{"_id":"637bc80d389bf2602d3c076a","slug":"health-department-plans-sam-unit-for-weak-kids-balrampur-news-lko6582813123","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुपोषण का न हो वार, सैम ट्रीटमेंट यूनिट में होगा उपचार-संशोधित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुपोषण का न हो वार, सैम ट्रीटमेंट यूनिट में होगा उपचार-संशोधित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलरामपुर। कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए एक और प्रयास किया जा रहा है। जिला स्तर पर पोषण पुनर्वास केंद्र के साथ ही अब देवीपाटन मंडल के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती जिलों में एक-एक सैम ट्रीटमेंट यूनिट की स्थापना की जाएगी। इसके लिए अस्पतालों का चयन कर लिया गया है। यहां पर बच्चों को अति कुपोषण होने की प्रारंभिक अवस्था में भर्ती करके उनका इलाज किया जाएगा।
आंकड़ों के मुताबिक देवीपाटन मंडल में 72 हजार 502 बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। अधिकारी दावा करते हैं कि इसमें से 52 हजार 351 बच्चों को सुपोषित किया जा चुका है। 68 हजार 973 बच्चों को सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य प्रबंधन किया गया। इसके लिए 14 हजार 425 स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया गया है। मंडलीय अधिकारी का प्रभार देख रहे धर्मेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने कुपोषित बच्चों की जांच के लिए प्रत्येक माह के पहले बुधवार को स्वास्थ्य उपकेंद्र या हेल्थ वेलनेस सेंटर पर होने वाले विशेष सत्र को और बेहतर बनाने का निर्णय लिया है और इनकी मॉनीटरिंग की जाएगी। हाइपोग्लाइसीमिया, दस्त, दिखने में बहुत कमजोर, दोनों पैरों में गड्ढे वाली सूजन, बेहोशी, चिड़चिड़ापन, सांस लेने में किसी तरह की परेशानी, हथेलियों में पीलापन, भूख न लगने, बुखार व निमोनिया से परेशान बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विज्ञापन
ऐसे में अब मंडल के चारों जिलों में एक-एक सैम ट्रीटमेंट यूनिट की स्थापना को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने अनुमति जारी कर दी है। अपर निदेशक स्वास्थ्य देवीपाटन मंडल डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि देवीपाटन मंडल के चारों जिलों में एक-एक सैम ट्रीटमेंट यूनिट खोली जानी है। इसके लिए अनुमति मिल गई है। यूनिट की स्थापना होने से कुपोषित बच्चों के इलाज में काफी सहूलियत मिलेगी। बलरामपुर, बहराइच, गोंडा व श्रावस्ती के सीएमओ को इसको लेकर निर्देश दे दिए गए हैं।
सैम ट्रीटमेंट यूनिट में 3-4 बेड की व्यवस्था होगी। यूनिट में रसोई की व्यवस्था रहेगी। साथ ही यहां पर ग्लूकोमीटर, वजन मशीन, इन्फोटोमीटर, केस रिकॉर्ड व ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल सहित अन्य सुविधाएं होंगी। यहां पर विटामिन, फोलिक एसिड, ओआरएस व जिंक सल्फेट सहित 16 तरह की दवाएं भी रहेंगी। एक यूनिट की स्थापना पर 62 हजार 500 रुपये खर्च किए जाएंगे।
यूनिट में उन्हीं कुुपोषित बच्चों को भर्ती किया जाएगा, जिनमें सामान्य चिकित्सीय जटिलता जैसे बुखार, दस्त, अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन अथवा कोई और स्वास्थ्य समस्या हो। जिनके माता-पिता पोषण पुनर्वास केंद्र पर ले जाने के लिए इच्छुक नहीं है, ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाएगा। भर्ती किए जाने वाले बच्चों को 5 से 6 दिन तक यूनिट में रखा जाएगा। इसके बाद अगर बच्चे की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो उसे पोषण पुनर्वास केंद्र रेफर कर दिया जाएगा।
यूनिट में आने वाले बच्चे का वजन प्रतिदिन किया जाएगा, सैम चार्ट प्रतिदिन भराया जाएगा। अगर बच्चे का वजन तीन दिन तक 5 ग्राम प्रति किलो की दर से बढ़ रहा है अथवा समस्या का समाधान हो गया हो तो उसे घर भेजा जा सकता है। 15 दिन के अन्तराल पर फॉलोअप के लिए बुलाया जाएगा।
विज्ञापन
आंकड़ों के मुताबिक देवीपाटन मंडल में 72 हजार 502 बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। अधिकारी दावा करते हैं कि इसमें से 52 हजार 351 बच्चों को सुपोषित किया जा चुका है। 68 हजार 973 बच्चों को सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य प्रबंधन किया गया। इसके लिए 14 हजार 425 स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया गया है। मंडलीय अधिकारी का प्रभार देख रहे धर्मेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है।
विज्ञापन
वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने कुपोषित बच्चों की जांच के लिए प्रत्येक माह के पहले बुधवार को स्वास्थ्य उपकेंद्र या हेल्थ वेलनेस सेंटर पर होने वाले विशेष सत्र को और बेहतर बनाने का निर्णय लिया है और इनकी मॉनीटरिंग की जाएगी। हाइपोग्लाइसीमिया, दस्त, दिखने में बहुत कमजोर, दोनों पैरों में गड्ढे वाली सूजन, बेहोशी, चिड़चिड़ापन, सांस लेने में किसी तरह की परेशानी, हथेलियों में पीलापन, भूख न लगने, बुखार व निमोनिया से परेशान बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विज्ञापन
ऐसे में अब मंडल के चारों जिलों में एक-एक सैम ट्रीटमेंट यूनिट की स्थापना को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने अनुमति जारी कर दी है। अपर निदेशक स्वास्थ्य देवीपाटन मंडल डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि देवीपाटन मंडल के चारों जिलों में एक-एक सैम ट्रीटमेंट यूनिट खोली जानी है। इसके लिए अनुमति मिल गई है। यूनिट की स्थापना होने से कुपोषित बच्चों के इलाज में काफी सहूलियत मिलेगी। बलरामपुर, बहराइच, गोंडा व श्रावस्ती के सीएमओ को इसको लेकर निर्देश दे दिए गए हैं।
सैम ट्रीटमेंट यूनिट में 3-4 बेड की व्यवस्था होगी। यूनिट में रसोई की व्यवस्था रहेगी। साथ ही यहां पर ग्लूकोमीटर, वजन मशीन, इन्फोटोमीटर, केस रिकॉर्ड व ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल सहित अन्य सुविधाएं होंगी। यहां पर विटामिन, फोलिक एसिड, ओआरएस व जिंक सल्फेट सहित 16 तरह की दवाएं भी रहेंगी। एक यूनिट की स्थापना पर 62 हजार 500 रुपये खर्च किए जाएंगे।
यूनिट में उन्हीं कुुपोषित बच्चों को भर्ती किया जाएगा, जिनमें सामान्य चिकित्सीय जटिलता जैसे बुखार, दस्त, अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन अथवा कोई और स्वास्थ्य समस्या हो। जिनके माता-पिता पोषण पुनर्वास केंद्र पर ले जाने के लिए इच्छुक नहीं है, ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाएगा। भर्ती किए जाने वाले बच्चों को 5 से 6 दिन तक यूनिट में रखा जाएगा। इसके बाद अगर बच्चे की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो उसे पोषण पुनर्वास केंद्र रेफर कर दिया जाएगा।
यूनिट में आने वाले बच्चे का वजन प्रतिदिन किया जाएगा, सैम चार्ट प्रतिदिन भराया जाएगा। अगर बच्चे का वजन तीन दिन तक 5 ग्राम प्रति किलो की दर से बढ़ रहा है अथवा समस्या का समाधान हो गया हो तो उसे घर भेजा जा सकता है। 15 दिन के अन्तराल पर फॉलोअप के लिए बुलाया जाएगा।