{"_id":"642c66df92439e90690460e7","slug":"private-schools-increased-fees-by-20-percent-balrampur-news-c-13-1-165773-2023-04-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: निजी स्कूलों ने बढ़ाई 20 प्रतिशत फीस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: निजी स्कूलों ने बढ़ाई 20 प्रतिशत फीस
Tue, 04 Apr 2023 11:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 04 Apr 2023 11:35 PM IST
विज्ञापन
बलरामपुर। नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही निजी विद्यालयों ने फीस में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। वार्षिक रखरखाव (मेंटेनेंस) के नाम पर भी वसूली की जा रही है। किताबें, स्टेशनरी पहले ही बाजार में महंगी हो चुकी हैं। पढ़ाई का बोझ बढ़ जाने से अभिभावक चिंतित हैं।
नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही अभिभावक अपने बच्चों के स्कूलों में प्रवेश के लिए दौड़भाग कर रहे हैं। वे स्कूलों में जाकर बच्चों के प्रवेश के लिए संपर्क करने लगे हैं, लेकिन सामान्य परिवार वाले अभिभावकों के लिए अब अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना आसान नहीं रह गया है। जैसा स्कूल है, उसके हिसाब से वहां की उतनी ही अधिक फीस है। संचालकों ने 159 रुपये से लेकर 350 रुपये तक फीस बढ़ाई है। इसके साथ ही स्कूल में तमाम अन्य सुविधाओं के नाम पर भी शुल्क लिया जा रहा है।
प्रवेश के समय स्कूलों में 6000 रुपये से लेकर 15000 रुपये तक जमा कराए जा रहे हैं। इसके अलावा कॉपी, किताब व स्टेशनरी का खर्च अलग से लगता है। पहले माह में पढ़ाई का इतना अधिक खर्च आ जाने से अभिभावक चिंतित हैं। डीआईओएस गोविंदराम ने बताया कि कोरोना कॉल में वसूली गई फीस का 15 प्रतिशत समायोजित करने का आदेश हुआ है। जो अभिभावक फीस समायोजित करने का मांग करेंगे, उनकी फीस समायोजित कराई जाएगी।
विज्ञापन
अभिभावकों का छलका दर्द
अभिभावक अभय श्रीवास्तव ने कहा कि स्कूल में पिछले साल अप्रैल में पांच हजार रुपये जमा कराए गए। वहीं सात सौ रुपये फीस प्रति माह ली गई, लेकिन इस साल पहले माह में छह हजार रुपये जमा कराए जा रहे हैं। फीस में 150 रुपये माह की वृद्घि की गई है।
अभिभावक प्रकृति कुमार सोनी ने कहा कि शासन से कोरोना काल में ली गई फीस का 15 प्रतिशत धन समायोजित करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन इन आदेशों का पालन भी नहीं किया गया। स्कूल में फीस पहले से बढ़ा और दी गई। अभिभावक ऊषा अग्रहरि ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है। स्टेशनरी, पाठ्य सामग्री पहले से महंगी हो गई है।
अभिभावक शैलेश कुमार ने कहा कि फीस भी हर साल बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों को कैसे पढ़़ाया जाए। कोरोना के समय ली गई फीस के समायोजन के आदेश भी नहीं माने जा रहे।
अभिभावक रवि सोनी ने कहा कि आय के साधन नहीं बढ़ रहे हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई का बोझ हर साल बढ़ जाता है। अप्रैल आते ही बच्चों की पढ़ाई की चिंता सताने लगी है।
विज्ञापन
नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही अभिभावक अपने बच्चों के स्कूलों में प्रवेश के लिए दौड़भाग कर रहे हैं। वे स्कूलों में जाकर बच्चों के प्रवेश के लिए संपर्क करने लगे हैं, लेकिन सामान्य परिवार वाले अभिभावकों के लिए अब अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना आसान नहीं रह गया है। जैसा स्कूल है, उसके हिसाब से वहां की उतनी ही अधिक फीस है। संचालकों ने 159 रुपये से लेकर 350 रुपये तक फीस बढ़ाई है। इसके साथ ही स्कूल में तमाम अन्य सुविधाओं के नाम पर भी शुल्क लिया जा रहा है।
विज्ञापन
प्रवेश के समय स्कूलों में 6000 रुपये से लेकर 15000 रुपये तक जमा कराए जा रहे हैं। इसके अलावा कॉपी, किताब व स्टेशनरी का खर्च अलग से लगता है। पहले माह में पढ़ाई का इतना अधिक खर्च आ जाने से अभिभावक चिंतित हैं। डीआईओएस गोविंदराम ने बताया कि कोरोना कॉल में वसूली गई फीस का 15 प्रतिशत समायोजित करने का आदेश हुआ है। जो अभिभावक फीस समायोजित करने का मांग करेंगे, उनकी फीस समायोजित कराई जाएगी।
विज्ञापन
अभिभावकों का छलका दर्द
अभिभावक अभय श्रीवास्तव ने कहा कि स्कूल में पिछले साल अप्रैल में पांच हजार रुपये जमा कराए गए। वहीं सात सौ रुपये फीस प्रति माह ली गई, लेकिन इस साल पहले माह में छह हजार रुपये जमा कराए जा रहे हैं। फीस में 150 रुपये माह की वृद्घि की गई है।
अभिभावक प्रकृति कुमार सोनी ने कहा कि शासन से कोरोना काल में ली गई फीस का 15 प्रतिशत धन समायोजित करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन इन आदेशों का पालन भी नहीं किया गया। स्कूल में फीस पहले से बढ़ा और दी गई। अभिभावक ऊषा अग्रहरि ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है। स्टेशनरी, पाठ्य सामग्री पहले से महंगी हो गई है।
अभिभावक शैलेश कुमार ने कहा कि फीस भी हर साल बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों को कैसे पढ़़ाया जाए। कोरोना के समय ली गई फीस के समायोजन के आदेश भी नहीं माने जा रहे।
अभिभावक रवि सोनी ने कहा कि आय के साधन नहीं बढ़ रहे हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई का बोझ हर साल बढ़ जाता है। अप्रैल आते ही बच्चों की पढ़ाई की चिंता सताने लगी है।