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Balrampur News: 54 थारू गांवों की विरासत सहेजेगा संस्कृति संग्रहालय
Wed, 14 Feb 2024 12:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 14 Feb 2024 12:00 AM IST
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बलरामपुर। पचपेड़वा के इमलिया कोड़र गांव में 24.78 करोड़ की लागत से निर्मित राष्ट्रीय संस्कृति संग्रहालय 54 गांवों से जुड़ी थारू समाज की विरासत को सहेजेगा। शासन स्तर से इसे राष्ट्रीय संग्रहालय का दर्जा देकर थारू समाज को एक नई पहचान दिलाने का प्रयास भी किया जा रहा है। संग्रहालय में संस्कृति मंत्रालय दो विकास खंडों के 54 गांवों में रहने वाली थारू जनजाति से जुड़ी यादों को जुटाकर संरक्षित कर रहा है।
इसके भवन का निर्माण पूरा हो जाने के बाद अब वहां संस्कृति से जुड़ी विरासतों की मूर्तियों को स्थापित किए जाने का कार्य किया जा रहा है। साल 2019 में शुरू हुए संग्रहालय के निर्माण कार्य को चार साल में पूरा कर लिया गया है। इसमें गैसड़ी व पचपेड़वा के 54 ग्राम पंचायतों के थारू जनजाति से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी नियमित तौर पर प्रस्तुत होगी।
भवन संग्रहालय भी थारू जनजाति की वेशभूषा, रहन-सहन, खान-पान, यादों व अन्य विरासत को संजोया जा रहा है। ताकि यहां आने वाले सैलानियों को थारू जनजाति के जीवनशैली के बारे में करीब से जानने का मौका मिल सके। संग्रहालय परिसर में ही अधीक्षक, अधिकारियों, शिक्षकों व कर्मचारियों का आवास भी बनाया गया है। नए वित्तीय वर्ष में कई राष्ट्रीय स्तर के आयोजन भी संग्रहालय परिसर में कराए जाने की तैयारी है।
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- जिले के थारू समाज के लोगों ने पुरानी परंपरा को कायम बनाए रखा है। यहां मिट्टी के घरों के साथ ही विवाह में पुरानी परंपराएं देखने को मिलती हैं। इन परंपराओं को यादगार बनाने के लिए संग्रहालय एक सार्थक भूमिका निभाएगा। सुपरवाइजर जाहिद का कहना है कि संग्रहालय से जुड़े बचे हुए सभी कार्य इस माह के अंत तक पूरे हो जाएंगे। इसके बाद अप्रैल में शुरू होने वाले नए वित्तीय पर्यटकों के लिए संग्रहालय का संचालन शुरू किए जाने की तैयारी है। -
डीएम अरविंद सिंह ने थारू संस्कृति संग्रहालय सरकार की एक महत्वकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य प्राचीन थारू जाति की सांस्कृतिक विरासत को देश भर में एक पहचान दिलाना है। इसी लिए इसे राष्ट्रीय संग्रहालय का दर्जा भी दिया जा रहा है।
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इसके भवन का निर्माण पूरा हो जाने के बाद अब वहां संस्कृति से जुड़ी विरासतों की मूर्तियों को स्थापित किए जाने का कार्य किया जा रहा है। साल 2019 में शुरू हुए संग्रहालय के निर्माण कार्य को चार साल में पूरा कर लिया गया है। इसमें गैसड़ी व पचपेड़वा के 54 ग्राम पंचायतों के थारू जनजाति से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी नियमित तौर पर प्रस्तुत होगी।
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भवन संग्रहालय भी थारू जनजाति की वेशभूषा, रहन-सहन, खान-पान, यादों व अन्य विरासत को संजोया जा रहा है। ताकि यहां आने वाले सैलानियों को थारू जनजाति के जीवनशैली के बारे में करीब से जानने का मौका मिल सके। संग्रहालय परिसर में ही अधीक्षक, अधिकारियों, शिक्षकों व कर्मचारियों का आवास भी बनाया गया है। नए वित्तीय वर्ष में कई राष्ट्रीय स्तर के आयोजन भी संग्रहालय परिसर में कराए जाने की तैयारी है।
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- जिले के थारू समाज के लोगों ने पुरानी परंपरा को कायम बनाए रखा है। यहां मिट्टी के घरों के साथ ही विवाह में पुरानी परंपराएं देखने को मिलती हैं। इन परंपराओं को यादगार बनाने के लिए संग्रहालय एक सार्थक भूमिका निभाएगा। सुपरवाइजर जाहिद का कहना है कि संग्रहालय से जुड़े बचे हुए सभी कार्य इस माह के अंत तक पूरे हो जाएंगे। इसके बाद अप्रैल में शुरू होने वाले नए वित्तीय पर्यटकों के लिए संग्रहालय का संचालन शुरू किए जाने की तैयारी है। -
डीएम अरविंद सिंह ने थारू संस्कृति संग्रहालय सरकार की एक महत्वकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य प्राचीन थारू जाति की सांस्कृतिक विरासत को देश भर में एक पहचान दिलाना है। इसी लिए इसे राष्ट्रीय संग्रहालय का दर्जा भी दिया जा रहा है।