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Balrampur News: कर्मचारियों की कमी से चरमराई सिंचाई व्यवस्था, 30 हजार किसान प्रभावित
Wed, 03 Jun 2026 10:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 03 Jun 2026 10:51 PM IST
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फोटो-15-बलरामपुर के गैसड़ी मं नहर में उगी झाड़ियां ।-संवाद
गैसड़ी। कार्यालय जिलेदारी तृतीय खंड पचपेड़वा में सींचपाल और सींच पर्यवेक्षकों की भारी कमी के कारण नहरों की निगरानी एवं रखरखाव व्यवस्था प्रभावित हो गई है। इसका सीधा असर क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ रहा है, हजारों किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में एसडीओ पवन कुमार ने बताया कि सींच पर्यवेक्षक और सींचपाल सहित कर्मचारियों की कमी के बारे में शासन को पत्र लिखा गया है।
कार्यालय में सृजित 17 पदों के सापेक्ष केवल कार्यवाहक जिलेदार लालमन तैनात हैं, जो जिलेदार और मुंशी दोनों का कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा एक मुंशी और एक चपरासी कार्यरत हैं। सींच पर्यवेक्षक (अमीन) के छह स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र चार कर्मचारी कार्य कर रहे हैं, जबकि सींचपाल का एक भी पद भरा नहीं है। राप्ती नहर निर्माण खंड पचपेड़वा के अधीन विकासखंड गैसड़ी की लालपुर, अमवाबास, भोजपुर थारू, मझौली, बखरकोटवा, सिंहमुहानी सहित 30 ग्राम पंचायतें तथा विकासखंड पचपेड़वा की विशुनपुर टंटनवा, मल्दा, मदरहवा, सकल्दा समेत लगभग 70 ग्राम पंचायतों की नहर सिंचाई व्यवस्था आती है। इस प्रकार करीब 100 ग्राम पंचायतों और लगभग 30 हजार किसानों की सिंचाई व्यवस्था का दायित्व मात्र सात कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। नियमावली के अनुसार एक सींचपाल के जिम्मे अधिकतम 8 से 10 किलोमीटर नहर और 6 से 10 गांव होने चाहिए, लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते प्रत्येक कर्मचारी को लगभग 100 किलोमीटर क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ गया है तथा नहरों का नियमित सर्वेक्षण और निगरानी नहीं हो पा रही है। देखरेख के अभाव में कई नहरें बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं।
अधिकांश नहरें सूखी, खेतों तक नहीं पहुंच रहा पानी
किसान अब्दुल वहाब, सोनू सिंह, बृज किशोर चौधरी, अरुण कुमार चतुर्वेदी व फजलुर रहमान ने बताया कि अधिकांश नहरें सूखी पड़ी हैं और खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं की गईं और नहरों की मरम्मत व निगरानी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो कृषि कार्य और अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
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कार्यालय में सृजित 17 पदों के सापेक्ष केवल कार्यवाहक जिलेदार लालमन तैनात हैं, जो जिलेदार और मुंशी दोनों का कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा एक मुंशी और एक चपरासी कार्यरत हैं। सींच पर्यवेक्षक (अमीन) के छह स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र चार कर्मचारी कार्य कर रहे हैं, जबकि सींचपाल का एक भी पद भरा नहीं है। राप्ती नहर निर्माण खंड पचपेड़वा के अधीन विकासखंड गैसड़ी की लालपुर, अमवाबास, भोजपुर थारू, मझौली, बखरकोटवा, सिंहमुहानी सहित 30 ग्राम पंचायतें तथा विकासखंड पचपेड़वा की विशुनपुर टंटनवा, मल्दा, मदरहवा, सकल्दा समेत लगभग 70 ग्राम पंचायतों की नहर सिंचाई व्यवस्था आती है। इस प्रकार करीब 100 ग्राम पंचायतों और लगभग 30 हजार किसानों की सिंचाई व्यवस्था का दायित्व मात्र सात कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। नियमावली के अनुसार एक सींचपाल के जिम्मे अधिकतम 8 से 10 किलोमीटर नहर और 6 से 10 गांव होने चाहिए, लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते प्रत्येक कर्मचारी को लगभग 100 किलोमीटर क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ गया है तथा नहरों का नियमित सर्वेक्षण और निगरानी नहीं हो पा रही है। देखरेख के अभाव में कई नहरें बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं।
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अधिकांश नहरें सूखी, खेतों तक नहीं पहुंच रहा पानी
किसान अब्दुल वहाब, सोनू सिंह, बृज किशोर चौधरी, अरुण कुमार चतुर्वेदी व फजलुर रहमान ने बताया कि अधिकांश नहरें सूखी पड़ी हैं और खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं की गईं और नहरों की मरम्मत व निगरानी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो कृषि कार्य और अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
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