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Balrampur News: थमा राप्ती का उफान, बाढ़ में डूबने से बुजुर्ग की मौत
Thu, 01 Oct 2026 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 01 Oct 2026 12:05 AM IST
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फोटो-41-बलरामपुर के ललिया-हरिहरगंज मार्ग के लौकहवा डिप पर बाढ़ के पानी से होकर गुजरते लोग ।-संव
बलरामपुर। छह दिन तक लगातार बढ़ने के बाद राप्ती नदी का उफान मंगलवार को थम गया, लेकिन बाढ़ का पानी अब भी जिले के कई इलाकों में मुसीबत बना हुआ है। सोमवार रात 104.880 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंची राप्ती मंगलवार शाम घटकर 104.770 मीटर पर आ गई। नदी अभी खतरे के निशान 104.620 मीटर से 15 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है।
जलस्तर में गिरावट के बीच बुधवार सुबह कोतवाली देहात क्षेत्र के जबदहा गांव में बाढ़ के पानी में डूबने से 60 वर्षीय कल्लूराम मौर्य की मौत हो गई। वह शौच के लिए घर से निकले थे और सड़क किनारे पानी में बने गड्ढे में बह गए।
जबदहा निवासी समय प्रसाद मौर्य ने बताया कि उनके बड़े भाई कल्लूराम मौर्य उर्फ गोबरे बुधवार सुबह शौच के लिए घर से निकले थे। गांव के चारों ओर पिछले तीन दिनों से बाढ़ का पानी भरा हुआ है। सड़क से नीचे उतरते समय वह गड्ढे में बह गए। शोर सुनकर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी प्रयास के बाद उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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ग्राम प्रशासक गुलजारीलाल शुक्ल ने घटना की सूचना लेखपाल और कोतवाली देहात पुलिस को दी। लेखपाल शैलेंद्र कुमार पाठक ने घटना की रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंपी है। सदर एसडीएम मनोज कुमार सरोज ने बताया कि मृतक के परिजनों को नियमानुसार आपदा सहायता राशि दिलाई जाएगी।
राहत की सांस, लेकिन मैदानी इलाकों में पानी से बढ़ी परेशानी
राप्ती का जलस्तर घटने से सदर तहसील क्षेत्र के टेढ़वा, लालपुर, फगुइया, लौकहवा और बनघुसरी समेत करीब 15 गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि नदी का पानी अब मैदानी इलाकों में फैल रहा है। नेपाल और मैदानी क्षेत्रों में हुई लगातार बारिश के कारण पिछले कई दिनों से नदी का जलस्तर बढ़ रहा था। नगर क्षेत्र से सटे खमौहा गांव के पास सुआंव नदी का जलस्तर बढ़ने का असर एक निजी विद्यालय पर भी पड़ा। जलस्तर बढ़ने और आसपास पानी पहुंचने के कारण विद्यालय में मंगलवार को निर्धारित समय से करीब एक घंटे पहले छुट्टी करनी पड़ी।
डिप पर पानी, कई प्रमुख रास्तों पर आवागमन मुश्किल
बाढ़ के पानी से ललिया क्षेत्र के कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन प्रभावित है। ललिया-हरिहरगंज मार्ग के लौकहवा डिप पर पानी बह रहा है। सिटकिहवा-मथुरा बाजार मार्ग के अंबरनगर डिप पर जलभराव है। मथुरा बाजार-चौधरीडीह मार्ग पर दरगाह के पास बाईपास पर भी पानी बह रहा है।
क्षेत्रवासी राजकुमार, विनय कुमार, रामसिमरन, मनोज कुमार, संतराम और अनूप कुमार ने बताया कि हेगहा-गोरिया पहाड़ी नाले का पानी डिप पर पहुंचने से राहगीरों को परेशानी हो रही है। छोटे वाहनों को पानी के बीच से निकलने में दिक्कत हो रही है, जबकि बड़े वाहनों का आवागमन भी प्रभावित है। ग्रामीणों के मुताबिक जलभराव के कारण रोजमर्रा के काम के लिए बाजार और स्कूल जाने वालों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।
उतरौला में नाव बनी सहारा, एक दर्जन गांवों का रास्ता प्रभावित
उतरौला में भी राप्ती का जलस्तर बढ़ने से करीब एक दर्जन गांवों में आवागमन प्रभावित है। कई गांवों के रास्तों पर पानी भरने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। लालनगर, विरदा बनियाभारी, मोहनजोत, केवतली, मिलौली और बाघजोत समेत कई गांवों में रास्तों पर पानी भरने से ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ी है। स्थिति की जानकारी मिलने पर एसडीएम उतरौला योगेंद्र शरण शाह और तहसीलदार वीरेंद्र प्रताप ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया।
पानी में डूबी पकी धान, किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर ललिया क्षेत्र के किसानों पर पड़ा है। कई गांवों में खेत पूरी तरह जलमग्न हैं। पकी धान की फसल कई दिनों से पानी में डूबी होने के कारण उसके सड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसान तरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि उन्होंने 10 बीघे में धान की खेती की थी। पूरी फसल पानी में डूब गई है। मनीष ने बताया कि 12 बीघे में तैयार धान की फसल तेज बारिश और तूफान के बाद गिर गई थी। अब खेत में पानी भरने से नुकसान और बढ़ गया है। शिव कुमार वर्मा ने बताया कि उनके करीब 10 बीघे धान के खेत में पानी भरा है। फसल खराब होने लगी है।
जिला कृषि अधिकारी उपेंद्र नाथ खरवार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।
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जलस्तर में गिरावट के बीच बुधवार सुबह कोतवाली देहात क्षेत्र के जबदहा गांव में बाढ़ के पानी में डूबने से 60 वर्षीय कल्लूराम मौर्य की मौत हो गई। वह शौच के लिए घर से निकले थे और सड़क किनारे पानी में बने गड्ढे में बह गए।
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जबदहा निवासी समय प्रसाद मौर्य ने बताया कि उनके बड़े भाई कल्लूराम मौर्य उर्फ गोबरे बुधवार सुबह शौच के लिए घर से निकले थे। गांव के चारों ओर पिछले तीन दिनों से बाढ़ का पानी भरा हुआ है। सड़क से नीचे उतरते समय वह गड्ढे में बह गए। शोर सुनकर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी प्रयास के बाद उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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ग्राम प्रशासक गुलजारीलाल शुक्ल ने घटना की सूचना लेखपाल और कोतवाली देहात पुलिस को दी। लेखपाल शैलेंद्र कुमार पाठक ने घटना की रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंपी है। सदर एसडीएम मनोज कुमार सरोज ने बताया कि मृतक के परिजनों को नियमानुसार आपदा सहायता राशि दिलाई जाएगी।
राहत की सांस, लेकिन मैदानी इलाकों में पानी से बढ़ी परेशानी
राप्ती का जलस्तर घटने से सदर तहसील क्षेत्र के टेढ़वा, लालपुर, फगुइया, लौकहवा और बनघुसरी समेत करीब 15 गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि नदी का पानी अब मैदानी इलाकों में फैल रहा है। नेपाल और मैदानी क्षेत्रों में हुई लगातार बारिश के कारण पिछले कई दिनों से नदी का जलस्तर बढ़ रहा था। नगर क्षेत्र से सटे खमौहा गांव के पास सुआंव नदी का जलस्तर बढ़ने का असर एक निजी विद्यालय पर भी पड़ा। जलस्तर बढ़ने और आसपास पानी पहुंचने के कारण विद्यालय में मंगलवार को निर्धारित समय से करीब एक घंटे पहले छुट्टी करनी पड़ी।
डिप पर पानी, कई प्रमुख रास्तों पर आवागमन मुश्किल
बाढ़ के पानी से ललिया क्षेत्र के कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन प्रभावित है। ललिया-हरिहरगंज मार्ग के लौकहवा डिप पर पानी बह रहा है। सिटकिहवा-मथुरा बाजार मार्ग के अंबरनगर डिप पर जलभराव है। मथुरा बाजार-चौधरीडीह मार्ग पर दरगाह के पास बाईपास पर भी पानी बह रहा है।
क्षेत्रवासी राजकुमार, विनय कुमार, रामसिमरन, मनोज कुमार, संतराम और अनूप कुमार ने बताया कि हेगहा-गोरिया पहाड़ी नाले का पानी डिप पर पहुंचने से राहगीरों को परेशानी हो रही है। छोटे वाहनों को पानी के बीच से निकलने में दिक्कत हो रही है, जबकि बड़े वाहनों का आवागमन भी प्रभावित है। ग्रामीणों के मुताबिक जलभराव के कारण रोजमर्रा के काम के लिए बाजार और स्कूल जाने वालों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।
उतरौला में नाव बनी सहारा, एक दर्जन गांवों का रास्ता प्रभावित
उतरौला में भी राप्ती का जलस्तर बढ़ने से करीब एक दर्जन गांवों में आवागमन प्रभावित है। कई गांवों के रास्तों पर पानी भरने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। लालनगर, विरदा बनियाभारी, मोहनजोत, केवतली, मिलौली और बाघजोत समेत कई गांवों में रास्तों पर पानी भरने से ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ी है। स्थिति की जानकारी मिलने पर एसडीएम उतरौला योगेंद्र शरण शाह और तहसीलदार वीरेंद्र प्रताप ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया।
पानी में डूबी पकी धान, किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर ललिया क्षेत्र के किसानों पर पड़ा है। कई गांवों में खेत पूरी तरह जलमग्न हैं। पकी धान की फसल कई दिनों से पानी में डूबी होने के कारण उसके सड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसान तरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि उन्होंने 10 बीघे में धान की खेती की थी। पूरी फसल पानी में डूब गई है। मनीष ने बताया कि 12 बीघे में तैयार धान की फसल तेज बारिश और तूफान के बाद गिर गई थी। अब खेत में पानी भरने से नुकसान और बढ़ गया है। शिव कुमार वर्मा ने बताया कि उनके करीब 10 बीघे धान के खेत में पानी भरा है। फसल खराब होने लगी है।
जिला कृषि अधिकारी उपेंद्र नाथ खरवार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।