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Balrampur News: टीईटी अनिवार्यता से लाखों शिक्षक परेशान
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बलरामपुर के कलेक्ट्रेट में एडीएम को ज्ञापन सौंपते शिक्षक।-स्रोत: संगठन
बलरामपुर। टीईटी की अनिवार्यता के आदेश के बाद लाखों शिक्षकों में निराशा की भावना आ गई है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रदर्शन किया। इसके बाद केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपकर शिक्षकों के हित में सहूलियत दिलाए जाने की मांग की।
संघ के जिलाध्यक्ष अजय प्रताप सिंह ने कहा कि न्यायालय ने सेवा में बने रहने और पदोन्नति पाने के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया है। जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम शेष है, वे टीईटी बिना सेवा में रह सकते हैं, लेकिन पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक है। वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। मंडलीय/जिला मंत्री मंगल देव मिश्र ने कहा कि इस फैसले से स्कूलों की स्थिति प्रभावित होगी और बच्चों की पढ़ाई बाधित हो सकती है। देश में योग्य शिक्षकों की कमी है और यदि यह फैसला लागू हुआ तो स्कूलों को बंद करने और बच्चों को निजी विद्यालयों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष डाॅ. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि टीईटी केवल पात्रता परीक्षा है और इसे पहले से सेवा में रह रहे अनुभवी शिक्षकों पर लागू करना अन्यायपूर्ण है। कोषाध्यक्ष आरिफ खां ने बताया कि इससे शिक्षकों का मनोबल गिरेगा और शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ेगा। संघ ने मांग की कि टीईटी फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की जाए या अध्यादेश लाकर शिक्षकों की सेवा और अधिकार सुरक्षित किए जाएं। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष आरिफ खान, मनोज कुमार, पवन कुमार यादव, भूपेंद्र त्रिपाठी, नृपेंद्र शुक्ला, आनंद पांडेय, चमन यादव, अल्का टंडन, रश्मि सिंह, असमा खान, सबा, अंजू व शकील रजा आदि मौजूद रहे।
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संघ के जिलाध्यक्ष अजय प्रताप सिंह ने कहा कि न्यायालय ने सेवा में बने रहने और पदोन्नति पाने के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया है। जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम शेष है, वे टीईटी बिना सेवा में रह सकते हैं, लेकिन पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक है। वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। मंडलीय/जिला मंत्री मंगल देव मिश्र ने कहा कि इस फैसले से स्कूलों की स्थिति प्रभावित होगी और बच्चों की पढ़ाई बाधित हो सकती है। देश में योग्य शिक्षकों की कमी है और यदि यह फैसला लागू हुआ तो स्कूलों को बंद करने और बच्चों को निजी विद्यालयों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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वरिष्ठ उपाध्यक्ष डाॅ. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि टीईटी केवल पात्रता परीक्षा है और इसे पहले से सेवा में रह रहे अनुभवी शिक्षकों पर लागू करना अन्यायपूर्ण है। कोषाध्यक्ष आरिफ खां ने बताया कि इससे शिक्षकों का मनोबल गिरेगा और शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ेगा। संघ ने मांग की कि टीईटी फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की जाए या अध्यादेश लाकर शिक्षकों की सेवा और अधिकार सुरक्षित किए जाएं। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष आरिफ खान, मनोज कुमार, पवन कुमार यादव, भूपेंद्र त्रिपाठी, नृपेंद्र शुक्ला, आनंद पांडेय, चमन यादव, अल्का टंडन, रश्मि सिंह, असमा खान, सबा, अंजू व शकील रजा आदि मौजूद रहे।
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