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दस घंटे तक मरीजों के बीच रखा शव
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बलरामपुर। जिला मेमोरियल अस्पताल के मेडिकल वार्ड में शनिवार को करीब दस घंटे तक बेड पर एक मरीज का शव पड़ा रहा और मृतक के परिजन रोते-बिलखते रहे। इससे अन्य मरीज व तीमारदार परेशान रहे।
कलेक्ट्रेट के पास कांशीराम आवास का रहने वाला रुद्र कुमार मिश्र (48) लीवर की बीमारी के चलते कई दिन से अस्पताल में भर्ती था। शुक्रवार रात दो बजे उसकी मौत हो गई। परिवार के लोग इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग को लेकर शव लेकर जाने के बजाय वार्ड में ही बैठे रहे।
इससे वहां भर्ती अन्य मरीजों के साथ तीमारदार परेशान रहे। तीमारदार राजेश कुमार, पप्पू व रजनी ने बताया कि बेड नंबर दो पर घंटों शव रखा रहने से काफी परेशानी हुई। कहा कि मृतक के परिजन वार्ड में ही शव के पास सिसक रहे थे। दोपहर 12 बजे के बाद परिजन शव लेकर चले गए, तब तीमारदारों ने राहत की सांस ली।
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जिला मेमोरियल अस्पताल के सीएमएस डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि कई बार शव को वार्ड से हटाकर मर्च्युरी में रखवाने का प्रयास किया गया, लेकिन मृतक के परिजनों ने शव उठाने नहीं दिया। पुलिस को सूचना देने के बाद परिजन शव लेकर चले गए।
नियमानुसार अस्पताल में किसी भी मरीज की मौत होने पर अस्पताल प्रशासन शव को सरकारी वाहन से निशुल्क उसके घर भेज देता है। किसी भी आपात स्थिति अथवा परिजनों के मना करने पर अस्पताल के कर्मचारी शव को वार्ड से हटाकर मर्च्युरी भेज देते हैं। ताकि वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों को कोई परेशानी न हो।
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कलेक्ट्रेट के पास कांशीराम आवास का रहने वाला रुद्र कुमार मिश्र (48) लीवर की बीमारी के चलते कई दिन से अस्पताल में भर्ती था। शुक्रवार रात दो बजे उसकी मौत हो गई। परिवार के लोग इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग को लेकर शव लेकर जाने के बजाय वार्ड में ही बैठे रहे।
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इससे वहां भर्ती अन्य मरीजों के साथ तीमारदार परेशान रहे। तीमारदार राजेश कुमार, पप्पू व रजनी ने बताया कि बेड नंबर दो पर घंटों शव रखा रहने से काफी परेशानी हुई। कहा कि मृतक के परिजन वार्ड में ही शव के पास सिसक रहे थे। दोपहर 12 बजे के बाद परिजन शव लेकर चले गए, तब तीमारदारों ने राहत की सांस ली।
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जिला मेमोरियल अस्पताल के सीएमएस डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि कई बार शव को वार्ड से हटाकर मर्च्युरी में रखवाने का प्रयास किया गया, लेकिन मृतक के परिजनों ने शव उठाने नहीं दिया। पुलिस को सूचना देने के बाद परिजन शव लेकर चले गए।
नियमानुसार अस्पताल में किसी भी मरीज की मौत होने पर अस्पताल प्रशासन शव को सरकारी वाहन से निशुल्क उसके घर भेज देता है। किसी भी आपात स्थिति अथवा परिजनों के मना करने पर अस्पताल के कर्मचारी शव को वार्ड से हटाकर मर्च्युरी भेज देते हैं। ताकि वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों को कोई परेशानी न हो।