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Balrampur News: कहानी, कविता व टीएलएम से बच्चों में भाषा व गणित की समझ विकसित करने पर जोर
Fri, 21 Aug 2026 10:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 21 Aug 2026 10:46 PM IST
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फोटो-25-बलरामपुर में बीआरसी हरैया सतघरवा में मौजूद शिक्षक ।-स्रोत : विभाग
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शिवपुरा। ब्लॉक संसाधन केंद्र शिवपुरा में चल रहे पांच दिवसीय आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) प्रशिक्षण के दूसरे दिन शुक्रवार को शिक्षकों को रुचिकर और गतिविधि आधारित शिक्षण के तरीके बताए गए। बच्चों में भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने के साथ ही उनकी सीखने की प्रगति का सतत आकलन करने पर जोर दिया गया।
एआरपी निर्मल कुमार द्विवेदी ने कहा कि बुनियादी शिक्षा मजबूत किए बिना निपुण लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है। उन्होंने कहानी, कविता, खेल और टीएलएम के माध्यम से बच्चों में भाषा की समझ विकसित करने के तरीके बताए। साथ ही भाषा की पूर्व तैयारी से संबंधित गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
एआरपी सुबोध श्रीवास्तव ने गणित शिक्षण की सरल और प्रभावी तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संख्या ज्ञान, जोड़-घटाव जैसी संकल्पनाओं को दैनिक जीवन के उदाहरणों और गतिविधियों से जोड़कर पढ़ाने से बच्चे आसानी से समझते हैं। उन्होंने गतिविधि आधारित गणित शिक्षण के विभिन्न तरीकों का अभ्यास कराया।
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एआरपी उमाशंकर गुप्ता ने कक्षा एक से तीन तक के बच्चों के लिए सीखने का अनुकूल वातावरण तैयार करने और सतत मूल्यांकन को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की प्रगति का नियमित आकलन कर कमजोरियों की पहचान की जाए और उसके अनुसार उपचारात्मक शिक्षण कराया जाए।
प्रशिक्षण में शिक्षकों ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की और बताए गए तरीकों का अभ्यास किया। इस दौरान चैतन्यानंद शर्मा, अंजू मिश्रा, नेहा पाठक, राजकुमार वर्मा, सविता मिश्रा, चरण दास ओझा, पूनम शुक्ला, अवधेश कुमार साहू सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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एआरपी निर्मल कुमार द्विवेदी ने कहा कि बुनियादी शिक्षा मजबूत किए बिना निपुण लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है। उन्होंने कहानी, कविता, खेल और टीएलएम के माध्यम से बच्चों में भाषा की समझ विकसित करने के तरीके बताए। साथ ही भाषा की पूर्व तैयारी से संबंधित गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
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एआरपी सुबोध श्रीवास्तव ने गणित शिक्षण की सरल और प्रभावी तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संख्या ज्ञान, जोड़-घटाव जैसी संकल्पनाओं को दैनिक जीवन के उदाहरणों और गतिविधियों से जोड़कर पढ़ाने से बच्चे आसानी से समझते हैं। उन्होंने गतिविधि आधारित गणित शिक्षण के विभिन्न तरीकों का अभ्यास कराया।
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एआरपी उमाशंकर गुप्ता ने कक्षा एक से तीन तक के बच्चों के लिए सीखने का अनुकूल वातावरण तैयार करने और सतत मूल्यांकन को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की प्रगति का नियमित आकलन कर कमजोरियों की पहचान की जाए और उसके अनुसार उपचारात्मक शिक्षण कराया जाए।
प्रशिक्षण में शिक्षकों ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की और बताए गए तरीकों का अभ्यास किया। इस दौरान चैतन्यानंद शर्मा, अंजू मिश्रा, नेहा पाठक, राजकुमार वर्मा, सविता मिश्रा, चरण दास ओझा, पूनम शुक्ला, अवधेश कुमार साहू सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।