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लावारिश शवों के निस्तारण के लिए पुलिस को मिलते हैं 2700 रुपये
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बलरामपुर। उतरौला तहसील गेट पर गत बुुधवार शाम लावारिस हालत में मिले शव को पुलिस ने कूड़ा गाड़ी में लदवा कर जिस तरह मानवता को शर्मसार किया उसी के लिए सरकार से प्रति लाश 2700 रुपये मिलते हैं। हालांकि रुपये प्राप्त करने के लिए बिल, बाउचर सम्मिलित करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त यूपी 112 की गाड़ियाें से भी क्षेत्र में मिलने वाले शवों को संबंधित थाने या अस्पताल पहुंचाया जा सकता है।
विदित हो कि बीते बुधवार को उतरौला तहसील गेट पर ग्राम सहजौरा निवासी अनवर अली की संदिग्ध मौत हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय नगर पालिका से कूड़ा गाड़ी मंगवा कर शव लदवाया गया और उसे कोतवाली ले गई। तहसील गेट से कोतवाली तक ले जाने तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। शिनाख्त होने पर पुलिस ने शव का पंचनामा कर परिवारीजनों को सौंप दिया। कोरोना महामारी के इस दौर में शव का न तो पोस्टमार्टम कराया गया और न ही उसे कोरोना संदिग्ध मानकर सैंपलिंग ही कराई गई।
घटना का वीडियो वायरल होते ही एसपी से डीएम ने मामले का संज्ञान लेने एक दरोगा व दो सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया। चार नगर पालिका कर्मी बर्खास्त कर दिए गए। शव के साथ हुए अमानवीय व्यवहार पर शुक्रवार को अमर उजाला ने लावारिस शवों के निस्तारण की सरकारी व्यवस्था की पड़ताल की। एसपी देवरंजन वर्मा ने बताया कि लावारिस शव निस्तारण के लिए सरकार से प्रति शव 2700 रुपये मिलता है। लावारिस शव का पुलिस वाहन व्यवस्था कर पोस्टमार्टम कराती है।
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शव को शिनाख्त के लिए 72 घंटे तक मोर्चरी में रखा जाता है। 72 घंटे में शिनाख्त न होने पर पुलिस शव का अंतिम संस्कार कराती है। अंतिम संस्कार के बाद बिल बाऊचर पेश करने पर अधिकतम 2700 रुपये का भुगतान किया जाता है। यूपी 112 की गाड़ियों से भी शव को थाने अथवा अस्पताल पहुंचाया जा सकता है। इस संबंध में डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि मामले की जांच एसडीएम व सीओ उतरौला से कराई जा रही है। शव के साथ हुए अमानवीय व्यवहार के लिए भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के अतिरिक्त बलरामपुर नगर निवासी कामरेड हाजी नब्बन खां और वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शाबान अली भी सूचना मिलने पर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार धार्मिक परंपरा के अनुसार करवाते हैं। कई बार पुलिस लावारिस शवों की सूचना इन दोनों लोगों को भी देती है। सूचना मिलने पर यह लोग अपने खर्चे परबबघवारिश शवों का निस्तारण करवाते हैं।
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विदित हो कि बीते बुधवार को उतरौला तहसील गेट पर ग्राम सहजौरा निवासी अनवर अली की संदिग्ध मौत हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय नगर पालिका से कूड़ा गाड़ी मंगवा कर शव लदवाया गया और उसे कोतवाली ले गई। तहसील गेट से कोतवाली तक ले जाने तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। शिनाख्त होने पर पुलिस ने शव का पंचनामा कर परिवारीजनों को सौंप दिया। कोरोना महामारी के इस दौर में शव का न तो पोस्टमार्टम कराया गया और न ही उसे कोरोना संदिग्ध मानकर सैंपलिंग ही कराई गई।
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घटना का वीडियो वायरल होते ही एसपी से डीएम ने मामले का संज्ञान लेने एक दरोगा व दो सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया। चार नगर पालिका कर्मी बर्खास्त कर दिए गए। शव के साथ हुए अमानवीय व्यवहार पर शुक्रवार को अमर उजाला ने लावारिस शवों के निस्तारण की सरकारी व्यवस्था की पड़ताल की। एसपी देवरंजन वर्मा ने बताया कि लावारिस शव निस्तारण के लिए सरकार से प्रति शव 2700 रुपये मिलता है। लावारिस शव का पुलिस वाहन व्यवस्था कर पोस्टमार्टम कराती है।
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शव को शिनाख्त के लिए 72 घंटे तक मोर्चरी में रखा जाता है। 72 घंटे में शिनाख्त न होने पर पुलिस शव का अंतिम संस्कार कराती है। अंतिम संस्कार के बाद बिल बाऊचर पेश करने पर अधिकतम 2700 रुपये का भुगतान किया जाता है। यूपी 112 की गाड़ियों से भी शव को थाने अथवा अस्पताल पहुंचाया जा सकता है। इस संबंध में डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि मामले की जांच एसडीएम व सीओ उतरौला से कराई जा रही है। शव के साथ हुए अमानवीय व्यवहार के लिए भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के अतिरिक्त बलरामपुर नगर निवासी कामरेड हाजी नब्बन खां और वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शाबान अली भी सूचना मिलने पर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार धार्मिक परंपरा के अनुसार करवाते हैं। कई बार पुलिस लावारिस शवों की सूचना इन दोनों लोगों को भी देती है। सूचना मिलने पर यह लोग अपने खर्चे परबबघवारिश शवों का निस्तारण करवाते हैं।