फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Balrampur News ›   No less than anyone, showing strength in the Ministry of Labor

Balrampur News: नहीं किसी से कम, श्रम मंत्रालय में दिखा रहे दम

Tue, 03 Jan 2023 10:40 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Jan 2023 10:40 PM IST
विज्ञापन
No less than anyone, showing strength in the Ministry of Labor
बलरामपुर। परिषदीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर अपनी प्रतिभा दिखाने में दिव्यांग बच्चे भी पीछे नहीं हैं। देखने में पूरी तरह अक्षम होने के बाद भी युवा प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। इसका उदाहरण गैसड़ी के मनकी गांव में जन्मे पूर्णत: दृष्टिबाधित सुरेश हैं, जो जिले से प्राथमिक स्तर की पढ़ाई करने के बाद आज भारत सरकार के लेबर इंप्लाइमेंट मंत्रालय दिल्ली में ईपीएफओ के पद पर कार्य कर रहे हैं।
विज्ञापन

पहले सुरेश की आंखें ठीक थीं। बचपन में चोट लगने से उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इसी बीच वह दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक (स्पेशल एजुकेटर) के संपर्क में आए। जिन्होंने सुरेश का नामांकन परिषदीय स्कूल में कराया। वहां सुरेश ने आठवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्हें डायट में चल रहे समेकित शिक्षा के लर्निंग कैंप में प्रशिक्षण दिलाया गया।
विज्ञापन

पढ़ाई पूरी होने के बाद उच्च शिक्षा के लिए स्पेशल एजुकेटर मेराज अहमद मंसूरी ने सुरेश का एडमीशन हरिद्वार के अजरा नंद अंध विद्यालय में कराया। इसके बाद सुरेश ने दिल्ली में 97 प्रतिशत अंकों से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। स्नातक के बाद तैयारी करते हुए 2020 में सुरेश ने दृष्टि दिव्यांगता को मात देते हुए जेआरएफ की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की। इस समय वह भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय दिल्ली में ईपीएफओ के पद पर कार्यरत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिले के परिषदीय स्कूलों में इस वर्ष कुल 3,865 दिव्यांग छात्र पंजीकृत हैं। इसमें पूर्णत: दृष्टिबाधित की श्रेणी वाले 93 बच्चे हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग में समेकित शिक्षा के तहत सात स्पेशल एजुकेटर नियुक्त हैं, जो बच्चों को ब्रेल किट से पढ़ाते हैं। समेकित शिक्षा की जिला समन्वयक आभा त्रिपाठी ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 58 दृष्टिबाधित बच्चाें को ब्रेल किट दी जाएगी।

बीएसए कल्पना देवी का कहना है कि दिव्यांग बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने में समेकित शिक्षा कार्यक्रम अहम भूमिका निभा रहा है। सुरेश की तरह बलरामपुर में प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने वाले कई अन्य दिव्यांग बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण कर आज विभिन्न पदों पर कार्य कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed