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Balrampur News: आपदा प्रबंधन के लिए एक साथ आए आठ जिले
Wed, 26 Apr 2023 11:10 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 26 Apr 2023 11:10 PM IST
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बलरामपुर। बाढ़ व अन्य आपदाओं की विभीषिका से निपटने के लिए अब एक नई पहल की गई है। बाढ़ के लिहाज से बलरामपुर के साथ ही गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, अयोध्या, बस्ती, सिद्धार्थनगर व बाराबंकी जिले एक साथ रहेंगे। प्रत्येक जिला आपदा के दौरान हर एक गतिविधि की जानकारी एक दूसरे को देंगे ताकि आपदा को रोका जा सके। इसके लिए माइक्रोप्लान तैयार किया जा रहा है।
बुधवार को गूगल मीट के माध्यम से इन जिलों के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें प्रमुख आपदाओं विशेषकर बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव के साथ ही बाढ़ पूर्व तैयारियों, नवाचारों तथा विभिन्न समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। जिला आपदा विशेषज्ञ बलरामपुर अरुण सिंह ने कहा कि सामान्यत: बाढ़ संबंधी तैयारियां पूर्व के अनुभवों व रिकाॅर्ड को देखते हुए की जाती है लेकिन गत वर्ष अक्टूबर माह में आई बाढ़ अब तक के उच्चतम स्तर पर रही। इसके कारण काफी नुकसान हुआ। हालांकि जिला प्रशासन ने युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए राहत व बचाव कार्य संपादित कराए।
कहा कि इसे देखते हुए अब यह आवश्यक हो गया है कि बाढ़ पूर्व तैयारियां गत वर्ष के अनुभवों के सापेक्ष भविष्य के लिए उससे भी अधिक का मानक निर्धारित करते हुए की जाय। इसके लिए सभी जिलों में आपसी समन्वय तथा सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान आवश्यक है।
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इस पर करें फोकस
जिला आपदा विशेषज्ञ गोंडा राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि सीमावर्ती सभी जनपद बाढ़ की समस्या से ग्रसित हैं। ऐसे में बाढ़ पूर्व तैयारियां व संसाधनों की उपलब्धता के बारे में एक-दूसरे से समन्वय नितांत आवश्यक है ताकि आपदा के दौरान पड़ोसी जनपदों से तत्काल मदद ली जा सके। श्रावस्ती के जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण कुमार मिश्र ने कहा कि आपदा के दौरान संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता व आपसी समन्वय भविष्य में काफी मददगार होगा। बहराइच आपदा विशेषज्ञ सुनील कनौजिया ने कहा कि आपदाओं से संबंधित विकसित विभिन्न सूचना तंत्रों का उपयोग किया जाय तथा इससे संबंधित जानकारियां व अलर्ट को एक दूसरे से साझा किया जाय ताकि अन्य जनपद भी आपदाओं से निपटने के लिए पहले से तैयार हो सके और आपदा को कम से कम किया जा सके।
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बुधवार को गूगल मीट के माध्यम से इन जिलों के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें प्रमुख आपदाओं विशेषकर बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव के साथ ही बाढ़ पूर्व तैयारियों, नवाचारों तथा विभिन्न समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। जिला आपदा विशेषज्ञ बलरामपुर अरुण सिंह ने कहा कि सामान्यत: बाढ़ संबंधी तैयारियां पूर्व के अनुभवों व रिकाॅर्ड को देखते हुए की जाती है लेकिन गत वर्ष अक्टूबर माह में आई बाढ़ अब तक के उच्चतम स्तर पर रही। इसके कारण काफी नुकसान हुआ। हालांकि जिला प्रशासन ने युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए राहत व बचाव कार्य संपादित कराए।
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कहा कि इसे देखते हुए अब यह आवश्यक हो गया है कि बाढ़ पूर्व तैयारियां गत वर्ष के अनुभवों के सापेक्ष भविष्य के लिए उससे भी अधिक का मानक निर्धारित करते हुए की जाय। इसके लिए सभी जिलों में आपसी समन्वय तथा सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान आवश्यक है।
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जिला आपदा विशेषज्ञ गोंडा राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि सीमावर्ती सभी जनपद बाढ़ की समस्या से ग्रसित हैं। ऐसे में बाढ़ पूर्व तैयारियां व संसाधनों की उपलब्धता के बारे में एक-दूसरे से समन्वय नितांत आवश्यक है ताकि आपदा के दौरान पड़ोसी जनपदों से तत्काल मदद ली जा सके। श्रावस्ती के जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण कुमार मिश्र ने कहा कि आपदा के दौरान संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता व आपसी समन्वय भविष्य में काफी मददगार होगा। बहराइच आपदा विशेषज्ञ सुनील कनौजिया ने कहा कि आपदाओं से संबंधित विकसित विभिन्न सूचना तंत्रों का उपयोग किया जाय तथा इससे संबंधित जानकारियां व अलर्ट को एक दूसरे से साझा किया जाय ताकि अन्य जनपद भी आपदाओं से निपटने के लिए पहले से तैयार हो सके और आपदा को कम से कम किया जा सके।