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पत्नी के हत्यारे को अजीवन कारावास
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बलरामपुर। पत्नी के हत्या के आरोपी एक व्यक्ति को अजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश शेषमणि ने सोमवार को सजा सुनाकर 17 हजार रुपये रुपये का अर्थदंड लगाया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कुलदीप सिंह ने बताया कि राम निवास पांडेय ने 9 फरवरी 2014 को उतरौला कोतवाल में प्रार्थना पत्र दिया था उसकी लड़की नंदनी पांडेय को दहेज न मिलने के कारण ससुरालीजन प्रताड़ित कर रहे थे। घटना के चार माह पहले दहेज मांगने को लेकर ससुराल वालों ने उसे मारापीटा।
ससुराल वाले बाइक व दो लाख रुपये की मांग कर रहे थे। नंदनी के पिता ने उसे समझा-बुझाकर ससुराल भेजा कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा लेकिन 9 फरवरी 2014 को उसे बताया गया कि नंदनी की मौत हो गई है। पुलिस ने हत्या व दहेज उत्पीड़न का मुकदमा पति विनय कुमार, ससुर मुन्ना व सास अज्ञात के खिलाफ पंजीकृत कर विवेचना शुरु की।
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पुलिस ने विवेचना के दौरान सास व ससुर को निर्दोष मानते हुए उनका नाम हटा दिया और पति विनय कुमार तिवारी को पत्नी की हत्या का दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने सत्र परीक्षण के दौरान 9 सरकारी गवाहों को न्यायालय में पेश किया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने विनय कुमार को निर्दोष मानते हुए बरी करने का आग्रह न्यायालय से किया। सरकारी अधिवक्ता फौजदारी ने आरोपी के पत्नी की हत्या को गंभीर घटना मानते हुए अधिकतम सजा देने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने विनय कुमार तिवारी को नंदनी की हत्या का आरोपी मानते हुए अजीवन कारावास व 17 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कुलदीप सिंह ने बताया कि राम निवास पांडेय ने 9 फरवरी 2014 को उतरौला कोतवाल में प्रार्थना पत्र दिया था उसकी लड़की नंदनी पांडेय को दहेज न मिलने के कारण ससुरालीजन प्रताड़ित कर रहे थे। घटना के चार माह पहले दहेज मांगने को लेकर ससुराल वालों ने उसे मारापीटा।
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ससुराल वाले बाइक व दो लाख रुपये की मांग कर रहे थे। नंदनी के पिता ने उसे समझा-बुझाकर ससुराल भेजा कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा लेकिन 9 फरवरी 2014 को उसे बताया गया कि नंदनी की मौत हो गई है। पुलिस ने हत्या व दहेज उत्पीड़न का मुकदमा पति विनय कुमार, ससुर मुन्ना व सास अज्ञात के खिलाफ पंजीकृत कर विवेचना शुरु की।
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पुलिस ने विवेचना के दौरान सास व ससुर को निर्दोष मानते हुए उनका नाम हटा दिया और पति विनय कुमार तिवारी को पत्नी की हत्या का दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने सत्र परीक्षण के दौरान 9 सरकारी गवाहों को न्यायालय में पेश किया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने विनय कुमार को निर्दोष मानते हुए बरी करने का आग्रह न्यायालय से किया। सरकारी अधिवक्ता फौजदारी ने आरोपी के पत्नी की हत्या को गंभीर घटना मानते हुए अधिकतम सजा देने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने विनय कुमार तिवारी को नंदनी की हत्या का आरोपी मानते हुए अजीवन कारावास व 17 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।