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Balrampur News: नौकरीपेशा महिलाएं भी रख रहीं रोजा
Tue, 11 Apr 2023 12:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 11 Apr 2023 12:09 AM IST
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बलरामपुर। रमजान के पाक महीने में हर बालिग मर्द व औरत का रोजा रखना फर्ज है। रमजान माह की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जॉब करने वाली महिलाएं भी रोजा रखकर विभागीय कार्यों में जुटी रहती हैं। ऑफिस व घर के कामों के साथ-साथ नमाज और इबादत भी पूरे मनोयोग से करती हैं।
उतरौला निवासी डॉ. हिना कौशर रमजान माह में सभी रोजे रखती हैं। वह पांचों वक्त की नमाज भी पढ़ती हैं। रोजे और नमाज के साथ अपने कार्य को भी बखूबी अंजाम दे रही हैं। डॉ. हिना कौशर ने बताया कि रोजा फर्ज है। इसे रखना जरूरी है। रोजे को लेकर कभी नौकरी में दिक्कत नहीं आती है। वह बचपन से रोजा रखती आई हैं।
नगर के मोहल्ला बलुहा निवासी सबा निजाम ने बताया कि वह कंपोजिट विद्यालय मेहीलालपुरवा में शिक्षिका के पद पर तैनात हैं। सुबह घर का काम निपटाने के बाद स्कूल जाती हैं। रोजा रखने के साथ-साथ घर व जॉब की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। स्कूल की छुट्टी के बाद नमाज और इफ्तार की तैयारी में कब वक्त निकल जाता है, पता ही नहीं चलता।
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अंधियारीबाग मोहल्ला निवासी शिक्षिका सलमा खान ने बताया कि वह आदर्श कंपोजिट विद्यालय नगर में पढ़ाती हैं। सुबह की सहरी से दिन की शुरुआत करती हैं। बच्चों को स्कूल भेजने के बाद घर का काम करके खुद स्कूल पहुंचती हैं। दिनभर बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के बाद शाम को घर पर इफ्तार की तैयारी में जुट जाती हैं।
गदुरहवा मोहल्ला निवासी डॉ. अर्शी अनीस पेशे से चिकित्सक हैं। उनका कहना है कि घर का सारा काम करने के बाद अस्पताल के लिए निकलती हूं। दिनभर मरीजों को देखने के साथ ही पांचों वक्त की नमाज भी अदा करती हूं। घर के काम के साथ-साथ अल्लाह की इबादत करना अच्छा लगता है। रमजान माह के दौरान मरीजों की बेहतर सेवा करके सुकून मिलता है।
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उतरौला निवासी डॉ. हिना कौशर रमजान माह में सभी रोजे रखती हैं। वह पांचों वक्त की नमाज भी पढ़ती हैं। रोजे और नमाज के साथ अपने कार्य को भी बखूबी अंजाम दे रही हैं। डॉ. हिना कौशर ने बताया कि रोजा फर्ज है। इसे रखना जरूरी है। रोजे को लेकर कभी नौकरी में दिक्कत नहीं आती है। वह बचपन से रोजा रखती आई हैं।
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नगर के मोहल्ला बलुहा निवासी सबा निजाम ने बताया कि वह कंपोजिट विद्यालय मेहीलालपुरवा में शिक्षिका के पद पर तैनात हैं। सुबह घर का काम निपटाने के बाद स्कूल जाती हैं। रोजा रखने के साथ-साथ घर व जॉब की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। स्कूल की छुट्टी के बाद नमाज और इफ्तार की तैयारी में कब वक्त निकल जाता है, पता ही नहीं चलता।
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अंधियारीबाग मोहल्ला निवासी शिक्षिका सलमा खान ने बताया कि वह आदर्श कंपोजिट विद्यालय नगर में पढ़ाती हैं। सुबह की सहरी से दिन की शुरुआत करती हैं। बच्चों को स्कूल भेजने के बाद घर का काम करके खुद स्कूल पहुंचती हैं। दिनभर बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के बाद शाम को घर पर इफ्तार की तैयारी में जुट जाती हैं।
गदुरहवा मोहल्ला निवासी डॉ. अर्शी अनीस पेशे से चिकित्सक हैं। उनका कहना है कि घर का सारा काम करने के बाद अस्पताल के लिए निकलती हूं। दिनभर मरीजों को देखने के साथ ही पांचों वक्त की नमाज भी अदा करती हूं। घर के काम के साथ-साथ अल्लाह की इबादत करना अच्छा लगता है। रमजान माह के दौरान मरीजों की बेहतर सेवा करके सुकून मिलता है।