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महाराजा दिग्विजय सिंह ने 19वीं सदी में शुरू की थी दशहरे मेले की परंपरा

Mon, 07 Oct 2019 10:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Oct 2019 10:45 PM IST
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Maharaja Digvijay Singh started the tradition of Dussehra Fair in the 19th century
बलरामपुर। बलरामपुर में विजयदशमी के अवसर पर मनाये जाने वाले दशहरा मेले का इतिहास बहुत प्राचीन एवं गौरवमयी है। 19वीं सदी में बलरामपुर राज परिवार के महाराजा दिग्विजय सिंह ने गौरवशाली दशहरे की परंपरा डाली थी। आठ अक्टूबर की शाम नगर के बड़े परेड ग्राउंड में रावण, कुम्भकरण व मेघनाद के पुतलों का दहन किया जायेगा।
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राजपरिवार द्वारा बलरामपुर में शुरू किये गये दशहरा मेले का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। बताया जाता है कि बलरामपुर के महाराजा दिग्विजय सिंह ने 19वीं सदी में स्थानीय परेड ग्राउंड पर भव्य रूप में विजयदशमी महोत्सव एवं दशहरा मेला मनाने की परंपरा शुरू की थी। दशहरा मेला जुलूस में हाथी व घोड़े पर सवार होकर भगवान राम की सेना रावण का संहार करने के लिए यहां पहुंचती थी। राम व रावण की सेना में युद्ध होता था और बाद में भगवान राम द्वारा रावण के पुतले का दहन किया जाता था।
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राजशाही खत्म होने के बाद सन् 1950 में मेले के आयोजन की जिम्मेदारी श्री सनातन धर्म सभा बलरामपुर ने संभाल ली। राज परिवार एवं नगरवासियों के सहयोग से सनातन धर्म सभा द्वारा इस बार 69वां विजयदशमी महोत्सव मनाया जायेगा। सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष केवल कृष्ण शर्मा एवं महामंत्री रमेश पाहवा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राज कुमार लाल श्रीवास्तव, मंत्री संजय शर्मा तथा कोषाध्यक्ष सुनील कसेरा एवं जुलूस व्यवस्थापक संतोष गुप्ता ने बताया कि दशहरा मेले की तैयारी अंतिम चरण में है।
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दशहरा का जुलूस आठ अक्तूबर को सायं 4.30 बजे पूरबटोला स्थित लालजी मिश्र के आवास से निकाला जायेगा। जुलूस नगर के मुख्य मार्गों से होता हुआ सायं 6.30 बजे परेड ग्राउंड पहुंचेगा। माया होटल के पास बलरामपुर राज परिवार के महाराज जयेन्द्र प्रताप सिंह भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण व उनकी सेना का स्वागत एवं पूजन अर्चन करेंगे। यहां पर भगवान राम व रावण की सेनाओं के बीच युद्ध के बाद रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतले का दहन किया जायेगा।
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