{"_id":"6ada5db245be9efe0508f345","slug":"i-was-overwhelmed-after-listening-to-shri-krishna-leela-balrampur-news-c-99-1-slko1019-156725-2026-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: श्रीकृष्ण लीला सुनकर हुए भाव विभोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: श्रीकृष्ण लीला सुनकर हुए भाव विभोर
Fri, 23 Oct 2026 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 23 Oct 2026 12:32 AM IST
विज्ञापन
मथुरा बाजार के चौसार में कथा सुनने के लिए जुटी श्रद्धालुओं की भीड़ ।
ललिया। मथुरा बाजार के चौसार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बृहस्पतिवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा प्रवाचक संत सर्वेश जी महाराज ने पूतना वध का प्रसंग सुनाकर भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे।
कथा प्रवाचक ने बताया कि कंस भगवान श्रीकृष्ण को मारना चाहता था। इसी उद्देश्य से उसने पूतना को गोकुल भेजा। पूतना सुंदर स्त्री का रूप धारण कर गोकुल पहुंची। उस समय भगवान श्रीकृष्ण की छठी का उत्सव मनाया जा रहा था। घर-आंगन में खुशियां छाई थीं और चारों ओर बधाइयां गूंज रही थीं।
पूतना ने अपने स्तनों पर कालकूट विष लगाकर भगवान श्रीकृष्ण को दूध पिलाने का प्रयास किया। भगवान श्रीकृष्ण उसकी मंशा समझ गए और दूध पीने के साथ ही उसके प्राण खींच लिए, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद गोकुलवासियों ने पूतना के शरीर का अंतिम संस्कार किया तो उसमें से सुगंध निकलने लगी।
विज्ञापन
कथा प्रवाचक ने कहा कि भगवान के स्पर्श मात्र से पूतना जैसी राक्षसी का भी उद्धार हो गया। यह प्रसंग भगवान की कृपा और उनकी असीम महिमा को दर्शाता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भक्तिभाव से श्रवण किया।
इस अवसर पर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल, अशोक पांडेय, अवधेश शुक्ल, जनार्दन मिश्रा, डॉ. अशोक मिश्रा, सुशील तिवारी, अतुल मिश्रा और कथा के यजमान डॉ. शिवराम मिश्रा मौजूद रहे।
विज्ञापन
कथा प्रवाचक ने बताया कि कंस भगवान श्रीकृष्ण को मारना चाहता था। इसी उद्देश्य से उसने पूतना को गोकुल भेजा। पूतना सुंदर स्त्री का रूप धारण कर गोकुल पहुंची। उस समय भगवान श्रीकृष्ण की छठी का उत्सव मनाया जा रहा था। घर-आंगन में खुशियां छाई थीं और चारों ओर बधाइयां गूंज रही थीं।
विज्ञापन
पूतना ने अपने स्तनों पर कालकूट विष लगाकर भगवान श्रीकृष्ण को दूध पिलाने का प्रयास किया। भगवान श्रीकृष्ण उसकी मंशा समझ गए और दूध पीने के साथ ही उसके प्राण खींच लिए, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद गोकुलवासियों ने पूतना के शरीर का अंतिम संस्कार किया तो उसमें से सुगंध निकलने लगी।
विज्ञापन
कथा प्रवाचक ने कहा कि भगवान के स्पर्श मात्र से पूतना जैसी राक्षसी का भी उद्धार हो गया। यह प्रसंग भगवान की कृपा और उनकी असीम महिमा को दर्शाता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भक्तिभाव से श्रवण किया।
इस अवसर पर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल, अशोक पांडेय, अवधेश शुक्ल, जनार्दन मिश्रा, डॉ. अशोक मिश्रा, सुशील तिवारी, अतुल मिश्रा और कथा के यजमान डॉ. शिवराम मिश्रा मौजूद रहे।