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तैराक होमगार्डों को मिलेगा गोताखोरी का प्रशिक्षण
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बलरामपुर। तैराक होमगार्डों को गोताखोरी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूलों के एक-एक शिक्षक/कर्मी आपदा प्रबंधन के मास्टर ट्रेनर होंगे। आपदा से नुकसान को बचाने के लिए प्रबंधन प्राधिकरण की तरफ से पहल की गई है। कलेक्ट्रेट सभागार की बैठक में आपदा आने से पहले सतर्क रहने की तैयारियों पर चर्चा की गई।
जिला प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीएम वित्त एवं राजस्व/जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अरुण कुमार शुक्ल ने कहा कि जिले की सभी बड़ी इमारतों के बाहर अब उसका नक्शा लगाना अनिवार्य होगा। जिले में आपदा जोखिम को कम करने के प्रयास शुरू किए गए हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वाधान में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम व्यापक स्तर पर कराए जाएंगे।
बैठक को संबोधित करते हुए आपदा प्रबंधन सलाहकार सचिन मदान ने कहा कि जिले के सभी स्कूलों में आपदा प्रबंध समिति का गठन कराने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिया गया है। स्कूलों के एक शिक्षक अथवा एक कर्मी को आपदा प्रबंधन का मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। कुशल तैराक होमागार्डों को गोताखोरी का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ितों की मदद में हाथ बटाएंगे।
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अग्निकांड व भूकंप जैसी आपदाओं में लोग बड़ी इमारतों में फंस जाते हैं। ऐसी इमारतों के सामने नक्शे लगाए जाएंगे जिससे सहायता दल के सदस्यों को राहत पहुंचाने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। सदर एसडीएम डॉ. नागेन्द्र नाथ यादव ने सर्पदंश की घटनाओं में चिकित्सकों की लापरवाही का मुद्दा उठाया।
एक्सईएन पावर कार्पोरेशन अशोक कुमार ने बिजली के टेढ़े खंभों को ठीक कराने के लिए डीएम की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजने का सुझाव दिया। बैठक में डीआईओएस महेन्द्र कुमार कन्नौजिया, जिला कृषि अधिकारी मनजीत कुमार, डॉ. एके पांडेय, उतरौला एसडीएम अरुण कुमार गौड़, तुलसीपुर एसडीएम विनोद कुमार, एएसडीएम नवीन कुमार श्रीवास्तव, अजीत कुमार जायसवाल आदि ने भी सुझाव दिए।
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जिला प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीएम वित्त एवं राजस्व/जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अरुण कुमार शुक्ल ने कहा कि जिले की सभी बड़ी इमारतों के बाहर अब उसका नक्शा लगाना अनिवार्य होगा। जिले में आपदा जोखिम को कम करने के प्रयास शुरू किए गए हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वाधान में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम व्यापक स्तर पर कराए जाएंगे।
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बैठक को संबोधित करते हुए आपदा प्रबंधन सलाहकार सचिन मदान ने कहा कि जिले के सभी स्कूलों में आपदा प्रबंध समिति का गठन कराने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिया गया है। स्कूलों के एक शिक्षक अथवा एक कर्मी को आपदा प्रबंधन का मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। कुशल तैराक होमागार्डों को गोताखोरी का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ितों की मदद में हाथ बटाएंगे।
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अग्निकांड व भूकंप जैसी आपदाओं में लोग बड़ी इमारतों में फंस जाते हैं। ऐसी इमारतों के सामने नक्शे लगाए जाएंगे जिससे सहायता दल के सदस्यों को राहत पहुंचाने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। सदर एसडीएम डॉ. नागेन्द्र नाथ यादव ने सर्पदंश की घटनाओं में चिकित्सकों की लापरवाही का मुद्दा उठाया।
एक्सईएन पावर कार्पोरेशन अशोक कुमार ने बिजली के टेढ़े खंभों को ठीक कराने के लिए डीएम की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजने का सुझाव दिया। बैठक में डीआईओएस महेन्द्र कुमार कन्नौजिया, जिला कृषि अधिकारी मनजीत कुमार, डॉ. एके पांडेय, उतरौला एसडीएम अरुण कुमार गौड़, तुलसीपुर एसडीएम विनोद कुमार, एएसडीएम नवीन कुमार श्रीवास्तव, अजीत कुमार जायसवाल आदि ने भी सुझाव दिए।