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बाढ़ के चलते जिले के ढाई सौ स्कूलों में लटका ताला
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बलरामपुर। बाढ़ के चलते मंगलवार को जिले के ढाई सौ से अधिक स्कूलों में ताला लटका रहा। बाढ़ का पानी भरने से पढ़ाई के लिए बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। निचले इलाकों में स्कूलों का निर्माण होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों ने स्कूलों के भवन निर्माण में मानक की घोर अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया है।
बीएसए ने बीईओ व शिक्षकों को बाढ़ प्रभावित इलाकों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ सावधानी बरतने का निर्देश दिया है। नगर शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय अचलापुर में सुआंव नाले के बाढ़ का पानी भर जाने से मंगलवार को ताला लटकता मिला। स्कूल में भरे बाढ़ के पानी में बच्चे नहा रहे थे।
हेडमास्टर राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ का पानी भरा होने के चलते स्कूल बंद कर दिया गया है। वहीं सदर शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सेमरहना सिसई में भी बाढ़ का पानी भर जाने से स्कूल बंद हो गया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि निचले इलाके में स्कूल बना होने से बाढ़ का पानी हर साल भर जाता है।
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अचलापुर व सेमरहना स्कूलों में बाढ़ का पानी भरा होने की तो महज बानगी है। इसी प्रकार से जिले के करीब ढाई सौ स्कूलों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। शिक्षा क्षेत्र सदर में 35, तुलसीपुर में 45, शिवपुरा में 40, श्रीदत्तगंज में 30, उतरौला में 30, गैसड़ी में 25, पचपेड़वा में 30 व गैड़ास बुजुर्ग में 25 से अधिक स्कूलों में बाढ़ का पानी भरने से ताले लटक रहे हैं।
बीएसए हरिहर प्रसाद भारती ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित स्कूलों को 17 जुलाई तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। यदि बाढ़ की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो छुट्टी बढ़ाई जा सकती है। बीईओ व शिक्षकों को बाढ़ प्रभावित इलाकों वाले स्कूली छात्रों के साथ बेहद सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया है जिससे कोई अप्रिय घटना न घट सके। यदि संभव हो सके तो सूखे व ऊंचे स्थानों पर छात्रों को एकत्रित करके पढ़ा सकते हैं।
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बीएसए ने बीईओ व शिक्षकों को बाढ़ प्रभावित इलाकों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ सावधानी बरतने का निर्देश दिया है। नगर शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय अचलापुर में सुआंव नाले के बाढ़ का पानी भर जाने से मंगलवार को ताला लटकता मिला। स्कूल में भरे बाढ़ के पानी में बच्चे नहा रहे थे।
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हेडमास्टर राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ का पानी भरा होने के चलते स्कूल बंद कर दिया गया है। वहीं सदर शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सेमरहना सिसई में भी बाढ़ का पानी भर जाने से स्कूल बंद हो गया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि निचले इलाके में स्कूल बना होने से बाढ़ का पानी हर साल भर जाता है।
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अचलापुर व सेमरहना स्कूलों में बाढ़ का पानी भरा होने की तो महज बानगी है। इसी प्रकार से जिले के करीब ढाई सौ स्कूलों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। शिक्षा क्षेत्र सदर में 35, तुलसीपुर में 45, शिवपुरा में 40, श्रीदत्तगंज में 30, उतरौला में 30, गैसड़ी में 25, पचपेड़वा में 30 व गैड़ास बुजुर्ग में 25 से अधिक स्कूलों में बाढ़ का पानी भरने से ताले लटक रहे हैं।
बीएसए हरिहर प्रसाद भारती ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित स्कूलों को 17 जुलाई तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। यदि बाढ़ की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो छुट्टी बढ़ाई जा सकती है। बीईओ व शिक्षकों को बाढ़ प्रभावित इलाकों वाले स्कूली छात्रों के साथ बेहद सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया है जिससे कोई अप्रिय घटना न घट सके। यदि संभव हो सके तो सूखे व ऊंचे स्थानों पर छात्रों को एकत्रित करके पढ़ा सकते हैं।