{"_id":"6a21d76cd7845865590e6d6b","slug":"sohelwa-forest-is-the-natural-slope-of-the-district-balrampur-news-c-99-1-brp1010-149456-2026-06-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: जिले की प्राकृतिक ढाल है सोहेलवा का जंगल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: जिले की प्राकृतिक ढाल है सोहेलवा का जंगल
Fri, 05 Jun 2026 01:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 05 Jun 2026 01:22 AM IST
विज्ञापन
जरवा। तराई की पहचान रहे सोहेलवा के घने जंगल सिर्फ वन्यजीवों का बसेरा नहीं हैं, बल्कि जिले के लाखों लोगों के लिए स्वच्छ हवा और संतुलित पर्यावरण का आधार भी है। गर्मी के बढ़ते प्रकोप, मौसम के बदलते मिजाज और घटते हरित क्षेत्र के बीच सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग का जंगल आज भी प्रकृति और इंसान के बीच संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग के अधिकारियों ने लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। करीब 425 वर्ग किलोमीटर में फैला सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग हजारों पेड़ों और विविध वन्यजीवों से समृद्ध है। यही हरियाली वातावरण को शुद्ध रखने और ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
तुलसीपुर रेंज के रेंजर अमरजीत प्रसाद ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण और वनों की कटाई के दौर में जंगलों का महत्व और बढ़ गया है। पेड़ केवल छाया नहीं देते, बल्कि पर्यावरण को संतुलित रखने का सबसे बड़ा माध्यम हैं। रामपुर रेंज के रेंजर प्रभात वर्मा ने कहा कि जंगल और वन्यजीव एक-दूसरे के पूरक हैं। इनके संरक्षण से ही प्राकृतिक चक्र सुचारु रूप से चलता है और पर्यावरण स्वस्थ बना रहता है।
विज्ञापन
प्रकृति के प्रति समझनी होगी जिम्मेदारी
तुलसीपुर यूनिट के रेंजर प्रवीण तिवारी के अनुसार, वन विभाग हर वर्ष पौधरोपण और वन संरक्षण अभियान चलाता है लेकिन केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। आम लोगों को भी प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि पर्यावरण का संतुलन बिगड़ा तो इसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ेगा। वन अधिकारियों ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल संरक्षण करने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने की अपील की।
विज्ञापन
विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग के अधिकारियों ने लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। करीब 425 वर्ग किलोमीटर में फैला सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग हजारों पेड़ों और विविध वन्यजीवों से समृद्ध है। यही हरियाली वातावरण को शुद्ध रखने और ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
विज्ञापन
तुलसीपुर रेंज के रेंजर अमरजीत प्रसाद ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण और वनों की कटाई के दौर में जंगलों का महत्व और बढ़ गया है। पेड़ केवल छाया नहीं देते, बल्कि पर्यावरण को संतुलित रखने का सबसे बड़ा माध्यम हैं। रामपुर रेंज के रेंजर प्रभात वर्मा ने कहा कि जंगल और वन्यजीव एक-दूसरे के पूरक हैं। इनके संरक्षण से ही प्राकृतिक चक्र सुचारु रूप से चलता है और पर्यावरण स्वस्थ बना रहता है।
विज्ञापन
प्रकृति के प्रति समझनी होगी जिम्मेदारी
तुलसीपुर यूनिट के रेंजर प्रवीण तिवारी के अनुसार, वन विभाग हर वर्ष पौधरोपण और वन संरक्षण अभियान चलाता है लेकिन केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। आम लोगों को भी प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि पर्यावरण का संतुलन बिगड़ा तो इसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ेगा। वन अधिकारियों ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल संरक्षण करने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने की अपील की।