नई दिशा दी है। महाराणा प्रताप ग्रामोदय इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य आशुतोष का कहना है कि संग्रहालय में थारू समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, नृत्य, हस्तशिल्प, खान-पान और दैनिक जीवन से जुड़ी वस्तुओं को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। आधुनिक तकनीक और विशेष एग्जीबिट्स के माध्यम से तैयार की गई प्रदर्शनी पर्यटकों को थारू संस्कृति से भावनात्मक रूप से जोड़ने का कार्य कर रही है। देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले पर्यटक संग्रहालय में पहुंचकर थारू समाज की संस्कृति और परंपराओं की जानकारी ले रहे हैं। वहीं विदेशी पर्यटक भी इस अनूठी जनजातीय विरासत को देखने के लिए बलरामपुर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े विद्यार्थी एवं शोधार्थी इसे जनजातीय अध्ययन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रहे हैं। संग्रहालय युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और लोक परंपराओं को समझने का अवसर भी प्रदान कर रहा है।- संवाद
स्थानीय हस्तशिल्प को मिल रहा नया बाजार
-- संग्रहालय के कारण थारू समुदाय से जुड़े हस्तशिल्प, पारंपरिक सजावटी वस्तुओं और लोक कलाओं को नई पहचान मिल रही है। बाहर से आने वाले पर्यटक स्थानीय उत्पादों में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे कारीगरों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ने की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
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सेल्फी प्वाइंट और पारंपरिक झोपड़ियां बनीं आकर्षण
संग्रहालय परिसर में तैयार की गई थारू शैली की झोपड़ियां, पारंपरिक संरचनाएं और सांस्कृतिक सजावट पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रही हैं। यहां आने वाले लोग तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिससे बलरामपुर की सांस्कृतिक पहचान तेजी से लोगों तक पहुंच रही है।
जिले में तेजी से पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। थारू जनजाति संग्रहालय जिले की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती दे रहा है। इससे न केवल पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी विकसित हो रहे हैं। आने वाले दिनों में पर्यटन को रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं को स्थानीय स्तर पर स्वावलंबी बनाने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
-- विपिन कुमार जैन, जिलाधिकारी बलरामपुर
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संस्कृति विभाग की तरफ से करीब 8.79 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस संग्रहालय ने बलरामपुर के पर्यटन विकास को नई दिशा दी है। महाराणा प्रताप ग्रामोदय इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य आशुतोष का कहना है कि संग्रहालय में थारू समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, नृत्य, हस्तशिल्प, खान-पान और दैनिक जीवन से जुड़ी वस्तुओं को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। आधुनिक तकनीक और विशेष एग्जीबिट्स के माध्यम से तैयार की गई प्रदर्शनी पर्यटकों को थारू संस्कृति से भावनात्मक रूप से जोड़ने का कार्य कर रही है। देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले पर्यटक संग्रहालय में पहुंचकर थारू समाज की संस्कृति और परंपराओं की जानकारी ले रहे हैं। वहीं विदेशी पर्यटक भी इस अनूठी जनजातीय विरासत को देखने के लिए बलरामपुर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े विद्यार्थी एवं शोधार्थी इसे जनजातीय अध्ययन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रहे हैं। संग्रहालय युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और लोक परंपराओं को समझने का अवसर भी प्रदान कर रहा है।- संवाद
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स्थानीय हस्तशिल्प को मिल रहा नया बाजार
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सेल्फी प्वाइंट और पारंपरिक झोपड़ियां बनीं आकर्षण
संग्रहालय परिसर में तैयार की गई थारू शैली की झोपड़ियां, पारंपरिक संरचनाएं और सांस्कृतिक सजावट पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रही हैं। यहां आने वाले लोग तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिससे बलरामपुर की सांस्कृतिक पहचान तेजी से लोगों तक पहुंच रही है।
जिले में तेजी से पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। थारू जनजाति संग्रहालय जिले की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती दे रहा है। इससे न केवल पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी विकसित हो रहे हैं। आने वाले दिनों में पर्यटन को रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं को स्थानीय स्तर पर स्वावलंबी बनाने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

फोटो-1,2,3-बलरामपुर के इमिलिया कोडर में बने संग्राहलय में रखी थारू संस्कृत से जुड़ी कलाकृतियां।- फोटो : फीडर पर आग लगने से झुलसे एसएसओ का उपचार करते चिकित्सक। संवाद