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लाल निशान छूने को बेताब राप्ती नदी के बाढ़ का पानी-संशोधित
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बलरामपुर। लाल निशान छूने को राप्ती नदी के बाढ़ का पानी बेताब है। खतरे के निशान 104.62 मीटर के सापेक्ष शुक्रवार को शाम छह बजे तक 104.53 मीटर तक पहुंच गया है। 3.4 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से राप्ती का जलस्तर बढ़ रहा है जो शनिवार सुबह तक लाल निशान पार कर सकता है।
बीते पांच दिनों से नेपाल व जिले में हो रही भारी बारिश के चलते राप्ती नदी के साथ पहाड़ी नालों में भी उफान आने की संभावना जताई जा रही है। राप्ती नदी के तटीय इलाकों में बाढ़ व कटान का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन की तरफ से राप्ती नदी के बाढ़ व कटान पर कड़ी निगरानी की जा रही है।
जिले से सटे नेपाल देश के साथ-साथ जिले में भी बीते पांच दिनों से लगातार बारिश का प्रकोप जारी है। पहाड़ो व मैदानी इलाकों में बारिश होने से नदी व पहाड़ी नालों में उफान बढ़ता जा रहा है।
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सदर ब्लॉक के राप्ती नदी के सिसई घाट पर तैनात स्किल वर्क असिस्टेंट मेराज ने बताया कि जिले व पहाड़ों पर भारी बारिश होने के चलते राप्ती नदी का जलस्तर 3.4 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
शुक्रवार की शाम पांच बजे तक राप्ती का जल स्तर 104.53 मीटर रिकार्ड किया गया है जो खतरे के निशान से मात्र 9 सेंटीमीटर नीचे है। राप्ती नदी में बाढ़ आने से सदर व उतरौला तहसील के 350 गांवों में बाढ़ व कटान का खतरा उत्पन्न हो गया है।
इस खतरे के लेकर यहां के लोगों में बैचेनी है। सदर तहसील में लालपुर फगुइया, झौहन्ना, मोठहा, गोसाईपुरवा, बेलहा व लालाजोत सहित करीब 150 गांव राप्ती नदी की बाढ़ से प्रभावित होंगे।
उतरौला तहसील में मझारी बाछिल, नंदमहरा, बम्माडीह, बाघाजोत, वाजिदपुर, पिपरी, लखमा, महुआ, बभनपुरवा, अल्लीपुर, अमारे भरिया, कायमजोत, बागडीह, मटियरिया करमा, बसवरियाडीह, खजुहा, जनुका, पिपरा, एकडंगा, बारम व खुरदा समेत करीब 150 गांव राप्ती नदी के बाढ़ से प्रभावित होंगे। सदर व उतरौला तहसील के 35 से अधिक गांवों में कटान का भी खतरा बढ़ गया है। राप्ती नदी बेशकीमती जमीनों के साथ-साथ लोगों के मकानों को भी निगलना शुरु कर देगी।
ग्रामीण अंकुश पांडेय, विनीत, राजन, वासुदेव, कृष्ण देव, राम मूरत वर्मा व इस्माइल आदि ने बताया कि बाढ़ आने पर प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। राप्ती के कटान से लोगों को अपने आशियाने उजाड़ने पड़ेंगे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने शासन प्रशासन से मदद मुहैया कराने की मांग की है।
रखी जा रही कड़ी नजर
-बीते पांच दिनों से हो रही बारिश के चलते राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के बाढ़ पर कड़ी निगरानी की जा रही है। तीनों तहसीलों के एसडीएम के साथ-साथ तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों व हल्का लेखपालों और सभी कोतवाली व थानों के प्रभारी निरीक्षकों को राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के बाढ़ व कटान पर निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। जिले में एसडीआरएफ की टीम भी पहुंच चुकी है।
-श्रुति, डीएम
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बीते पांच दिनों से नेपाल व जिले में हो रही भारी बारिश के चलते राप्ती नदी के साथ पहाड़ी नालों में भी उफान आने की संभावना जताई जा रही है। राप्ती नदी के तटीय इलाकों में बाढ़ व कटान का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन की तरफ से राप्ती नदी के बाढ़ व कटान पर कड़ी निगरानी की जा रही है।
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जिले से सटे नेपाल देश के साथ-साथ जिले में भी बीते पांच दिनों से लगातार बारिश का प्रकोप जारी है। पहाड़ो व मैदानी इलाकों में बारिश होने से नदी व पहाड़ी नालों में उफान बढ़ता जा रहा है।
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सदर ब्लॉक के राप्ती नदी के सिसई घाट पर तैनात स्किल वर्क असिस्टेंट मेराज ने बताया कि जिले व पहाड़ों पर भारी बारिश होने के चलते राप्ती नदी का जलस्तर 3.4 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
शुक्रवार की शाम पांच बजे तक राप्ती का जल स्तर 104.53 मीटर रिकार्ड किया गया है जो खतरे के निशान से मात्र 9 सेंटीमीटर नीचे है। राप्ती नदी में बाढ़ आने से सदर व उतरौला तहसील के 350 गांवों में बाढ़ व कटान का खतरा उत्पन्न हो गया है।
इस खतरे के लेकर यहां के लोगों में बैचेनी है। सदर तहसील में लालपुर फगुइया, झौहन्ना, मोठहा, गोसाईपुरवा, बेलहा व लालाजोत सहित करीब 150 गांव राप्ती नदी की बाढ़ से प्रभावित होंगे।
उतरौला तहसील में मझारी बाछिल, नंदमहरा, बम्माडीह, बाघाजोत, वाजिदपुर, पिपरी, लखमा, महुआ, बभनपुरवा, अल्लीपुर, अमारे भरिया, कायमजोत, बागडीह, मटियरिया करमा, बसवरियाडीह, खजुहा, जनुका, पिपरा, एकडंगा, बारम व खुरदा समेत करीब 150 गांव राप्ती नदी के बाढ़ से प्रभावित होंगे। सदर व उतरौला तहसील के 35 से अधिक गांवों में कटान का भी खतरा बढ़ गया है। राप्ती नदी बेशकीमती जमीनों के साथ-साथ लोगों के मकानों को भी निगलना शुरु कर देगी।
ग्रामीण अंकुश पांडेय, विनीत, राजन, वासुदेव, कृष्ण देव, राम मूरत वर्मा व इस्माइल आदि ने बताया कि बाढ़ आने पर प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। राप्ती के कटान से लोगों को अपने आशियाने उजाड़ने पड़ेंगे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने शासन प्रशासन से मदद मुहैया कराने की मांग की है।
रखी जा रही कड़ी नजर
-बीते पांच दिनों से हो रही बारिश के चलते राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के बाढ़ पर कड़ी निगरानी की जा रही है। तीनों तहसीलों के एसडीएम के साथ-साथ तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों व हल्का लेखपालों और सभी कोतवाली व थानों के प्रभारी निरीक्षकों को राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के बाढ़ व कटान पर निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। जिले में एसडीआरएफ की टीम भी पहुंच चुकी है।
-श्रुति, डीएम