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Balrampur News: महिला आरक्षी से छेड़छाड़ में तीन पुलिसकर्मियों पर एफआईआर, निलंबित
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अमर उजाला में प्रकाशित खबर
बलरामपुर। महिला आरक्षी के साथ 15 मार्च को कोतवाली देहात परिसर में हुई छेड़छाड़ के मामले में आठ महीने बाद आरोपी तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस अधीक्षक ने थाने के तत्कालीन हेड कांस्टेबल अमित कुमार के साथ ही कांस्टेबल शैलेंद्र कुमार व पन्नेलाल को निलंबित भी कर दिया है। 16 नवंबर को अमर उजाला में खबर प्रकाशित हुई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया था। 17 नवंबर को प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री संजय प्रसाद ने जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब महिला आरक्षी की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
महिला आरक्षी की तहरीर के अनुसार घटना 15 मार्च 2025 की दोपहर की है, जब थाना परिसर में औपचारिक रूप से होली कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान थाने के हेड कांस्टेबल अमित कुमार, कांस्टेबल शैलेंद्र कुमार और कांस्टेबल पन्नेलाल शराब के नशे में थे। आरोप है कि तीनों ने न केवल जबरन रंग लगाने की कोशिश की, बल्कि इस बहाने उन्होंने उनके शरीर को अनुचित रूप से स्पर्श किया। बताया वे कार्यक्रम में दूरी बनाकर खड़ी थीं, लेकिन तीनों कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और धक्का-मुक्की करते हुए नजदीक आने की कोशिश की। आरोप है कि इस दौरान मौके पर मौजूद कुछ कर्मचारी घटना को सामान्य होली-हंगामा समझकर नजरअंदाज करते रहे। वह शोर मचाकर खुद को बचाने के प्रयास में परिसर में खड़े एक ट्रैक्टर पर चढ़ गईं लेकिन तीनों ट्रैक्टर पर भी चढ़ने लगे। चोट लगने के डर से वह नीचे उतरीं तो दीवान व अन्य सिपाहियों ने छेड़खानी की। प्रभारी निरीक्षक गिरजेश तिवारी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना प्रीति वर्मा को साैंपी गई है।
पहले भी की थी छेड़खानी को कोशिश
महिला आरक्षी ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि हेड कांस्टेबल अमित कुमार पहले भी एक बार उनके साथ अनुचित तरीके से छूने की हरकत कर चुके थे। उस समय उन्होंने मानवता के नाते मामले को आगे बढ़ाने के बजाय चेतावनी देकर छोड़ दिया था। उनका कहना है कि उनके शांत रवैये का आरोपितों ने गलत तरीके से फायदा उठाया और इस बार टीम बनाकर उनके साथ गलत व्यवहार किया।
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थाने पर की शिकायत, मगर दब गई फाइल
घटना के बाद 15 मार्च की शाम को ही महिला आरक्षी ने प्रभारी निरीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी थी। तीनों कर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग भी की थी, लेकिन न तो इस शिकायत को दर्ज रोजनामचा में अंकित किया गया और न ही कोई प्रारंभिक जांच शुरू हुई। थाने पर मौजूद कुछ लोगों ने इसे त्योहार की मौज-मस्ती से जोड़ दिया, जिससे पीड़िता और अधिक आहत हुईं। थाने पर कोई कार्रवाई न देख महिला आरक्षी ने 17 मार्च को अपर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। अपर पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच क्षेत्राधिकारी को सौंप दी। लेकिन, काफी समय बीतने के बाद भी न तो दीवान व आरक्षियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और न ही विभागीय कार्रवाई।
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महिला आरक्षी की तहरीर के अनुसार घटना 15 मार्च 2025 की दोपहर की है, जब थाना परिसर में औपचारिक रूप से होली कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान थाने के हेड कांस्टेबल अमित कुमार, कांस्टेबल शैलेंद्र कुमार और कांस्टेबल पन्नेलाल शराब के नशे में थे। आरोप है कि तीनों ने न केवल जबरन रंग लगाने की कोशिश की, बल्कि इस बहाने उन्होंने उनके शरीर को अनुचित रूप से स्पर्श किया। बताया वे कार्यक्रम में दूरी बनाकर खड़ी थीं, लेकिन तीनों कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और धक्का-मुक्की करते हुए नजदीक आने की कोशिश की। आरोप है कि इस दौरान मौके पर मौजूद कुछ कर्मचारी घटना को सामान्य होली-हंगामा समझकर नजरअंदाज करते रहे। वह शोर मचाकर खुद को बचाने के प्रयास में परिसर में खड़े एक ट्रैक्टर पर चढ़ गईं लेकिन तीनों ट्रैक्टर पर भी चढ़ने लगे। चोट लगने के डर से वह नीचे उतरीं तो दीवान व अन्य सिपाहियों ने छेड़खानी की। प्रभारी निरीक्षक गिरजेश तिवारी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना प्रीति वर्मा को साैंपी गई है।
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पहले भी की थी छेड़खानी को कोशिश
महिला आरक्षी ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि हेड कांस्टेबल अमित कुमार पहले भी एक बार उनके साथ अनुचित तरीके से छूने की हरकत कर चुके थे। उस समय उन्होंने मानवता के नाते मामले को आगे बढ़ाने के बजाय चेतावनी देकर छोड़ दिया था। उनका कहना है कि उनके शांत रवैये का आरोपितों ने गलत तरीके से फायदा उठाया और इस बार टीम बनाकर उनके साथ गलत व्यवहार किया।
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थाने पर की शिकायत, मगर दब गई फाइल
घटना के बाद 15 मार्च की शाम को ही महिला आरक्षी ने प्रभारी निरीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी थी। तीनों कर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग भी की थी, लेकिन न तो इस शिकायत को दर्ज रोजनामचा में अंकित किया गया और न ही कोई प्रारंभिक जांच शुरू हुई। थाने पर मौजूद कुछ लोगों ने इसे त्योहार की मौज-मस्ती से जोड़ दिया, जिससे पीड़िता और अधिक आहत हुईं। थाने पर कोई कार्रवाई न देख महिला आरक्षी ने 17 मार्च को अपर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। अपर पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच क्षेत्राधिकारी को सौंप दी। लेकिन, काफी समय बीतने के बाद भी न तो दीवान व आरक्षियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और न ही विभागीय कार्रवाई।