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Balrampur News: छह गांवों में कटान कर रही राप्ती
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बलरामपुर। उतरौला क्षेत्र के छह गांव राप्ती नदी की कटान की जद में आ गए हैं। बीते दिनों आई बाढ़ से इन गांवों की सैकड़ों बीघे जमीन व कई घर राप्ती नदी धारा में समाहित हो गए थे। एक बार फिर कटान शुरू होने से ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों ने गांवों के किनारे कटान रोधी कार्य कराने की मांग मुख्यमंत्री सहित उच्चाधिकारियों से की है।
ग्रामीण शादाब अहमद, मुमताज अहमद, राम कुमार, मुकीमुद्दीन, नूर मोहम्मद, कल्लू व जाहिद ने बताया कि लालनगर, बिरिदा, सुरैहिया देवर, मिलौली, बाघाजोत व गोनकोट आदि गांव राप्ती नदी के तट पर बसे हैं। इन गांवों में राप्ती नदी की बाढ़ से प्रतिवर्ष भारी तबाही होती है।
इस साल भी अक्तूबर में आई बाढ़ में राप्ती की कटान से शादाब अहमद व मुमताज अहमद आदि का घर नदी की धारा में समाहित हो गया। इन गांवों की खेेती योग्य जमीन भी नदी की धारा में समा गई।
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इन लोगों का कहना है कि बाढ़ से होने वाली तबाही रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी के चलते ही बलरामपुर-भड़रिया बांध भी बाढ़ से कट गया। यदि कटान रोकने के उपाय नहीं किए गए तो इन गांवों में करोड़ों रुपये की लागत से बने पॉलीटेक्निक, पंचायत भवन, परिषदीय विद्यालय एवं अस्पताल का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री तथा उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर गांव व नदी के किनारे कटान रोधी कार्य कराने की मांग की है। एसडीएम संतोष कुमार ओझा ने बताया कि इन गांवों में राप्ती नदी की कटान के संबंध में विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। ड्रेनेज खंड के अधिकारियों को कटान रोकने के प्रभावी उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।
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ग्रामीण शादाब अहमद, मुमताज अहमद, राम कुमार, मुकीमुद्दीन, नूर मोहम्मद, कल्लू व जाहिद ने बताया कि लालनगर, बिरिदा, सुरैहिया देवर, मिलौली, बाघाजोत व गोनकोट आदि गांव राप्ती नदी के तट पर बसे हैं। इन गांवों में राप्ती नदी की बाढ़ से प्रतिवर्ष भारी तबाही होती है।
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इस साल भी अक्तूबर में आई बाढ़ में राप्ती की कटान से शादाब अहमद व मुमताज अहमद आदि का घर नदी की धारा में समाहित हो गया। इन गांवों की खेेती योग्य जमीन भी नदी की धारा में समा गई।
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इन लोगों का कहना है कि बाढ़ से होने वाली तबाही रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी के चलते ही बलरामपुर-भड़रिया बांध भी बाढ़ से कट गया। यदि कटान रोकने के उपाय नहीं किए गए तो इन गांवों में करोड़ों रुपये की लागत से बने पॉलीटेक्निक, पंचायत भवन, परिषदीय विद्यालय एवं अस्पताल का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री तथा उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर गांव व नदी के किनारे कटान रोधी कार्य कराने की मांग की है। एसडीएम संतोष कुमार ओझा ने बताया कि इन गांवों में राप्ती नदी की कटान के संबंध में विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। ड्रेनेज खंड के अधिकारियों को कटान रोकने के प्रभावी उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।