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किडनी मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है डायलिसिस सेंटर
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बलरामपुर। संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में स्थापित डायलिसिस सेंटर किडनी के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां पर 12 मरीजों का प्रतिदिन डायलिसिस किया जाता है। मरीजों को डायलिसिस की सुविधा पूर्ण रूप से मुफ्त मिलती है। इस डायलिसिस सेंटर पर आने वाले किडनी के मरीजों को विशेषज्ञ डाक्टरों का ऑनलाइन सुझाव भी प्राप्त होता है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत मार्च 2019 में डायलिसिस सेंटर का संचालन शुरू किया गया था। जिले में स्थापित डायलिसिस सेंटर का संचालन एस्कॉग संजीवनी प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से किया जा रहा है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में डायलिसिस सेंटर शुरू होने से जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। पहले डायलिसिस कराने के लिए जिले के किडनी रोगियों को जहां लखनऊ जाना पड़ता था वहीं अब जिले में ही डायलिसिस सेंटर खुलने से मरीजों को काफी सहूूलियत मिलने लगी है।
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एस्कॉग संजीवनी संसं्था उत्तर प्रदेश के प्रशासक व डायलिसिस सेंटर के संचालक देबाशीश सेन गुप्ता ने बताया कि विगत दो सालों में इस सेंटर पर करीब 160 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा दी जा चुकी है। वर्तमान समय में 25 मरीज सेंटर पर डायलिसिस कराने के लिए आते हैं।
सेंटर पर उपलब्ध चार मशीनों पर शिफ्ट वाइज 12 लोगों का प्रतिदिन डायलिसिस किया जाता है। एक मरीज के डायलिसिस पर करीब चार घंटे का समय लगता है। यहां आने वाले किडनी के मरीजों को उपचार के संबंध में विशेषज्ञ चिकित्सक ऑनलाइन सुझाव भी देते है। टेली नेफ्रोलॉजिस्ट की सलाह पर ही मरीजों का डायलिसिस किया जाता है।
किडनी का फंक्शन न होने पर मरीजों को कराना होता है डायलिसिस
संयुक्त जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डा. गिरधर चौहान ने बताया कि खून में सीरम क्रेटनिन व यूरिया की मात्रा बढ़ने के कारण व्यक्ति के शरीर में कई तरह की समस्या होने लगती है।
व्यक्ति उच्च रक्तचाप का शिकार हो जाता है। व्यक्ति के शरीर में खून की कमी होने लगती है और शरीर काफी कमजोर हो जाता है। व्यक्ति के किडनी सही ढंग से काम करना बंद कर देती है। किडनी का सही फंक्शन न होने के कारण व्यक्ति को डायलिसिस की आवश्यकता होती है।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत मार्च 2019 में डायलिसिस सेंटर का संचालन शुरू किया गया था। जिले में स्थापित डायलिसिस सेंटर का संचालन एस्कॉग संजीवनी प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से किया जा रहा है।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय में डायलिसिस सेंटर शुरू होने से जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। पहले डायलिसिस कराने के लिए जिले के किडनी रोगियों को जहां लखनऊ जाना पड़ता था वहीं अब जिले में ही डायलिसिस सेंटर खुलने से मरीजों को काफी सहूूलियत मिलने लगी है।
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एस्कॉग संजीवनी संसं्था उत्तर प्रदेश के प्रशासक व डायलिसिस सेंटर के संचालक देबाशीश सेन गुप्ता ने बताया कि विगत दो सालों में इस सेंटर पर करीब 160 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा दी जा चुकी है। वर्तमान समय में 25 मरीज सेंटर पर डायलिसिस कराने के लिए आते हैं।
सेंटर पर उपलब्ध चार मशीनों पर शिफ्ट वाइज 12 लोगों का प्रतिदिन डायलिसिस किया जाता है। एक मरीज के डायलिसिस पर करीब चार घंटे का समय लगता है। यहां आने वाले किडनी के मरीजों को उपचार के संबंध में विशेषज्ञ चिकित्सक ऑनलाइन सुझाव भी देते है। टेली नेफ्रोलॉजिस्ट की सलाह पर ही मरीजों का डायलिसिस किया जाता है।
किडनी का फंक्शन न होने पर मरीजों को कराना होता है डायलिसिस
संयुक्त जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डा. गिरधर चौहान ने बताया कि खून में सीरम क्रेटनिन व यूरिया की मात्रा बढ़ने के कारण व्यक्ति के शरीर में कई तरह की समस्या होने लगती है।
व्यक्ति उच्च रक्तचाप का शिकार हो जाता है। व्यक्ति के शरीर में खून की कमी होने लगती है और शरीर काफी कमजोर हो जाता है। व्यक्ति के किडनी सही ढंग से काम करना बंद कर देती है। किडनी का सही फंक्शन न होने के कारण व्यक्ति को डायलिसिस की आवश्यकता होती है।