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मनरेगा : बारिश में भी लगी ‘हाजिरी’, पर नहीं दिखे मजदूर
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महराजगंज तराई। मनरेगा योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही की तमाम कवायदों के बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। बृहस्पतिवार को दिनभर हुई तेज बारिश के बीच भी तुलसीपुर ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा के मजदूरों की फर्जी ऑनलाइन हाजिरी लगाकर सरकारी धन की लूट का खेल चलता रहा।
ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार ग्राम पंचायत रामगढ़ मटहवा में 37, सेखुइया कला में 55, शीतलापुर में 53, सिकटिहवा में 35, और विजयी डीह में 37 मजदूरों की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से किसी भी परियोजना पर कोई काम नहीं हुआ। फर्जी फोटो और पुरानी तस्वीरें अपलोड कर ऑनलाइन हाजिरी लगा दी गई, ताकि बाद में एमबी (मेजरमेंट बुक) में काम पूरा दिखाकर भुगतान कराया जा सके।
ग्रामीणों ने उठाई आवाज, जांच की मांग
ग्रामीण मन्नू, मोती, राजेश, विजय प्रताप और अखिलेश का कहना है कि यह मनरेगा घोटाले का नया रूप है। बारिश के बावजूद हाजिरी लगाना इस बात का प्रमाण है कि जिम्मेदार अधिकारी और तकनीकी सहायक मिलकर सरकारी धन की बंदरबांट कर रहे हैं। उन्होंने जिला अधिकारी से पूरे प्रकरण की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लॉक स्तर के अधिकारी मौके पर नहीं जाते। ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सेवक अपनी मनमर्जी से हाजिरी लगा देते हैं। काम का भौतिक सत्यापन न होने से ऐसे फर्जीवाड़े पर किसी की नजर नहीं जाती।
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एपीओ से मांगी रिपोर्ट
मनरेगा के कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है। अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी से हाजिरी लगाए जाने की रिपोर्ट मांगी है। पूरे मामले की जांच करके ही पूरी जानकारी हो सकेगी।
- सुनील आर्या, खंड विकास अधिकारी, महराजगंज तराई
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ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार ग्राम पंचायत रामगढ़ मटहवा में 37, सेखुइया कला में 55, शीतलापुर में 53, सिकटिहवा में 35, और विजयी डीह में 37 मजदूरों की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से किसी भी परियोजना पर कोई काम नहीं हुआ। फर्जी फोटो और पुरानी तस्वीरें अपलोड कर ऑनलाइन हाजिरी लगा दी गई, ताकि बाद में एमबी (मेजरमेंट बुक) में काम पूरा दिखाकर भुगतान कराया जा सके।
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ग्रामीणों ने उठाई आवाज, जांच की मांग
ग्रामीण मन्नू, मोती, राजेश, विजय प्रताप और अखिलेश का कहना है कि यह मनरेगा घोटाले का नया रूप है। बारिश के बावजूद हाजिरी लगाना इस बात का प्रमाण है कि जिम्मेदार अधिकारी और तकनीकी सहायक मिलकर सरकारी धन की बंदरबांट कर रहे हैं। उन्होंने जिला अधिकारी से पूरे प्रकरण की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लॉक स्तर के अधिकारी मौके पर नहीं जाते। ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सेवक अपनी मनमर्जी से हाजिरी लगा देते हैं। काम का भौतिक सत्यापन न होने से ऐसे फर्जीवाड़े पर किसी की नजर नहीं जाती।
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एपीओ से मांगी रिपोर्ट
मनरेगा के कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है। अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी से हाजिरी लगाए जाने की रिपोर्ट मांगी है। पूरे मामले की जांच करके ही पूरी जानकारी हो सकेगी।
- सुनील आर्या, खंड विकास अधिकारी, महराजगंज तराई