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Balrampur News: साढ़े चार साल बाद मिली राहत, भावुक हुए रिजवान<bha>;</bha> समर्थकों ने लगाया गले

Fri, 07 Aug 2026 10:55 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Fri, 07 Aug 2026 10:55 PM IST
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Relief after four and a half years; Rizwan gets emotional; supporters embrace him
फोटो-27- न्यायालय से बरी होने के बाद निकलते पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान व उन
बलरामपुर। करीब साढ़े चार वर्षों तक हत्या के आरोपों का सामना करने के बाद शुक्रवार को एमपी-एमएलए कोर्ट से बाहर निकले पूर्व सांसद रिजवान जहीर के चेहरे पर राहत साफ दिखाई दी। अदालत परिसर के बाहर मौजूद समर्थकों ने उन्हें देखते ही गले लगा लिया। कई समर्थक भावुक हो गए। इस दौरान रिजवान जहीर ने भी आसमान की ओर देखते हुए ईश्वर का आभार जताया।
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हालांकि उन्होंने समर्थकों को किसी भी तरह की नारेबाजी या शक्ति प्रदर्शन से रोकते हुए शांति बनाए रखने की अपील की। फैसले की जानकारी मिलते ही कोर्ट परिसर में मौजूद समर्थक उनकी ओर बढ़े, लेकिन रिजवान जहीर ने हाथ जोड़कर सभी से संयम बरतने को कहा। उन्होंने सिर्फ लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और बेटी जेबा रिजवान तथा दामाद रमीज नेमत के साथ बिना किसी राजनीतिक टिप्पणी के वाहन से रवाना हो गए। उनके चेहरे पर लंबी कानूनी लड़ाई खत्म होने की राहत और भावुकता साफ झलक रही थी। कोर्ट से बाहर निकलते समय उन्होंने कहा, मुझे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था। अदालत ने साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर फैसला दिया है। इसके बाद वह वहां से चले गए।
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फैसले से पहले सुरक्षा घेरे में रहा कोर्ट परिसर
संवेदनशील मामले को देखते हुए शुक्रवार सुबह से ही एमपी-एमएलए कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे और अदालत आने-जाने वालों पर नजर रखी गई। सीओ सिटी अभिषेक सिंह, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली देहात गिरिजेश त्रिपाठी समेत कई अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे। दोपहर बाद फैसले का समय नजदीक आने पर समर्थकों और अधिवक्ताओं की भीड़ बढ़ने लगी। शाम करीब साढ़े चार बजे सुरक्षा कारणों से न्यायालय परिसर खाली कराया गया। फैसला सुनाए जाने के बाद भी पुलिस बल काफी देर तक तैनात रहा, ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
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तुलसीपुर में भी बढ़ाई गई चौकसी
फैसले को देखते हुए तुलसीपुर कस्बे में भी पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। पूर्व सांसद के आवास, प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस पूरे दिन स्थिति पर नजर बनाए रही और किसी भी तरह की भीड़ या जुलूस की संभावना को देखते हुए निगरानी करती रही। देर शाम तक पूर्व सांसद के तुलसीपुर स्थित आवास पहुंचने की सूचना नहीं थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ाई गई थी और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार गश्त कराई गई।
वादी पक्ष ने फैसले पर जताई असहमति, हाईकोर्ट जाने की बात कही
मामले के वादी और पूर्व चेयरमैन के भाई अफरोज अहमद ने अदालत के फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया है और वह फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय जाने की तैयारी करेंगे। उन्होंने कहा कि वह मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों का अध्ययन कर आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे। हालांकि अदालत के फैसले पर अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

45 तारीखों पर हुई सुनवाई, 13 गवाहों के बयान दर्ज
करीब साढ़े चार वर्षों तक चले इस चर्चित मुकदमे में अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने साक्ष्य और तर्क अदालत के सामने रखे। पूर्व सांसद के अधिवक्ता डॉ. राजेश त्रिपाठी के अनुसार मामले में करीब 45 तारीखों पर सुनवाई हुई और 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। मामले में आरोपी मेराजुल हक और महफूज को अदालत ने दोषी माना है। इन दोनों की सजा पर फैसला मंगलवार को सुनाया जाएगा।

फोटो-27- न्यायालय से बरी होने के बाद निकलते पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान व उन

फोटो-27- न्यायालय से बरी होने के बाद निकलते पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान व उन

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