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खुले में फेंक दी गईं भारी मात्रा में एक्सपायर्ड दवाएं

Mon, 14 Sep 2020 09:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2020 09:57 PM IST
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Expired medicines thrown in open
बलरामपुर। एक ओर जहां मरीजों को दवाएं नहीं नसीब हो रही हैं। वहीं दूसरी ओर लाखों की दवाएं बर्बाद की जा रही हैं। यही नहीं लोगों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। सोमवार को भारी मात्रा में एक्सपायर्ड दवाएं शहर किनारे बांध पर खुले में डाल दी गईं। दरअसल नियम के अनुसार ये दवाएं या तो फार्मा कंपनी वापस ले लेती है या फिर इन्हें किसी गड्ढे में दबा दिया जाता है। ताकि इनसे पर्यावरण और लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव न पड़े।
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बंधे पर फेंकी गई दवाओं में सैकड़ों शीशी सीरप, टैबलेट व एंटीबॉयोटिक दवाएं हैं। अब यह दवाएं सरकारी अस्पताल की हैं या प्राइवेट यह भी जांच का विषय है। लेकिन इतनी भारी मात्रा में फेंकी गई दवाएं लाखों लोगों के सेहत को बिगाड़ सकती हैं। एक्सपाइरी दवाओं से निकलने वाली केमिकलयुक्त हवा शहरवासियों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
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कोरोना संक्रमण काल में एक ओर जहां लोगों को शुद्ध वातावरण में रहने की सलाह दी जाती है वहीं पॉश इलाके से चंद कदम की दूरी पर बने बांध पर सैकड़ों टैबलेट, सीरप व अन्य दवाएं खुले में फेंक दी गई हैं। दवाओं को देखकर लगता है कि उन्हें लगातार कई दिनों से बांध के किनारे अलग-अलग स्थानों पर फेंका जा रहा है। बंधे के किनारे तालाब का संचालन करने वाले लतीफ बोस का कहना है कि रात के अंधेरे में कुछ अज्ञात लोग आकर दवाएं फेंक देते हैं। यह दवाएं बरसात व हवाओं के साथ तालाब में चली आती हैं। दवाओं से मछलियां भी प्रभावित होती हैं। हमें भी इसकी वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
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हो सकते हैं सांस, फेफड़े और त्वचा के रोग
जानकारों के अनुसार दवा को खुले में फेंकना या उसे जलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। दवा तभी तक दवा है जब तक उसकी एक्सपाइयरी डेट नहीं निकलती। इसके बाद वह जहर के समान हो जाती हैं। यह पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक है। खुले में फेंकी गई दवाएं खाकर मवेशी भी बीमार हो सकते हैं। रासायनिक दवाएं हवा में घुलकर उसे जहरीला भी बना सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि दवाओं को फेंकने से निकलने वाला केमिकल लोगों में सांस, फेफड़ों व त्वचा संबंधी बीमारी पैदा कर सकता है।
एक्सपाइरी दवाओं के निस्तारण का यह है नियम
एक्सपाइरी दवाओं को कंपनियां नियमों के तहत वापस ले लेती हैं लेकिन कुछ दवाएं जो वापस नहीं होती हैं उन्हें जमीन के अंदर गड्ढा बनाकर पाटने का नियम है। दवाएं पाटने के बाद उसके ऊपर चूने का छिड़काव भी कराया जाता है। यह भी निगरानी की जाती है कि उसे कोई जानवर खोदकर बाहर न निकाल पाए।

जांच के बाद दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
दवाओं को खुले में फेंकना अपराध की श्रेणी में आता है। खुले में फेंकी गई दवाएं सरकारी हैं या दवा विक्रेताओं की इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. घनश्याम सिंह, सीएमओ बलरामपुर
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