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आठ डाक्टरों के सहारे चल रहा संयुक्त जिला चिकित्सालय
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बलरामपुर। जिले की करीब 25 लाख आबादी के इलाज की जिम्मेदारी संभालने वाला संयुक्त जिला चिकित्सालय डॉक्टरों व संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। मात्र आठ स्थायी डॉक्टरों के सहारे इस अस्पताल का संचालन किया जा रहा है।
अस्पताल में डॉक्टरों के साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भी भारी कमी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं संसाधनों की कमी के चलते अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का समुचित लाभ नही मिल पा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा है।
बताते चले की जिले की करीब 25 लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में संयुक्त जिला चिकित्सालय का संचालन शुरू किया गया था।
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अस्पताल अत्याधुनिक पैथोलॉजी, डायलिसिस मशीन, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे एवं आक्सीजन प्लांट से लैैस है। अस्पताल में कोविड वार्ड एवं पीकू वार्ड का भी संचालन किया जा रहा है।
अत्याधुनिक मशीनों व उपकरणों से लैस होने के बावजूद डाक्टरों एवं कर्मचारियों की कमी के चलते मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों के कुल स्वीकृत पद 32 है जिसके सापेक्ष यहां मात्र आठ स्थायी डाक्टरों की तैनाती है।
इसी तरह अस्पताल में 19 स्टाफ नर्स के सापेक्ष मात्र 6 स्टाफ नर्स की तैनाती है। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तरफ से यहां पांच डॉक्टर अस्थाई रूप से संबद्ध किए गए हैं।
जिले का प्रमुख अस्पताल होने के कारण यहां प्रतिदिन करीब आठ सौ मरीज आते हैं ऐसे में डाक्टरों की कमी के चलते उन्हें समुचित इलाज का लाभ नही मिल पाता है।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार का कहना है कि यहां स्थायी रूप से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक फिजीशिएन, एक सर्जन, दो एनस्थेटिक, एक त्वचा रोग, एक इएनटी सर्जन, एक कार्डियोलाजिस्ट, एक डेंटल सर्जन तथा तीन महिला व तीन पुरुष इमरजेंसी मेडिकल आफीसर की सख्त जरूरत है।
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अस्पताल में डॉक्टरों के साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भी भारी कमी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं संसाधनों की कमी के चलते अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का समुचित लाभ नही मिल पा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा है।
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बताते चले की जिले की करीब 25 लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में संयुक्त जिला चिकित्सालय का संचालन शुरू किया गया था।
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अस्पताल अत्याधुनिक पैथोलॉजी, डायलिसिस मशीन, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे एवं आक्सीजन प्लांट से लैैस है। अस्पताल में कोविड वार्ड एवं पीकू वार्ड का भी संचालन किया जा रहा है।
अत्याधुनिक मशीनों व उपकरणों से लैस होने के बावजूद डाक्टरों एवं कर्मचारियों की कमी के चलते मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों के कुल स्वीकृत पद 32 है जिसके सापेक्ष यहां मात्र आठ स्थायी डाक्टरों की तैनाती है।
इसी तरह अस्पताल में 19 स्टाफ नर्स के सापेक्ष मात्र 6 स्टाफ नर्स की तैनाती है। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तरफ से यहां पांच डॉक्टर अस्थाई रूप से संबद्ध किए गए हैं।
जिले का प्रमुख अस्पताल होने के कारण यहां प्रतिदिन करीब आठ सौ मरीज आते हैं ऐसे में डाक्टरों की कमी के चलते उन्हें समुचित इलाज का लाभ नही मिल पाता है।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार का कहना है कि यहां स्थायी रूप से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक फिजीशिएन, एक सर्जन, दो एनस्थेटिक, एक त्वचा रोग, एक इएनटी सर्जन, एक कार्डियोलाजिस्ट, एक डेंटल सर्जन तथा तीन महिला व तीन पुरुष इमरजेंसी मेडिकल आफीसर की सख्त जरूरत है।