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Balrampur News: तीन दशक से खंडहर पड़ा पंचायत भवन, अतिक्रमण बना नए निर्माण में रोड़ा
Fri, 11 Sep 2026 11:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:29 PM IST
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फोटो-1-बलरामपुर के पेहर में खंडहर हुआ पंचायत भवन ।-संवाद
पेहर। तीन दशक से खंडहर पड़े पंचायत भवन और उसकी जमीन पर अतिक्रमण के कारण पेहर के ग्रामीण आज भी पंचायत भवन जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। वर्ष 1995 से बंद पड़ा पंचायत भवन अब पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है। पुराने भवन के पुनर्निर्माण की बात तो दूर, उसकी जमीन से अतिक्रमण तक नहीं हटाया जा सका है।
पंचायत भवन की जमीन पर कब्जा होने के कारण नए भवन का निर्माण वर्षों से अटका हुआ है। इसके चलते पंचायत से जुड़े काम अस्थायी स्थानों पर कराए जा रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों को छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।
खंड विकास अधिकारी सईद अहमद ने बताया कि पंचायत भवन की भूमि खाता संख्या 056 और खसरा संख्या 666 में दर्ज है। भूमि पहले से पंचायत भवन के नाम आवंटित होने के कारण राजस्व विभाग दूसरी जमीन उपलब्ध कराने से इन्कार कर रहा है। अतिक्रमण हटाने के लिए डीपीआरओ और ब्लॉक स्तर से शासन व उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
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अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी जमीन कब कब्जामुक्त होगी और पंचायत भवन का निर्माण कब शुरू हो सकेगा।
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पंचायत भवन की जमीन पर कब्जा होने के कारण नए भवन का निर्माण वर्षों से अटका हुआ है। इसके चलते पंचायत से जुड़े काम अस्थायी स्थानों पर कराए जा रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों को छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।
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खंड विकास अधिकारी सईद अहमद ने बताया कि पंचायत भवन की भूमि खाता संख्या 056 और खसरा संख्या 666 में दर्ज है। भूमि पहले से पंचायत भवन के नाम आवंटित होने के कारण राजस्व विभाग दूसरी जमीन उपलब्ध कराने से इन्कार कर रहा है। अतिक्रमण हटाने के लिए डीपीआरओ और ब्लॉक स्तर से शासन व उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
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अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी जमीन कब कब्जामुक्त होगी और पंचायत भवन का निर्माण कब शुरू हो सकेगा।