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कार्तिक पूर्णिमा पर नदी व पवित्र सरोवरों में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
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फोटो-2-बलरामपुर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर राप्ती नदी के सिसई घाट पर स्नान करते श्रद्घालु।(स?
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने पवित्र नदी व सरोवरों में डुबकी लगाकर स्नान ध्यान किया। स्नान के बाद सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर अन्न व गौ दान किया गया। घरों में भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा गया।
सनातन धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसी खुशी में देवताओं ने दीप प्रज्जवलित किये थे जिसके चलते कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली के रूप में भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान और दान का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदी व सरोवरों में स्नान तथा अन्न व गौ दान करने से घर में खु्शहाली के साथ सुख समृद्धि आती है। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा पर सिसई घाट पर राप्ती नदी में हजारों लोगों ने स्नान किया। राप्ती नदी में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने अन्न व गौ दान कर बिजलीपुर मंदिर में मां बिजलेश्वरी देवी की पूजा अर्चना भी की। ललिया क्षेत्र के रतोही स्थित हनुमान मंदिर पर दो दिवसीय मेले का शुभारंभ स्थानीय थाने के निरीक्षक संतोष तिवारी, ग्राम प्रधान हाथीगर्दा राजकुमार तिवारी व ग्राम प्रधान मकुनहवा संतोष वर्मा ने फीता काटकर किया। मंदिर के पोखरे में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर अन्न व गौ दान किया।
दो दिनो तक चलने वाले मेले में दंगल के साथ खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। तुलसीपुर शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर भोर पहर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। श्रद्धालुओं ने मंदिर के सूर्य कुंड में स्नान कर मां पाटेश्वरी की पूजा अर्चना के बाद खिचड़ी दान किया।
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मंदिर के महंत मिथलेश नाथ योगी ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित कराया। इसी तरह गैसड़ी, पचपेड़वा, मथुरा, शिवपुरा, हरैया, श्रीदत्तगंज, गौरा चौराहा, उतरौला, सादुल्लाहनगर, रेहरा बाजार व पेहर बाजार आदि स्थानो पर भी कार्तिक पूर्णिमा पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
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सनातन धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसी खुशी में देवताओं ने दीप प्रज्जवलित किये थे जिसके चलते कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली के रूप में भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान और दान का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदी व सरोवरों में स्नान तथा अन्न व गौ दान करने से घर में खु्शहाली के साथ सुख समृद्धि आती है। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा पर सिसई घाट पर राप्ती नदी में हजारों लोगों ने स्नान किया। राप्ती नदी में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने अन्न व गौ दान कर बिजलीपुर मंदिर में मां बिजलेश्वरी देवी की पूजा अर्चना भी की। ललिया क्षेत्र के रतोही स्थित हनुमान मंदिर पर दो दिवसीय मेले का शुभारंभ स्थानीय थाने के निरीक्षक संतोष तिवारी, ग्राम प्रधान हाथीगर्दा राजकुमार तिवारी व ग्राम प्रधान मकुनहवा संतोष वर्मा ने फीता काटकर किया। मंदिर के पोखरे में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर अन्न व गौ दान किया।
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दो दिनो तक चलने वाले मेले में दंगल के साथ खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। तुलसीपुर शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर भोर पहर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। श्रद्धालुओं ने मंदिर के सूर्य कुंड में स्नान कर मां पाटेश्वरी की पूजा अर्चना के बाद खिचड़ी दान किया।
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मंदिर के महंत मिथलेश नाथ योगी ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित कराया। इसी तरह गैसड़ी, पचपेड़वा, मथुरा, शिवपुरा, हरैया, श्रीदत्तगंज, गौरा चौराहा, उतरौला, सादुल्लाहनगर, रेहरा बाजार व पेहर बाजार आदि स्थानो पर भी कार्तिक पूर्णिमा पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।