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Balrampur News: पुलिस ने सीएमओ कार्यालय से मांगी रिपोर्ट
Sat, 13 Dec 2025 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 13 Dec 2025 11:31 PM IST
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गोंडा। पासपोर्ट आवेदन में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र लगाने के कल्याणपुर निवासी शरीफ नूर मोहम्मद व रिजवाना मोहम्मद शरीफ के मामले की पुलिस ने पड़ताल शुरू कर दी है। इस बार जारी जन्म प्रमाणपत्र का कोड कन्नौज का बताया जा रहा है, जबकि अस्पताल का नाम गोंडा का जिला महिला अस्पताल दर्ज है। पुलिस ने एसीएमओ डॉ. जयगोविंद से इस बारे में जानकारी ली है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मुंबई पुलिस से जन्म प्रमाणपत्र के सत्यापन को लेकर मिले प्रपत्र व जांच की स्थिति से संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पहले भी ऐसे छह मामले उजागर हुए हैं, जिनका कनेक्शन मुंबई से जुड़ा है।
दरअसल, मुंबई में रह रहे जिले के लोग पासपाेर्ट के लिए आवेदन करते समय अपना पता मुंबई ही डाल रहे हैं। आवेदन के साथ जिले से जारी जन्म प्रमाणपत्र लगा देते हैं। ऐसे में उनके पते का सत्यापन मुंबई में होता है। बाद में जन्म प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए मुंबई पुलिस उसे यहां भेजती है। इसके बाद पूरा खेल सामने आता है।
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नवाबगंज के प्रभारी थानाध्यक्ष विश्वास चतुर्वेदी ने बताया कि उनके पास इस तरह का कोई सत्यापन आया ही नहीं। ऐसे में इसकी जानकारी नहीं है। वहीं, एसीएमओ डॉ. जयगोविंद का कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने जानकारी मांगी थी। जानकारी उपलब्ध करा दी है। जांच में सहयोग किया जाएगा।
यहां होती है चूक
सीएमओ कार्यालय में जांच के बाद फर्जी प्रमाणपत्र मिलने पर अधिकारी मुंबई पुलिस को रिपोर्ट भेजकर इतिश्री कर लेते हैं। स्थानीय स्तर पर पुलिस को इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जहां से रिपोर्ट मांगी जाती है, हम उसे दे देते हैं।
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स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मुंबई पुलिस से जन्म प्रमाणपत्र के सत्यापन को लेकर मिले प्रपत्र व जांच की स्थिति से संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पहले भी ऐसे छह मामले उजागर हुए हैं, जिनका कनेक्शन मुंबई से जुड़ा है।
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दरअसल, मुंबई में रह रहे जिले के लोग पासपाेर्ट के लिए आवेदन करते समय अपना पता मुंबई ही डाल रहे हैं। आवेदन के साथ जिले से जारी जन्म प्रमाणपत्र लगा देते हैं। ऐसे में उनके पते का सत्यापन मुंबई में होता है। बाद में जन्म प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए मुंबई पुलिस उसे यहां भेजती है। इसके बाद पूरा खेल सामने आता है।
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नवाबगंज के प्रभारी थानाध्यक्ष विश्वास चतुर्वेदी ने बताया कि उनके पास इस तरह का कोई सत्यापन आया ही नहीं। ऐसे में इसकी जानकारी नहीं है। वहीं, एसीएमओ डॉ. जयगोविंद का कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने जानकारी मांगी थी। जानकारी उपलब्ध करा दी है। जांच में सहयोग किया जाएगा।
यहां होती है चूक
सीएमओ कार्यालय में जांच के बाद फर्जी प्रमाणपत्र मिलने पर अधिकारी मुंबई पुलिस को रिपोर्ट भेजकर इतिश्री कर लेते हैं। स्थानीय स्तर पर पुलिस को इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जहां से रिपोर्ट मांगी जाती है, हम उसे दे देते हैं।