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Balrampur News: नेपाल में बारिश से सीमावर्ती गांव फिर बेहाल

Fri, 17 Jul 2026 11:04 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Fri, 17 Jul 2026 11:04 PM IST
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Rain in Nepal again cripples border villages
फोटो-28,29-बलरामपुर के इटैहिया गांव में हुए  जलभराव के बीच आवागमन करते ग्रामीण ।-संवाद
ललिया। नेपाल के दांग क्षेत्र में हुई बारिश का असर एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा से सटे गांवों में देखने को मिला। हेंगहा पहाड़ी नाले में बृहस्पतिवार देर रात अचानक पानी बढ़ने से इटहिया बनघुसरी गांव तीसरी बार जलभराव की चपेट में आ गया। कुछ ही घंटों में पानी गांव की गलियों, घरों के सामने और प्राथमिक विद्यालय परिसर तक पहुंच गया।
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शुक्रवार दोपहर तक पानी तो निकल गया, लेकिन इस बार अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी और कीचड़ छोड़ गया। जिससे लोगों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी दो बार गांव में पानी आया था, लेकिन इस बार तेज बहाव के साथ नेपाल की ओर से आई मिट्टी ने परेशानी कई गुना बढ़ा दी। गलियां दलदल बन गई हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। कई लोग फिसलकर गिर रहे हैं और दोपहिया वाहनों का निकालना भी मुश्किल हो गया है।
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गाैरतलब है कि हेंगहा नाला नेपाल के पहाड़ी इलाके से निकलता है और बरसात के दौरान उफान पर आ जाता है। नेपाल में तेज बारिश होने पर इसका पानी सीधे सीमावर्ती गांवों में पहुंच जाता है।
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विद्यालय में सिर्फ सात बच्चे पहुंचे
जलभराव और कीचड़ का सबसे ज्यादा असर प्राथमिक विद्यालय इटहिया पर पड़ा। विद्यालय परिसर में करीब छह इंच तक कीचड़ जमा हो गया। कमरों के बाहर कीचड़ होने से बच्चों को स्कूल पहुंचने में परेशानी हुई। प्रभारी प्रधानाध्यापक शिव प्रसाद ने बताया कि विद्यालय में 88 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन शुक्रवार को केवल सात बच्चे ही स्कूल पहुंचे। विद्यालय में सहायक अध्यापक विवेक कुमार तोमर और शिक्षामित्र भगवती प्रसाद वर्मा मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि सीताराम पुरवा, छोटकी इटहिया और बड़की इटहिया से आने वाले अधिकांश बच्चे रास्ता खराब होने के कारण स्कूल नहीं आ सके।

पानी उतरता है, लेकिन मुश्किलें बनी रहती हैं
ग्रामीण राम प्रसाद ने बताया कि नेपाल में बारिश शुरू होते ही गांव के लोगों की चिंता बढ़ जाती है। रातभर लोग अपना सामान सुरक्षित करने में लगे रहते हैं और सुबह तक पूरा गांव पानी से घिर जाता है। सियाराम ने कहा कि पानी निकलने के बाद असली परेशानी शुरू होती है। घरों और गलियों में कीचड़ जमा हो जाती है, जिससे कई दिनों तक आवागमन प्रभावित रहता है और सफाई में काफी मेहनत करनी पड़ती है। शकील अहमद का कहना है कि हर साल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। स्कूल जाने वाले रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं, इसलिए कई दिनों तक बच्चे विद्यालय नहीं पहुंच पाते। वहीं राजकुमार ने कहा कि जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, हर बरसात में गांव के लोगों को इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ेगी।




फोटो-28,29-बलरामपुर के इटैहिया गांव में हुए  जलभराव के बीच आवागमन करते ग्रामीण ।-संवाद

फोटो-28,29-बलरामपुर के इटैहिया गांव में हुए  जलभराव के बीच आवागमन करते ग्रामीण ।-संवाद

फोटो-28,29-बलरामपुर के इटैहिया गांव में हुए  जलभराव के बीच आवागमन करते ग्रामीण ।-संवाद

फोटो-28,29-बलरामपुर के इटैहिया गांव में हुए  जलभराव के बीच आवागमन करते ग्रामीण ।-संवाद

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