{"_id":"621bc5c3209f890df9397170","slug":"gainsari-292-vidhan-sabha-2022-gainsari-vidhan-sabha-2022-balrampur-news-lko619702012","type":"story","status":"publish","title_hn":"वीआईपी सीट-292 गैसड़ी-जनपद बलरामपुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वीआईपी सीट-292 गैसड़ी-जनपद बलरामपुर
विज्ञापन
बलरामपुर। पिछले तीन चुनावों से बसपा, सपा व भाजपा के हाथों में कमान देने वाले मतदाताओं का रूख बदला-बदला नजर आ रहा है। सपा व बसपा प्रत्याशी पूरे दमखम से मैदान में भाजपा के निवर्तमान विधायक को चुनौती दे रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी मुकाबले को दिलचस्प बनाने में जुटे हैं। आखिरी फैसला मतदाताओं को करना है। भाजपा और सपा प्रत्याशी जातिगत व धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं। बसपा व कांग्रेस प्रत्याशी मतदाताओं को पाले में करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
सपा से तीन बार विधायक और दो बार राज्यमंत्री रहे डॉ. एसपी यादव इस बार फिर मैदान में हैं। भाजपा के टिकट पर वर्ष 2017 में विधायक बने शैलेश कुमार सिंह शैलू इस बार जीत को दोहराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। पिछली बार रनर रहे बसपा के अलाउद्दीन खां चुनाव को त्रिकोणीय बनाकर पिछली हार को जीत में बदलना चाहते हैं। कांग्रेस इस बार क्षेत्र के लोकप्रिय चिकित्सक डॉ. इश्तियाक अहमद को चुनाव मैदान में उतारा है। डॉ. एसपी यादव, अलाउद्दीन खां व शैलेश कुमार सिंह शैलू राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं तो वहीं डॉ. इश्तियाक अहमद नए चेहरे के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर भाजपा व सपा के बीच टक्कर होने के आसार दिख रहे हैं। भाजपा की नजर दलित व कुर्मी वोटों पर टिकी है। सपाई, बसपाई व कांग्रेसी दलितों, पिछड़ो व मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने का दावा कर मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं।
सभी प्रत्याशी की नजर जातिगत व धार्मिक ध्रुवीकरण पर टिकी है। यहां के मतदाताओं का मिजाज पिछले तीन चुनावों में लगातार बदलता रहा है। वर्ष 2007 में बसपा, 2012 में सपा तथा 2017 में मतदाताओं ने यह सीट भाजपा की झोली में डाला था। नेपाल सीमा से सटी इस विधानसभा सीट पर दलित, पिछड़े व मुस्लिम मतदाता निर्णायक माने जाते हैं।
विज्ञापन
तुलसीपुर व शोहरतगढ़ सीट पर भी पड़ता है असर
गैसड़ी सीट के चुनावी माहौल का असर बलरामपुर जनपद की तुलसीपुर तथा सिद्घार्थनगर जनपद की शोहरतगढ़ सीट पर भी पड़ता है। जातीय व धार्मिक समीकरणों को साझाकर इस सीट के उम्मीदवार तुलसीपुर और शोहरतगढ़ के चुनाव को भी प्रभावित करते हैं। इस क्षेत्र के रिश्तेदार भी आपस में चुनावी गणित साझा करके मतदान करते हैं।
फैक्ट फाइल
कुल मतदाता-363703
पुरुष-195450
महिला-168336
विज्ञापन
सपा से तीन बार विधायक और दो बार राज्यमंत्री रहे डॉ. एसपी यादव इस बार फिर मैदान में हैं। भाजपा के टिकट पर वर्ष 2017 में विधायक बने शैलेश कुमार सिंह शैलू इस बार जीत को दोहराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। पिछली बार रनर रहे बसपा के अलाउद्दीन खां चुनाव को त्रिकोणीय बनाकर पिछली हार को जीत में बदलना चाहते हैं। कांग्रेस इस बार क्षेत्र के लोकप्रिय चिकित्सक डॉ. इश्तियाक अहमद को चुनाव मैदान में उतारा है। डॉ. एसपी यादव, अलाउद्दीन खां व शैलेश कुमार सिंह शैलू राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं तो वहीं डॉ. इश्तियाक अहमद नए चेहरे के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर भाजपा व सपा के बीच टक्कर होने के आसार दिख रहे हैं। भाजपा की नजर दलित व कुर्मी वोटों पर टिकी है। सपाई, बसपाई व कांग्रेसी दलितों, पिछड़ो व मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने का दावा कर मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं।
विज्ञापन
सभी प्रत्याशी की नजर जातिगत व धार्मिक ध्रुवीकरण पर टिकी है। यहां के मतदाताओं का मिजाज पिछले तीन चुनावों में लगातार बदलता रहा है। वर्ष 2007 में बसपा, 2012 में सपा तथा 2017 में मतदाताओं ने यह सीट भाजपा की झोली में डाला था। नेपाल सीमा से सटी इस विधानसभा सीट पर दलित, पिछड़े व मुस्लिम मतदाता निर्णायक माने जाते हैं।
विज्ञापन
तुलसीपुर व शोहरतगढ़ सीट पर भी पड़ता है असर
गैसड़ी सीट के चुनावी माहौल का असर बलरामपुर जनपद की तुलसीपुर तथा सिद्घार्थनगर जनपद की शोहरतगढ़ सीट पर भी पड़ता है। जातीय व धार्मिक समीकरणों को साझाकर इस सीट के उम्मीदवार तुलसीपुर और शोहरतगढ़ के चुनाव को भी प्रभावित करते हैं। इस क्षेत्र के रिश्तेदार भी आपस में चुनावी गणित साझा करके मतदान करते हैं।
फैक्ट फाइल
कुल मतदाता-363703
पुरुष-195450
महिला-168336