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Balrampur News: 18 दिन में कैसे खर्च होंगे दो करोड़ रुपये
Mon, 13 Mar 2023 11:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 13 Mar 2023 11:44 PM IST
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बलरामपुर। स्वास्थ्य महकमे को बजट खर्च करने में पसीना छूट रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग के पास दो करोड़ रुपये से अधिक का बजट बचा हुआ है। अगले 18 दिनों में इसे खर्च कर पाना विभाग के लिए चुनौती बन गई है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 150 से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हैं। इन केंद्रों पर आने वाले मरीजों की जांच के लिए विभाग को जांच संबंधी किट समेत अन्य उपकरण खरीदने होते हैं। इस मद में एक करोड़ रुपये से अधिक का बजट अबतक खर्च नहीं हो सका है।
आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूल में बच्चों का उपचार करने वाली राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम वाहन के अभाव में पांच महीने से भ्रमण नहीं कर रही है। भ्रमण न होने से इस मद में करीब 45 लाख रुपये बचा हुआ है। किराए के भवन में संचालित हो रहे एएनएम सेंटर के लिए सामान खरीद न होने पर करीब 50 लाख रुपये अभी तक खर्च नहीं हुए हैं। ग्रामीण अस्पतालों में क्लीनिंग एंड स्वीपिंग की निविदा न हो पाने के कारण 15 लाख से अधिक का बजट दो साल से डंप है। चालू वित्तीय वर्ष के शेष बचे 18 दिनों में यह बजट खर्च कर पाना अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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जेम पोर्टल पर टेंडर बना परेशानी
अधिकांश योजनाओं का बजट खर्च न हो पाने में जेम पोर्टल सबसे बड़ा बाधक बन रहा है। कई योजनाओं में सामान खरीदने के लिए पोर्टल पर निविदा कराई गई लेकिन तकनीकी पेंच के चलते प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। जबकि कुछ निविदा में आवेदन न आने के कारण उसे रद्द करना पड़ा। प्रयास है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले अधिकांश कार्य पूरे कर लिए जाएं।
-डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ बलरामपुर
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 150 से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हैं। इन केंद्रों पर आने वाले मरीजों की जांच के लिए विभाग को जांच संबंधी किट समेत अन्य उपकरण खरीदने होते हैं। इस मद में एक करोड़ रुपये से अधिक का बजट अबतक खर्च नहीं हो सका है।
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आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूल में बच्चों का उपचार करने वाली राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम वाहन के अभाव में पांच महीने से भ्रमण नहीं कर रही है। भ्रमण न होने से इस मद में करीब 45 लाख रुपये बचा हुआ है। किराए के भवन में संचालित हो रहे एएनएम सेंटर के लिए सामान खरीद न होने पर करीब 50 लाख रुपये अभी तक खर्च नहीं हुए हैं। ग्रामीण अस्पतालों में क्लीनिंग एंड स्वीपिंग की निविदा न हो पाने के कारण 15 लाख से अधिक का बजट दो साल से डंप है। चालू वित्तीय वर्ष के शेष बचे 18 दिनों में यह बजट खर्च कर पाना अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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जेम पोर्टल पर टेंडर बना परेशानी
अधिकांश योजनाओं का बजट खर्च न हो पाने में जेम पोर्टल सबसे बड़ा बाधक बन रहा है। कई योजनाओं में सामान खरीदने के लिए पोर्टल पर निविदा कराई गई लेकिन तकनीकी पेंच के चलते प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। जबकि कुछ निविदा में आवेदन न आने के कारण उसे रद्द करना पड़ा। प्रयास है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले अधिकांश कार्य पूरे कर लिए जाएं।
-डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ बलरामपुर