{"_id":"67781cbda518d7647709e7c2","slug":"increased-risk-of-bronchiolitis-in-children-balrampur-news-c-99-1-brp1003-119152-2025-01-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: बच्चों में ब्रोंकियोलाइटिस का बढ़ रहा खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: बच्चों में ब्रोंकियोलाइटिस का बढ़ रहा खतरा
विज्ञापन
बलरामपुर के जिला मेमोरियल अस्पताल बच्चे की जांच करते डॉ. हीरालाल।-संवाद
बलरामपुर। ठंड के मौसम में जहां सर्दी, जुकाम व बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है, वहीं जिला मेमोरियल अस्पताल के बाल रोग विभाग में ब्रोंकियोलाइटिस से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। बीते एक सप्ताह से प्रतिदिन चार से पांच बच्चों में यह बीमारी मिल रही है।
ठंड बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में मरीजों की भीड़ जुट रही है। वयस्क व्यक्तियों में जहां सर्दी, खांसी, जुकाम व बुखार की समस्या रहती है, वहीं बच्चों में ब्रोंकियोलाइटिस का खतरा बढ़ गया है। जिला मेमोरियल चिकित्सालय में पिछले पांच दिनों से लगातार इस बीमारी से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हीरालाल ने बताया कि ठंड में प्राय: नवजात व छोटे बच्चों में निमोनिया की शिकायत रहती है, लेकिन इस बार कुछ बच्चों में ब्रोंकियोलाइटिस बीमारी भी पाई जा रही है। करीब एक सप्ताह से प्रतिदिन चार से पांच बच्चे इस बीमारी से पीड़ित मिल रहे हैं। अब तक करीब 20 बच्चों में यह बीमारी पाई गई है। शुक्रवार को बाल रोग विभाग की ओपीडी में 55 बच्चों का इलाज किया गया, जिसमें पांच बच्चे ब्रोंकियोलाइटिस से पीड़ित मिले।
विज्ञापन
ब्रोंकियोलाइटिस के लक्षण
ब्रोंकियोलाइटिस के लक्षण पहले आम सर्दी-जुकाम जैसे ही होते हैं, लेकिन फिर स्थिति काफी खराब हो जाती है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों में खांसी और सांस छोड़ते समय तेज सीटी जैसी आवाज आती है। कभी-कभी बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है। ब्रोंकियोलाइटिस के लक्षण एक से दो सप्ताह तक रहते हैं।
फेफड़ों काे प्रभावित करता है यह रोग
बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि ब्रोंकियोलाइटिस निमोनिया का एक प्रकार है। यह बीमारी छोटे बच्चों और नवजात के फेफड़ों का संक्रमण है। यह फेफड़े के श्वांसनली में सूजन, जलन और बलगम के निर्माण का कारण बनता है। इन श्वांसनली को ब्रोंकियोल कहा जाता है। ब्रोंकियोलाइटिस वायरस के कारण होता है।
विज्ञापन
ठंड बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में मरीजों की भीड़ जुट रही है। वयस्क व्यक्तियों में जहां सर्दी, खांसी, जुकाम व बुखार की समस्या रहती है, वहीं बच्चों में ब्रोंकियोलाइटिस का खतरा बढ़ गया है। जिला मेमोरियल चिकित्सालय में पिछले पांच दिनों से लगातार इस बीमारी से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं।
विज्ञापन
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हीरालाल ने बताया कि ठंड में प्राय: नवजात व छोटे बच्चों में निमोनिया की शिकायत रहती है, लेकिन इस बार कुछ बच्चों में ब्रोंकियोलाइटिस बीमारी भी पाई जा रही है। करीब एक सप्ताह से प्रतिदिन चार से पांच बच्चे इस बीमारी से पीड़ित मिल रहे हैं। अब तक करीब 20 बच्चों में यह बीमारी पाई गई है। शुक्रवार को बाल रोग विभाग की ओपीडी में 55 बच्चों का इलाज किया गया, जिसमें पांच बच्चे ब्रोंकियोलाइटिस से पीड़ित मिले।
विज्ञापन
ब्रोंकियोलाइटिस के लक्षण
ब्रोंकियोलाइटिस के लक्षण पहले आम सर्दी-जुकाम जैसे ही होते हैं, लेकिन फिर स्थिति काफी खराब हो जाती है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों में खांसी और सांस छोड़ते समय तेज सीटी जैसी आवाज आती है। कभी-कभी बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है। ब्रोंकियोलाइटिस के लक्षण एक से दो सप्ताह तक रहते हैं।
फेफड़ों काे प्रभावित करता है यह रोग
बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि ब्रोंकियोलाइटिस निमोनिया का एक प्रकार है। यह बीमारी छोटे बच्चों और नवजात के फेफड़ों का संक्रमण है। यह फेफड़े के श्वांसनली में सूजन, जलन और बलगम के निर्माण का कारण बनता है। इन श्वांसनली को ब्रोंकियोल कहा जाता है। ब्रोंकियोलाइटिस वायरस के कारण होता है।