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Balrampur News: पटेंट से शोधकर्ता को मिलती पहचान
Sun, 26 Feb 2023 10:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 26 Feb 2023 10:50 PM IST
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एमएलके महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी में शोधकर्ता को प्रमाण पत्र देते शिक्षक। संवाद
बलरामपुर। एमएलके महाविद्यालय सभागार में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हुआ। इन्टलेक्चुअल प्रापर्टी राइट्स एंड रिसर्च एथिक्स विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में शोध की नैतिकता, पेटेंट व कॉपीराइट जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए शोध की बारीकियां समझाई गईं। इस दौरान विभिन्न विषयों पर शोध कर रहे 50 विद्यार्थियों ने अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में देश-विदेश से जुड़े विद्वानों ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने अनुभव साझा किए।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मनमोहन कृष्ण ने पेटेंट व काॅपीराइट पर प्रकाश डाला। बताया कि किसी देश द्वारा खोजकर्ता या नामित व्यक्ति को अनुसंधान सार्वजनिक करने के बदले दिए जाने वाले अधिकारों के समूह को पेटेंट कहते हैं। इसी प्रकार किसी व्यक्ति का मौलिक काम जो सीडी, डीवीडी या एफडी कार्ड आदि में सुरक्षित हो तो वह उस व्यक्ति का काॅपीराइट माना जाता है। रिसर्च के छात्रों को शोध में हमेशा नैतिकता के नियमों का पालन करना चाहिए। ईमानदारी से किया गया शोध जीवनभर रिसर्चर को ख्याति दिलाता है। भारत सरकार के पेटेंट अधिकारी डॉ. राजू ने लोगों को पेटेंट कराने के नियम व उसके लाभ के बारे में जानकारी दी।
गोरखपुर के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. अश्विनी मिश्र ने इंडस्ट्रियल डिजाइन विषय पर विस्तार से चर्चा की। सेमिनार में उत्तराखंड के डॉ. प्रशांत शुक्ल, गाजियाबाद के डॉ. अरुण कुुमार मौर्य, जेपी विश्वविद्यालय बिहार के डॉ. राजेश नायक व किसान पीजी कॉलेज बस्ती के डॉ. रंजन ने इन्टलेक्चुअल प्रापर्टी राइट्स एंड रिसर्च एथिक्स पर जानकारी दी।
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कोऑडिनेटर प्रो. तबस्सुम फरखी ने बताया कि सेमिनार में ऑनलाइन 600 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया। 50 शोधकर्ताओं ने अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। शोधकर्ताओं को महाविद्यालय की तरफ से प्रमाणपत्र भी दिया गया। इस मौके पर प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय, पूर्व प्राचार्य प्रो. आरके सिंह, डॉ. विमल प्रकाश वर्मा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. मोहिउद्दीन अंसारी, आनंद त्रिपाठी सहित तमाम शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मनमोहन कृष्ण ने पेटेंट व काॅपीराइट पर प्रकाश डाला। बताया कि किसी देश द्वारा खोजकर्ता या नामित व्यक्ति को अनुसंधान सार्वजनिक करने के बदले दिए जाने वाले अधिकारों के समूह को पेटेंट कहते हैं। इसी प्रकार किसी व्यक्ति का मौलिक काम जो सीडी, डीवीडी या एफडी कार्ड आदि में सुरक्षित हो तो वह उस व्यक्ति का काॅपीराइट माना जाता है। रिसर्च के छात्रों को शोध में हमेशा नैतिकता के नियमों का पालन करना चाहिए। ईमानदारी से किया गया शोध जीवनभर रिसर्चर को ख्याति दिलाता है। भारत सरकार के पेटेंट अधिकारी डॉ. राजू ने लोगों को पेटेंट कराने के नियम व उसके लाभ के बारे में जानकारी दी।
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गोरखपुर के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. अश्विनी मिश्र ने इंडस्ट्रियल डिजाइन विषय पर विस्तार से चर्चा की। सेमिनार में उत्तराखंड के डॉ. प्रशांत शुक्ल, गाजियाबाद के डॉ. अरुण कुुमार मौर्य, जेपी विश्वविद्यालय बिहार के डॉ. राजेश नायक व किसान पीजी कॉलेज बस्ती के डॉ. रंजन ने इन्टलेक्चुअल प्रापर्टी राइट्स एंड रिसर्च एथिक्स पर जानकारी दी।
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कोऑडिनेटर प्रो. तबस्सुम फरखी ने बताया कि सेमिनार में ऑनलाइन 600 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया। 50 शोधकर्ताओं ने अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। शोधकर्ताओं को महाविद्यालय की तरफ से प्रमाणपत्र भी दिया गया। इस मौके पर प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय, पूर्व प्राचार्य प्रो. आरके सिंह, डॉ. विमल प्रकाश वर्मा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. मोहिउद्दीन अंसारी, आनंद त्रिपाठी सहित तमाम शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।