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Balrampur News: यतीमों के मसीहा कहलाते थे मौला अली
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बलरामपुर के उतरौला में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते मौलाना।- स्रोत: आयोजक
उतरौला (बलरामपुर)। 19वें रमजान के मौके पर बृहस्पतिवार को रेहरा माफी की शिया मस्जिद में सुबह की नमाज के बाद हजरत मौला अली की शहादत के सिलसिले में एक मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में मौला अली को यतीमों का मसीहा बताते हुए उनकी याद में मातम व नौहाख्वानी की गई।
मौलाना ताजदार हुसैन जैदी ने मजलिस में कहा कि मौला अली की हुकूमत के समय कोई भूखा नहीं सोया, उन्हें यतीमों का मसीहा कहा जाता था। उन्होंने यतीम बच्चों, गरीबों की देखभाल और सहायता के लिए बहुत काम किए। उन्हें उनकी न्यायप्रियता, दयालुता और गरीबों के प्रति सहानुभूति के लिए जाना जाता है। 19 रमजान को इराक के कूफा शहर में फज्र की नमाज के बाद इब्ने मुलजिम नामक अतिवादी ने नमाज की हालत में हजरत मौला अली को शहीद कर दिया गया।
शिया मुसलमान 19 से 21 रमजान तक इमाम मौला अली का गम मनाते हैं। मजलिस के बाद मस्जिद से जब हजरत मौला अली का ताबूत लाया गया तो वातावरण शोकमय हो गया और हर ओर से हाय मौला अली की सदाएं आने लगीं। अंजुमन वफा-ए-अब्बास के सदस्यों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी करके अपने शहीद इमाम को पुरसा पेश किया। इस अवसर पर इरफान हैदर, तौसीफ हसन, अब्बास जाफर, तौकीर हसन, मुहम्मद आलिम, रजा अब्बास, मुहम्मद सालिम, इंतेजार मेहदी, मीसम अब्बास, असग़र अली, जावेद हैदर, यासूब अब्बास, नदीम हैदर मौजूद रहे।
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मौलाना ताजदार हुसैन जैदी ने मजलिस में कहा कि मौला अली की हुकूमत के समय कोई भूखा नहीं सोया, उन्हें यतीमों का मसीहा कहा जाता था। उन्होंने यतीम बच्चों, गरीबों की देखभाल और सहायता के लिए बहुत काम किए। उन्हें उनकी न्यायप्रियता, दयालुता और गरीबों के प्रति सहानुभूति के लिए जाना जाता है। 19 रमजान को इराक के कूफा शहर में फज्र की नमाज के बाद इब्ने मुलजिम नामक अतिवादी ने नमाज की हालत में हजरत मौला अली को शहीद कर दिया गया।
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शिया मुसलमान 19 से 21 रमजान तक इमाम मौला अली का गम मनाते हैं। मजलिस के बाद मस्जिद से जब हजरत मौला अली का ताबूत लाया गया तो वातावरण शोकमय हो गया और हर ओर से हाय मौला अली की सदाएं आने लगीं। अंजुमन वफा-ए-अब्बास के सदस्यों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी करके अपने शहीद इमाम को पुरसा पेश किया। इस अवसर पर इरफान हैदर, तौसीफ हसन, अब्बास जाफर, तौकीर हसन, मुहम्मद आलिम, रजा अब्बास, मुहम्मद सालिम, इंतेजार मेहदी, मीसम अब्बास, असग़र अली, जावेद हैदर, यासूब अब्बास, नदीम हैदर मौजूद रहे।
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