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तालाबों पर अतिक्रमण, विलुप्त हो रहे प्राकृतिक जलस्रोत
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बलरामपुर के पजौव्वा तालाब पर हुआ अतिक्रमण।
- फोटो : BALRAMPUR
बलरामपुर। नगर क्षेत्र में जल संरक्षण व संचयन के लिए बनाए गए प्राकृतिक तालाबों पर भू माफियाओं का लगातार कब्जा हो रहा है। शहरपनाह नाला हो या तालाब सभी अतिक्रमण की चपेट में हैं। पहाड़ी नाले के आसपास प्लाटिंग का काम किया जा रहा है।
भू माफियाओं के लगातार सक्रिय होने से प्राकृतिक जलस्रोत धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा है। जानकारी पर भी प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं।
न्यायालय के आदेश के बावजूद तालाबों के अस्तित्व पर मंडरा रहा संकट बढ़ता ही जा रहा है। प्रशासन की उदासीनता के चलते तालाबों का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो शीघ्र ही प्रकृति की अमूल्य धरोहर तालाब व कुएं इतिहास के पन्नों में दब जाएंगे।
आने वाली पीढ़ी को तालाब व कुएं के बारे में जानकारी तक नहीं हो पाएगी। नगर के टेढ़ी बाजार स्थित गायत्री शक्तिपीठ व गुरुद्वारे के निकट स्थित पजौव्वा तालाब जहां करीब दो दशक पूर्व मत्स्य आखेट कर लोग जल बिहार करते थे। आज यह तालाब गंदगी व अतिक्रमण से कराह रहा है।
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लोगों के घरों का गंदा पानी व कूड़ा-करकट गिरने से तालाब का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। इसी तरह मोतीसागर स्थित तालाब, चिकनी मोहल्ले में स्थित तालाब, मेवालाल तालाब, सुआंव नाला सहित तुलसीपुर व उतरौला तहसील क्षेत्र में कई तालाबों अतिक्रमण की चपेट में हैं।
स्थिति यह है कि जिले में शायद ही कोई तालाब या कुआं ऐसा हो जो अतिक्रमण की चपेट में न हो। प्राकृतिक जलाशय सिल्ट की सफाई न होने से पटते जा रहे हैं। तालाबों व कुओं में लोग कूड़ा-करकट व मिट्टी डालकर पाट रहे हैं। प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर मूकदर्शक बना हुआ है।
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भू माफियाओं के लगातार सक्रिय होने से प्राकृतिक जलस्रोत धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा है। जानकारी पर भी प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं।
न्यायालय के आदेश के बावजूद तालाबों के अस्तित्व पर मंडरा रहा संकट बढ़ता ही जा रहा है। प्रशासन की उदासीनता के चलते तालाबों का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो शीघ्र ही प्रकृति की अमूल्य धरोहर तालाब व कुएं इतिहास के पन्नों में दब जाएंगे।
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आने वाली पीढ़ी को तालाब व कुएं के बारे में जानकारी तक नहीं हो पाएगी। नगर के टेढ़ी बाजार स्थित गायत्री शक्तिपीठ व गुरुद्वारे के निकट स्थित पजौव्वा तालाब जहां करीब दो दशक पूर्व मत्स्य आखेट कर लोग जल बिहार करते थे। आज यह तालाब गंदगी व अतिक्रमण से कराह रहा है।
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लोगों के घरों का गंदा पानी व कूड़ा-करकट गिरने से तालाब का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। इसी तरह मोतीसागर स्थित तालाब, चिकनी मोहल्ले में स्थित तालाब, मेवालाल तालाब, सुआंव नाला सहित तुलसीपुर व उतरौला तहसील क्षेत्र में कई तालाबों अतिक्रमण की चपेट में हैं।
स्थिति यह है कि जिले में शायद ही कोई तालाब या कुआं ऐसा हो जो अतिक्रमण की चपेट में न हो। प्राकृतिक जलाशय सिल्ट की सफाई न होने से पटते जा रहे हैं। तालाबों व कुओं में लोग कूड़ा-करकट व मिट्टी डालकर पाट रहे हैं। प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर मूकदर्शक बना हुआ है।