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खतरे के निशान से मात्र 10 सेमी दूर है राप्ती नदी
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बलरामपुर। कई दिनों से लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश ने जिले में बाढ़ के हालात पैदा कर दिए हैं। पहाड़ी नाले की तबाही के बाद अब राप्ती नदी भी तेजी से खतरे के निशान की तरफ बढ़ रही है।
नदी खतरे के निशान 104.620 मीटर से मात्र 10 सेमी नीचे 104.520 मीटर पर बह रही है। जलस्तर में एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि जारी है।
उधर देर शाम लउकहवा गांव के पास बलरामपुर-तुलसीपुर नेशनल हाईवे कट गया। इससे कटान स्थल के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन ठप हो गया।
पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश के चलते खरझार पहाड़ी नाले की बाढ़ ने रामगढ़ मैटहवा समेत 12 गांवों में एक सप्ताह से तबाही मचा रखी है। सड़कें पानी से तबाह हो गई है।
लोगों को आवागमन में भारी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। भैंसहवा तथा दतरंगवा डिप पर नाव लगाई गई है। लोहेपनिया गांव के निकट गत वर्ष चार करोड़ तीन लाख रुपये की लागत से खरझार नाले पर बना सुरक्षा बांध बाढ़ के चलते तीन जगह कट गया है।
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इससे कई अन्य गांवों में भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि नाले का जलस्तर अभी कम होने से बाढ़ का खतरा टला हुआ है। लोहेपनिया के ग्राम प्रधान महेंद्र तिवारी ने बताया कि तेज बहाव के चलते खरझार नाले की धार बदल रही है जिसके चलते सुरक्षा बांध पर भी पानी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
उपजिलाधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि विगत दिनों आई बाढ़ एवं बारिश के कारण खरझार पहाड़ी नाले का एप्रोच कटने की सूचना मिली है। शीघ्र ही एप्रोच की मरम्मत करायी जाएगी। बाढ़ में नुकसान हुई फसल एवं बर्बाद हुई सड़कों का मुआयना कराया जा रहा है। शीघ्र ही पीड़ितों को सहायता पहुंचाई जाएगी।
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नदी खतरे के निशान 104.620 मीटर से मात्र 10 सेमी नीचे 104.520 मीटर पर बह रही है। जलस्तर में एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि जारी है।
उधर देर शाम लउकहवा गांव के पास बलरामपुर-तुलसीपुर नेशनल हाईवे कट गया। इससे कटान स्थल के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन ठप हो गया।
पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश के चलते खरझार पहाड़ी नाले की बाढ़ ने रामगढ़ मैटहवा समेत 12 गांवों में एक सप्ताह से तबाही मचा रखी है। सड़कें पानी से तबाह हो गई है।
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लोगों को आवागमन में भारी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। भैंसहवा तथा दतरंगवा डिप पर नाव लगाई गई है। लोहेपनिया गांव के निकट गत वर्ष चार करोड़ तीन लाख रुपये की लागत से खरझार नाले पर बना सुरक्षा बांध बाढ़ के चलते तीन जगह कट गया है।
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इससे कई अन्य गांवों में भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि नाले का जलस्तर अभी कम होने से बाढ़ का खतरा टला हुआ है। लोहेपनिया के ग्राम प्रधान महेंद्र तिवारी ने बताया कि तेज बहाव के चलते खरझार नाले की धार बदल रही है जिसके चलते सुरक्षा बांध पर भी पानी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
उपजिलाधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि विगत दिनों आई बाढ़ एवं बारिश के कारण खरझार पहाड़ी नाले का एप्रोच कटने की सूचना मिली है। शीघ्र ही एप्रोच की मरम्मत करायी जाएगी। बाढ़ में नुकसान हुई फसल एवं बर्बाद हुई सड़कों का मुआयना कराया जा रहा है। शीघ्र ही पीड़ितों को सहायता पहुंचाई जाएगी।