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Balrampur News: पानी और हवा के दबाव से उड़ाया रॉकेट, बच्चों ने सीखे विज्ञान के गुर
Wed, 21 Oct 2026 10:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 21 Oct 2026 10:45 PM IST
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फोटो-47-बलरामपुर के कंपोजिट विद्यालय बिराहिमपुर में प्रोजेक्ट दिखाते विद्यार्थी ।-स्रोत: विभाग
बलरामपुर। कंपोजिट विद्यालय बिराहिमपुर में विद्यार्थियों ने पानी और हवा के दबाव से वाटर रॉकेट (हाइड्रो रॉकेट) उड़ाकर विज्ञान के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप में समझा। प्रयोग आधारित इस गतिविधि से बच्चों में विज्ञान के प्रति उत्साह देखने को मिला।
सहायक अध्यापक डॉ. श्वेता सिंह के नेतृत्व में विद्यालय के छात्र नासिर और फैजान ने इस प्रयोग को सफलतापूर्वक पूरा किया। रॉकेट को आसमान में उड़ते देख विद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल बन गया। विद्यार्थियों ने प्रयोग को ध्यान से देखा और इसके पीछे काम करने वाले वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझा।
डॉ. श्वेता सिंह ने बताया कि किताबी ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने पर विषयों को समझना आसान और रोचक हो जाता है। वाटर रॉकेट के प्रयोग से बच्चों ने दबाव, न्यूटन के गति के नियम और क्रिया-प्रतिक्रिया के सिद्धांत को सहजता से समझा। ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों को सवाल पूछने और खुद प्रयोग करके निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित करती हैं।
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प्रधानाध्यापक सुशील कुमार सिंह ने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है। ऐसे नवाचार बच्चों की जिज्ञासा बढ़ाने के साथ उनकी समझ भी मजबूत करते हैं। विद्यालय में इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई से जोड़ना और उनमें कुछ नया सीखने की ललक पैदा करना है।
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सहायक अध्यापक डॉ. श्वेता सिंह के नेतृत्व में विद्यालय के छात्र नासिर और फैजान ने इस प्रयोग को सफलतापूर्वक पूरा किया। रॉकेट को आसमान में उड़ते देख विद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल बन गया। विद्यार्थियों ने प्रयोग को ध्यान से देखा और इसके पीछे काम करने वाले वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझा।
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डॉ. श्वेता सिंह ने बताया कि किताबी ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने पर विषयों को समझना आसान और रोचक हो जाता है। वाटर रॉकेट के प्रयोग से बच्चों ने दबाव, न्यूटन के गति के नियम और क्रिया-प्रतिक्रिया के सिद्धांत को सहजता से समझा। ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों को सवाल पूछने और खुद प्रयोग करके निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित करती हैं।
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प्रधानाध्यापक सुशील कुमार सिंह ने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है। ऐसे नवाचार बच्चों की जिज्ञासा बढ़ाने के साथ उनकी समझ भी मजबूत करते हैं। विद्यालय में इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई से जोड़ना और उनमें कुछ नया सीखने की ललक पैदा करना है।