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हत्यारे बाप को आजीवन कारावास की सजा
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बलरामपुर। बहू से दुराचार के प्रयास में असफल रहने पर बाप ने अपने बेटे को जहर खिलाकर मार दिया। एफटीसी प्रथम ने पिता को हत्या व दुराचार के प्रयास का आरोपी मानते हुए आजीवन कारावास तथा 24 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एक महिला ने गौरा चौराहा थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि उसके ससुर उससे 28 जून 2016 को दुराचार करने का प्रयास कर रहे थे। पीड़िता ने शोर मचाया तो पति ने आकर पिता को फटकार लगाई। इससे नाराज होकर ससुर दिनेश कुमार व देवर आलोक ने पति को जबरदस्ती जहर पिला दिया जिससे उसकी मौत हो गई।
पीड़िता के तहरीर पर पुलिस ने 30 जून 2016 को हत्या व दुराचार का प्रयास करने के आरोप में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना शुरू की। पुलिस ने प्रथम दृष्टया दिनेश व आलोक को दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रणधीर सिंह ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावाली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम विजय कुमार आजाद ने दिनेश कुमार को हत्या व दुराचार का प्रयास करने का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 24 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। इस मामले में दूसरा आरोपी देवर आलोक नाबालिग साबित हुआ इसलिए उसके मुकदमे के परीक्षण के लिए मामला किशोर न्यायालय बोर्ड को पत्रावली हस्तांतरित कर दिया गया है।
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एक महिला ने गौरा चौराहा थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि उसके ससुर उससे 28 जून 2016 को दुराचार करने का प्रयास कर रहे थे। पीड़िता ने शोर मचाया तो पति ने आकर पिता को फटकार लगाई। इससे नाराज होकर ससुर दिनेश कुमार व देवर आलोक ने पति को जबरदस्ती जहर पिला दिया जिससे उसकी मौत हो गई।
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पीड़िता के तहरीर पर पुलिस ने 30 जून 2016 को हत्या व दुराचार का प्रयास करने के आरोप में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना शुरू की। पुलिस ने प्रथम दृष्टया दिनेश व आलोक को दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रणधीर सिंह ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावाली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम विजय कुमार आजाद ने दिनेश कुमार को हत्या व दुराचार का प्रयास करने का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 24 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। इस मामले में दूसरा आरोपी देवर आलोक नाबालिग साबित हुआ इसलिए उसके मुकदमे के परीक्षण के लिए मामला किशोर न्यायालय बोर्ड को पत्रावली हस्तांतरित कर दिया गया है।