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किसान संगठनों ने जताया विरोध, भारत बंद बेअसर

Mon, 27 Sep 2021 11:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Sep 2021 11:06 PM IST
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Farmers organizations protested
बलरामपुर। कृषि के तीनों नए कानूनों को काला करार देते हुए किसान संगठनों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट व तहसीलों में प्रदर्शन कर विरोध जताया। कृषि के तीनों नए काले कानून बताने वाले किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री से तत्काल वापस लेने की मांग उठाई। धरने-प्रदर्शन के बाद किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन मौके पर मौजूद अधिकारियों को सौंपा।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव हाजी नब्बन खां, सह सचिव कल्लू सिंह चौहान, राज्य कौंसिल सदस्य राम तीरथ मौर्य, नगर सचिव कैलाश श्रीवास्तव, सतीश श्रीवास्तव, इमरान, अब्दुल कादिर, सिकंदर खां, सफीक अंसारी, गुड्डू, अमीरुल, मोहम्मद आरिफ, मलहू व मौलाना निजामुद्दीन आदि ने सदर तहसील गेट पर धरने को संबोधित करते हुए कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है।
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देश का किसान ही सबसे अधिक दुखी है जो आपकी सरकार ने नय कृषि कानून बनाया है वह किसान विरोधी है। देश के समस्त किसान संगठनों का फैसला है कि इस कालू कानून को वापस लेने के लिए आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
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नए कृषि कानून वापस लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी दी जाए। आंदोलन में शहीद किसानों के परिवारों को उचित मुआवजा, कर्जा माफी, 60 वर्ष की आयु पूरा करने वाले किसानों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन, अनाज व गन्ने का मूल्य सरकार को तय करने, डीजल, पेट्रोल व रसोई गैस की बढ़ी कीमतें वापस लेने, जीवन रक्षक दवाओं का रेट कम करने, बिजली की बढ़ी दरें वापस लेने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, धर्मगुरुओं पर लगाए गए फर्जी मुकदमों को वापस लेने, गरीबों को राशन देने, श्रमिकों को जॉबकार्ड देकर 100 दिन का रोजगार देने और दिल्ली सरकार की तर्ज पर 200 यूनिट बिजली, पानी व हर बीमारी का इलाज मुफ्त कराने की मांग की गई है।

भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष ह्दयराम वर्मा, छेदीराम, दीनानाथ तिवारी, राजकुमार यादव, वंशी लाल व झगरु प्रसाद आदि ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और डीएम को ज्ञापन सौंपा। अन्य कई किसान संगठनों ने भी भारत बंद का समर्थन करते हुए आंदोलन किया। किसान संगठनों के भारत बंद का जिले में असर नहीं दिखा। नगर व ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों में दिनभर दुकानें खुलीं रहीं।
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