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Balrampur News: कस्तूरबा विद्यालय में 41 फीसदी छात्राएं पढ़ाई से दूर
Thu, 01 Oct 2026 12:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 01 Oct 2026 12:16 AM IST
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फोटो-32-बलरामपुर में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय ।संवाद
बलरामपुर। जिले की बालिकाओं को घर के नजदीक आवासीय शिक्षा देने के उद्देश्य से संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं की उपस्थिति सवालों के घेरे में है। जिले के 11 विद्यालयों में अगस्त माह में 28 तारीख तक छात्राओं की औसत उपस्थिति महज 59 प्रतिशत रही। यानी पंजीकृत छात्राओं में करीब 41 प्रतिशत छात्राएं विद्यालय में मौजूद नहीं थीं। छात्राओं के आवास, भोजन और पढ़ाई समेत अन्य सुविधाओं पर हर वर्ष तीन करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद उपस्थिति का यह स्तर सामने आने पर महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने नाराजगी जताई है।
जिले के 11 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कुल 1597 छात्राएं पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों में छात्राओं को पढ़ाई के साथ आवास और रोजमर्रा की जरूरतों की सुविधाएं भी परिसर में उपलब्ध कराई जाती हैं। शासन की व्यवस्था के तहत छात्रावास, बेड, भोजन, पुस्तकें, स्टेशनरी, स्कूल बैग, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और दैनिक उपयोग की सामग्री दी जाती है। पुस्तकालय और गतिविधि कक्ष के साथ शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है।
कस्तूरबा विद्यालयों का उद्देश्य विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित परिवारों की बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। केंद्र सरकार की व्यवस्था के तहत कस्तूरबा विद्यालय 10 से 18 वर्ष की बालिकाओं को सुरक्षित आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने का माध्यम हैं। ऐसे में विद्यालयों में कम उपस्थिति को लेकर समीक्षा में सवाल उठे हैं।
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कम उपस्थिति सामने आने पर महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने नाराजगी जताते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्थिति में सुधार के निर्देश दिए हैं। बीएसए विकास चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि विद्यालयों से छात्राओं की उपस्थिति के संबंध में जानकारी ली जा रही है। मामले को गंभीरता से लिया गया है। जिला समन्वयक बालिका शिक्षा से रिपोर्ट मांगी गई है।
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जिले के 11 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कुल 1597 छात्राएं पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों में छात्राओं को पढ़ाई के साथ आवास और रोजमर्रा की जरूरतों की सुविधाएं भी परिसर में उपलब्ध कराई जाती हैं। शासन की व्यवस्था के तहत छात्रावास, बेड, भोजन, पुस्तकें, स्टेशनरी, स्कूल बैग, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और दैनिक उपयोग की सामग्री दी जाती है। पुस्तकालय और गतिविधि कक्ष के साथ शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है।
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कस्तूरबा विद्यालयों का उद्देश्य विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित परिवारों की बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। केंद्र सरकार की व्यवस्था के तहत कस्तूरबा विद्यालय 10 से 18 वर्ष की बालिकाओं को सुरक्षित आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने का माध्यम हैं। ऐसे में विद्यालयों में कम उपस्थिति को लेकर समीक्षा में सवाल उठे हैं।
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कम उपस्थिति सामने आने पर महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने नाराजगी जताते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्थिति में सुधार के निर्देश दिए हैं। बीएसए विकास चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि विद्यालयों से छात्राओं की उपस्थिति के संबंध में जानकारी ली जा रही है। मामले को गंभीरता से लिया गया है। जिला समन्वयक बालिका शिक्षा से रिपोर्ट मांगी गई है।